राष्ट्रमंडल खेलों में नारी शक्ति – भारत के 13 में से आठ स्वर्ण महिला खिलाड़ियों के नाम

नई दिल्ली। 3 ऑगस्ट 2026|

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्श शानदार रहा, और उसमें भी नारी शक्ति की चमक रही। भारतीय दल ने प्रतियोगिता में 13 स्वर्ण पदक हासिल किए, जिनमें से आठ स्वर्ण पदक महिला खिलाड़ियों ने जीते हैं। भारतीय खेलों में अब ‘नारी शक्ति’ केवल भागीदारी नहीं, बल्कि सफलता की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।

भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, जूडो और पैरा एथलेटिक्स जैसे विभिन्न खेलों में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर नाम रोस किया। यह भारतीय खेलों में महिलाओं की बढ़ती ताकत, आत्मविश्वास और निरंतर सफलता का प्रमाण है।

भारोत्तोलन में ओलंपिक चैंपियन मीराबाई चानू ने एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा सिद्ध की। अस्मिता डे ने इतिहास रचते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। जबकि, पैरा एथलेटिक्स में शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की गोला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

मुक्केबाजी में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैसमीन लांबोरिया, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय महिला मुक्केबाजी की बढ़ती ताकत का परिचय दिया। पिछले एक दशक में भारतीय महिला मुक्केबाजी ने जिस तरह प्रगति की है, उसका शानदार उदाहरण ग्लासगो में देखने को मिला।

आठ स्वर्ण पदकों ने न केवल भारत के अभियान को नई ऊंचाई दी, बल्कि यह भी साबित किया कि भारतीय महिला खिलाड़ी अब केवल उभरती प्रतिभाएं नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार स्वर्ण जीतने वाली चैंपियन हैं।

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर कहा – “भारत के 13 स्वर्ण पदकों में से आठ महिलाओं के नाम होना बेहद गर्व की बात है। इन उपलब्धियों के पीछे खिलाड़ियों, उनके परिवारों, कोच और सहयोगी स्टाफ की वर्षों की मेहनत और समर्पण है। हर पदक संघर्ष और त्याग की कहानी कहता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये चैंपियन देश की लाखों बेटियों को विश्वास दिला रही हैं कि वे भी भारत की जर्सी पहनकर विश्व मंच पर सफलता हासिल कर सकती हैं। यही ‘नारी शक्ति’ की सच्ची भावना है।”

टीम भावना का शानदार उदाहरण

इन राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने केवल पदक ही नहीं जीते, बल्कि टीम भावना का भी शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया। अनुभवी खिलाड़ियों ने युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया, एक-दूसरे की सफलता का जश्न मनाया और पूरी प्रतियोगिता के दौरान टीम इंडिया की एकजुटता को नई पहचान दी।

ग्लासगो में मीराबाई चानू, शर्मिला धनखड़, अस्मिता डे, साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैसमीन लांबोरिया, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने जो प्रेरणा दी है, वह केवल पदकों तक सीमित नहीं रहेगी। उनकी उपलब्धियां देशभर की लाखों बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देती रहेंगी।

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