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युवाओं की सक्रिय भागीदारी से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री ने 36 युवा फेलो को दिया जनसेवा का मंत्र  आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण और जिलों में मैदानी अनुभव से शासन की कार्यप्रणाली समझेंगे युवा | निवेश प्रस्तावों को रोजगार में बदलना सरकार की प्राथमिकता  रायपुर, 09 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प साकार होगा। युवाओं के पास शिक्षा, ऊर्जा, प्रतिभा और नए विचारों की शक्ति है। जब इन क्षमताओं का उपयोग जनकल्याण और समाज की बेहतरी के लिए किया जाता है, तो बड़े बदलावों का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें जो भी दायित्व मिले, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करें तथा जनकल्याण को अपने कार्य का मुख्य उद्देश्य बनाएं।  मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 प्रतिभागियों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने छात्र जीवन, संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जनसेवा से जुड़े अनुभव साझा किए। युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने फेलोशिप को शासन की कार्यप्रणाली समझने के साथ अपने ज्ञान, कौशल और नए विचारों के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।  विकसित भारत के संकल्प में युवाओं की भूमिका अहम  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित प्रदेश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में भारत की बढ़ती प्रगति को नई गति देने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।  उन्होंने युवा फेलो को अपनी क्षमताओं को लगातार निखारने, नए विचारों के साथ आगे आने और शासन-प्रशासन के साथ मिलकर जनहित से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आए युवाओं के लिए यह फेलोशिप सीखने, अनुभव प्राप्त करने और अपनी प्रतिभा को प्रदेश के विकास में लगाने का महत्वपूर्ण मंच है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों में कार्य करते समय स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक जरूरतों को समझना आवश्यक है। संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभवों के आधार पर ऐसे सुझाव दिए जाने चाहिए, जिनसे योजनाओं का क्रियान्वयन और जनसेवाएं अधिक प्रभावी बन सकें।  शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ीं सुविधाएं और अवसर  अपने छात्र जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाएं सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से लगभग छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ा था। उस समय स्कूलों के भवन कच्चे होते थे और बच्चों को बैठने के लिए घर से चटाई या जूट का बोरा लेकर जाना पड़ता था।  उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। स्कूलों में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।  प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल रहा है। दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए रहने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए भी राज्य सरकार सहायता उपलब्ध करा रही है।  मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे जहां भी अध्ययन करें, वहां से प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग अपने समाज तथा प्रदेश की उन्नति के लिए करें।  रोजगारपरक कौशल और युवाओं को बेहतर अवसर देने पर जोर  मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए जिलों में लाइवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के 30 आईटीआई का उन्नयन कर उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक बनाया जा रहा है।  उन्होंने बताया कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में 700 से अधिक रोजगार मेलों के माध्यम से करीब 24 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। रायपुर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक नियोक्ताओं ने भाग लिया और लगभग पांच हजार युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप प्रदेश में ही बेहतर अवसर मिलें। युवा नौकरी पाने के साथ-साथ उद्यमी बनकर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करें।  निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना सरकार का लक्ष्य  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता को विशेष प्राथमिकता दी गई है। महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।  उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलना है। निवेश समझौतों के क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा की जा रही है, ताकि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।  अपने हाल के सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, विविध वनोपज और मजबूत औद्योगिक संभावनाएं विकास को नई दिशा देने में सक्षम हैं। सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे नए क्षेत्रों में निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसर सृजित होंगे।  उन्होंने नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित मेडिसिटी और पांच हजार बिस्तरों की अस्पताल सुविधाओं की परिकल्पना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा होंगे।  एआई मिशन से छह लाख विद्यार्थियों को मिलेगी शिक्षा  मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए युवाओं को आधुनिक तकनीक में दक्ष बनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से राज्य के बजट में एआई मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  इस मिशन के माध्यम से छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देने और लगभग डेढ़ हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।  उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से दुनिया को बदल रही है। राज्य सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ के युवा इस बदलाव में केवल सहभागी न रहें, बल्कि भविष्य की तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता भी विकसित करें।  दस वर्ष की उम्र में संभाली परिवार की जिम्मेदारी  युवा फेलो के सवाल पर मुख्यमंत्री ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि लगभग दस वर्ष की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्हें मां, दादी और छोटे भाइयों की देखभाल के साथ खेती-बाड़ी का दायित्व भी संभालना पड़ा।  मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं बैलों से हल चलाने सहित खेती के विभिन्न कार्य किए। इन परिस्थितियों ने उन्हें कम उम्र में ही परिश्रम, जिम्मेदारी और कठिनाइयों का सामना करना सिखाया।  उन्होंने कहा कि कभी कल्पना नहीं की थी कि वे गांव के सरपंच बनेंगे। निर्विरोध सरपंच चुने जाने के बाद उन्हें विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में जनसेवा का अवसर मिला। जीवन में उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया।  मुख्यमंत्री ने दिवंगत दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए उनके धैर्य, सहजता और आत्मीय व्यवहार को अपने लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि जनता के बीच रहना, लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध रहना उनके सार्वजनिक जीवन का आधार रहा है।  उन्होंने युवा फेलो से कहा कि अपने कार्यों के केंद्र में जनकल्याण को रखें। इससे मान-सम्मान और आत्मसंतुष्टि मिलने के साथ प्रदेश, देश और समाज का भी भला होगा।  पांच माह का अध्ययन-प्रशिक्षण, 19 माह का मैदानी अनुभव  सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत ने फेलोशिप कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि द्वितीय बैच में चयनित 36 युवा इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, गणित, वाणिज्य और अर्थशास्त्र सहित विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आए हैं। इनमें कुछ प्रतिभागी अपने स्टार्टअप भी संचालित कर रहे हैं।  दो वर्षीय फेलोशिप कार्यक्रम में कुल पांच माह का अध्ययन एवं प्रशिक्षण और 19 माह का मैदानी अनुभव शामिल है। प्रारंभिक तीन माह आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद प्रतिभागी जिला प्रशासन के साथ जुड़कर योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनसेवाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझेंगे।  राहुल भगत ने प्रतिभागियों को राज्य के विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’ का अध्ययन करने और अपने सपनों के छत्तीसगढ़ को लेकर विचार लिखने के लिए प्रेरित किया।  युवा फेलो ने साझा कीं अपनी जिज्ञासाएं  संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री से फेलोशिप को लेकर उनकी अपेक्षाओं, सुशासन, शिक्षा, रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक और प्रदेश के विकास में युवाओं की भूमिका पर सवाल किए। उन्होंने मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत जीवन और सार्वजनिक सेवा की यात्रा के बारे में भी जानकारी ली।  रायपुर की नीलिमा भारद्वाज ने फेलोशिप के प्रतिभागियों से मुख्यमंत्री की अपेक्षाओं के बारे में पूछा। प्रतिभागी खुशी ने सभी फेलो की ओर से इस अवसर के लिए आभार जताते हुए कहा कि जिलों में काम करने से प्रशासन और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा।  जशपुर के प्रतिभागी अंशुल ने अपनी शिक्षा और फेलोशिप से जुड़ने के उद्देश्य की जानकारी देते हुए प्रदेश से बाहर अध्ययन कर रहे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री का संदेश जानना चाहा। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों की बातों को आत्मीयता से सुना और उन्हें अपने ज्ञान, कौशल तथा अनुभव का उपयोग जनसेवा और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में करने के लिए प्रोत्साहित किया।  14 जिलों के युवा हुए चयनित  उल्लेखनीय है कि सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के सहयोग से मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप संचालित की जा रही है। द्वितीय बैच के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) स्कोर और आईआईएम की चयन प्रक्रिया के माध्यम से 36 युवाओं का चयन किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा, बस्तर और जशपुर सहित प्रदेश के 14 जिलों के युवा शामिल हैं।  फेलो प्रशिक्षण और मैदानी अनुभव के आधार पर योजनाओं की निगरानी, नीतिगत विश्लेषण, विभागीय समन्वय और जनसेवाओं में सुधार के प्रयासों में सहयोग करेंगे। तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम के दौरान राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सुशासन की प्राथमिकताओं, लोक सेवा गारंटी, हितधारकों की पहचान और मैदानी कार्य से जुड़े विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।  कार्यक्रम में भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के उप सचिव सूरज साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। भारत, छत्तीसगढ़, समाचार, रायपुर
09 Oct, 2026 8724

युवाओं की सक्रिय भागीदारी से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री ने 36 युवा फेलो को दिया जनसेवा का मंत्र आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण और जिलों में मैदानी अनुभव से शासन की कार्यप्रणाली समझेंगे युवा | निवेश प्रस्तावों को रोजगार में बदलना सरकार की प्राथमिकता रायपुर, 09 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प साकार होगा। युवाओं के पास शिक्षा, ऊर्जा, प्रतिभा और नए विचारों की शक्ति है। जब इन क्षमताओं का उपयोग जनकल्याण और समाज की बेहतरी के लिए किया जाता है, तो बड़े बदलावों का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें जो भी दायित्व मिले, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करें तथा जनकल्याण को अपने कार्य का मुख्य उद्देश्य बनाएं। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 प्रतिभागियों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने छात्र जीवन, संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जनसेवा से जुड़े अनुभव साझा किए। युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने फेलोशिप को शासन की कार्यप्रणाली समझने के साथ अपने ज्ञान, कौशल और नए विचारों के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। विकसित भारत के संकल्प में युवाओं की भूमिका अहम मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित प्रदेश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में भारत की बढ़ती प्रगति को नई गति देने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने युवा फेलो को अपनी क्षमताओं को लगातार निखारने, नए विचारों के साथ आगे आने और शासन-प्रशासन के साथ मिलकर जनहित से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आए युवाओं के लिए यह फेलोशिप सीखने, अनुभव प्राप्त करने और अपनी प्रतिभा को प्रदेश के विकास में लगाने का महत्वपूर्ण मंच है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों में कार्य करते समय स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक जरूरतों को समझना आवश्यक है। संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभवों के आधार पर ऐसे सुझाव दिए जाने चाहिए, जिनसे योजनाओं का क्रियान्वयन और जनसेवाएं अधिक प्रभावी बन सकें। शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ीं सुविधाएं और अवसर अपने छात्र जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाएं सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से लगभग छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ा था। उस समय स्कूलों के भवन कच्चे होते थे और बच्चों को बैठने के लिए घर से चटाई या जूट का बोरा लेकर जाना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। स्कूलों में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, गणवेश और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। प्रयास आवासीय विद्यालयों के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल रहा है। दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में प्रतियोगी परीक्षाओं की 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उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप प्रदेश में ही बेहतर अवसर मिलें। युवा नौकरी पाने के साथ-साथ उद्यमी बनकर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करें। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना सरकार का लक्ष्य मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं के रोजगार और उद्यमिता को विशेष प्राथमिकता दी गई है। महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलना है। निवेश समझौतों के क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा की जा रही है, ताकि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके। अपने हाल के सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। प्रदेश की समृद्ध खनिज संपदा, विविध वनोपज और मजबूत औद्योगिक संभावनाएं विकास को नई दिशा देने में सक्षम हैं। सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे नए क्षेत्रों में निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसर सृजित होंगे। उन्होंने नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित मेडिसिटी और पांच हजार बिस्तरों की अस्पताल सुविधाओं की परिकल्पना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा होंगे। एआई मिशन से छह लाख विद्यार्थियों को मिलेगी शिक्षा मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए युवाओं को आधुनिक तकनीक में दक्ष बनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से राज्य के बजट में एआई मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस मिशन के माध्यम से छह लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा देने और लगभग डेढ़ हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से दुनिया को बदल रही है। राज्य सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ के युवा इस बदलाव में केवल सहभागी न रहें, बल्कि भविष्य की तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता भी विकसित करें। दस वर्ष की उम्र में संभाली परिवार की जिम्मेदारी युवा फेलो के सवाल पर मुख्यमंत्री ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि लगभग दस वर्ष की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्हें मां, दादी और छोटे भाइयों की देखभाल के साथ खेती-बाड़ी का दायित्व भी संभालना पड़ा। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं बैलों से हल चलाने सहित खेती के विभिन्न कार्य किए। इन परिस्थितियों ने उन्हें कम उम्र में ही परिश्रम, जिम्मेदारी और कठिनाइयों का सामना करना सिखाया। उन्होंने कहा कि कभी कल्पना नहीं की थी कि वे गांव के सरपंच बनेंगे। निर्विरोध सरपंच चुने जाने के बाद उन्हें विधायक, सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में जनसेवा का अवसर मिला। जीवन में उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने दिवंगत दिलीप सिंह जूदेव को याद करते हुए उनके धैर्य, सहजता और आत्मीय व्यवहार को अपने लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि जनता के बीच रहना, लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध रहना उनके सार्वजनिक जीवन का आधार रहा है। उन्होंने युवा फेलो से कहा कि अपने कार्यों के केंद्र में जनकल्याण को रखें। इससे मान-सम्मान और आत्मसंतुष्टि मिलने के साथ प्रदेश, देश और समाज का भी भला होगा। पांच माह का अध्ययन-प्रशिक्षण, 19 माह का मैदानी अनुभव सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत ने फेलोशिप कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि द्वितीय बैच में चयनित 36 युवा इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन, गणित, वाणिज्य और अर्थशास्त्र सहित विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आए हैं। इनमें कुछ प्रतिभागी अपने स्टार्टअप भी संचालित कर रहे हैं। दो वर्षीय फेलोशिप कार्यक्रम में कुल पांच माह का अध्ययन एवं प्रशिक्षण और 19 माह का मैदानी अनुभव शामिल है। प्रारंभिक तीन माह आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद प्रतिभागी जिला प्रशासन के साथ जुड़कर योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनसेवाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझेंगे। राहुल भगत ने प्रतिभागियों को राज्य के विजन डॉक्यूमेंट ‘अंजोर छत्तीसगढ़ 2047’ का अध्ययन करने और अपने सपनों के छत्तीसगढ़ को लेकर विचार लिखने के लिए प्रेरित किया। युवा फेलो ने साझा कीं अपनी जिज्ञासाएं संवाद के दौरान प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री से फेलोशिप को लेकर उनकी अपेक्षाओं, सुशासन, शिक्षा, रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक और प्रदेश के विकास में युवाओं की भूमिका पर सवाल किए। उन्होंने मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत जीवन और सार्वजनिक सेवा की यात्रा के बारे में भी जानकारी ली। रायपुर की नीलिमा भारद्वाज ने फेलोशिप के प्रतिभागियों से मुख्यमंत्री की अपेक्षाओं के बारे में पूछा। प्रतिभागी खुशी ने सभी फेलो की ओर से इस अवसर के लिए आभार जताते हुए कहा कि जिलों में काम करने से प्रशासन और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। जशपुर के प्रतिभागी अंशुल ने अपनी शिक्षा और फेलोशिप से जुड़ने के उद्देश्य की जानकारी देते हुए प्रदेश से बाहर अध्ययन कर रहे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री का संदेश जानना चाहा। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों की बातों को आत्मीयता से सुना और उन्हें अपने ज्ञान, कौशल तथा अनुभव का उपयोग जनसेवा और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में करने के लिए प्रोत्साहित किया। 14 जिलों के युवा हुए चयनित उल्लेखनीय है कि सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के सहयोग से मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप संचालित की जा रही है। द्वितीय बैच के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) स्कोर और आईआईएम की चयन प्रक्रिया के माध्यम से 36 युवाओं का चयन किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा, बस्तर और जशपुर सहित प्रदेश के 14 जिलों के युवा शामिल हैं। फेलो प्रशिक्षण और मैदानी अनुभव के आधार पर योजनाओं की निगरानी, नीतिगत विश्लेषण, विभागीय समन्वय और जनसेवाओं में सुधार के प्रयासों में सहयोग करेंगे। तीन दिवसीय प्रशिक्षण एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम के दौरान राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सुशासन की प्राथमिकताओं, लोक सेवा गारंटी, हितधारकों की पहचान और मैदानी कार्य से जुड़े विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम में भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पराशर, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के उप सचिव सूरज साहू सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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