सिंगापुर के निवेशकों को भारत में निवेश का न्योता देंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपप्रधानमंत्री से करेंगी मुलाकात

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  • Oct 09, 2026
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9 से 11 अक्टूबर तक आधिकारिक दौरा; राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपप्रधानमंत्री से करेंगी मुलाकात

 

वैश्विक निवेशकों और दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों के साथ होगी उच्चस्तरीय चर्चा


नई दिल्ली, 9 अक्टूबर। भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देने के उद्देश्य से केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण 9 से 11 अक्टूबर तक सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। इस दौरान वे सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व, प्रमुख कारोबारी समूहों, वित्तीय संस्थानों और वैश्विक निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें करेंगी। चर्चा का प्रमुख केंद्र भारत में निवेश के नए अवसर, व्यापारिक साझेदारी और बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सहयोग बढ़ाना होगा। सिंगापुर अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक भारत में करीब 194.68 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के साथ देश का सबसे बड़ा स्रोत रहा है। ऐसे में यह दौरा भारत में सिंगापुर की पूंजी की भागीदारी बढ़ाने और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को ठोस परिणामों तक पहुंचाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपप्रधानमंत्री से होगी मुलाकात
यात्रा के दौरान सीतारमण सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन शनमुगरत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, उपप्रधानमंत्री गन किम योंग और विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन से मुलाकात करेंगी। इन बैठकों में भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा होगी। साथ ही, भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (आईएसएमआर) में सामने आए निष्कर्षों को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश, डिजिटल वित्तीय संपर्क, पूंजी बाजार, कराधान, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, कौशल विकास और विमानन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर विचार किया जाएगा।
हेज फंड और पोर्टफोलियो फंड प्रबंधकों के साथ कारोबारी मंथन
वित्त मंत्री सिंगापुर और अंतरराष्ट्रीय निवेश जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों, वित्तीय संस्थानों तथा उद्योग जगत के नेताओं के साथ बिजनेस राउंडटेबल में हिस्सा लेंगी। इसमें हेज फंड और पोर्टफोलियो फंड प्रबंधकों के साथ चर्चा के अलावा सरकार-से-व्यवसाय (जी2बी) बैठकों की श्रृंखला भी शामिल होगी। इन संवादों के जरिए भारत की विकास यात्रा, निवेश की संभावनाओं और वैश्विक आर्थिक एवं वित्तीय परिस्थितियों में हो रहे बदलावों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। सरकार का जोर निवेशकों को भारत में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराने और संभावित निवेश को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर रहेगा।
जीआईसी, टेमासेक और बड़े वित्तीय समूहों के प्रमुखों से चर्चा
सीतारमण प्रमुख उद्योगपतियों और वैश्विक वित्तीय, निवेश तथा स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। प्रस्तावित बैठकों में गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (जीआईसी), टेमासेक होल्डिंग्स, डीबीएस बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (बीआईआई), आईएचएच हेल्थकेयर बरहाद, मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (एमयूएफजी) के एशिया-प्रशांत प्रतिनिधि, बी कैपिटल और एचपीएस इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से चर्चा शामिल है। इसके अलावा, स्कैंडिनेविस्का एनस्किल्डा बैंकन (एसईबी) की अध्यक्ष, मित्सुई एंड कंपनी के निदेशक मंडल के एक सदस्य तथा टीपीजी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं संस्थापक साझेदार के साथ भी बैठक प्रस्तावित है। सिंगापुर के संस्थागत निवेशक जीआईसी और टेमासेक पहले से ही भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निवेश रखते हैं।
एनआईआईएफ और गिफ्ट सिटी से निवेश बढ़ाने की तैयारी
भारत सिंगापुर की पूंजी को अधिक व्यापक स्तर पर आकर्षित करने के लिए राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) और गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) जैसे मंचों के जरिए निवेश माध्यमों तथा फंडों में भागीदारी के अवसर बढ़ा सकता है। वित्त मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर इच्छुक सिंगापुर के निवेशकों को भारतीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और राज्य सरकारों से जोड़ने में मदद करेगा। साथ ही, चिह्नित निवेश अवसरों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
राजनीतिक संबंधों को आर्थिक उपलब्धियों में बदलने पर जोर
वित्त मंत्री की यह यात्रा भारत और सिंगापुर के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। उद्देश्य मजबूत राजनीतिक संबंधों का लाभ उठाकर निवेश बढ़ाना, नई व्यापारिक साझेदारियां विकसित करना और दोनों देशों के लिए ठोस आर्थिक परिणाम हासिल करना है। वैश्विक निवेशकों के साथ सीधा संवाद इस दिशा में नई संभावनाएं खोल सकता है।

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