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मैक्स मूलर: डिस्मेंटल हिंदुत्व का अकादमिक संस्थापक राष्ट्र की बात

मैक्स मूलर: डिस्मेंटल हिंदुत्व का अकादमिक संस्थापक

   मैक्स मूलर  1847 में ईस्ट इंडिया कंपनी के ठेके पर रखा हुआ कर्मचारी था। उसके इरादे क्या थे ये उसकी अपन...

भगवान श्री राम को क्यों कहा गया है 'रामो विग्रहवान् धर्मः' ? राष्ट्र की बात

भगवान श्री राम को क्यों कहा गया है 'रामो विग्रहवान् धर्मः' ?

श्रीराम भारत के जीवनादर्श हैं। अयोध्या के राजकुमार राम, दशरथ - कौशल्यानन्दन राम से मर्यादा पुरुषोत्तम एवं श...

डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन के समेकित विषय-बिंदु संघ-साहित्य

डॉ. मोहन भागवत जी के उद्बोधन के समेकित विषय-बिंदु

  1. आत्मबोध, स्वदेशी और संघ का मूल उद्देश्य * राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों के कार्य का मूल उद्...

रिजीम चेंज का वैश्विक खतरा और डॉ मोहन भागवत की चेतावनी राष्ट्र की बात

रिजीम चेंज का वैश्विक खतरा और डॉ मोहन भागवत की चेतावनी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में विजयादशमी  उत्सव के अवस...

सत्य की स्थापना के लिए महायुद्ध : शक्ति की साधना और सशक्त संगठन आवश्यक राष्ट्र की बात

सत्य की स्थापना के लिए महायुद्ध : शक्ति की साधना और सशक्त संगठन आवश्यक

दशहरा केवल त्योहार या मनोरंजन का उत्सव नहीं है। यह समाज जीवन में उच्चतम आदर्शों की स्थापना के संकल्प का पर्...

इस वर्ष के दुर्गोत्सव की कुछ विशेषताएं राष्ट्र की बात

इस वर्ष के दुर्गोत्सव की कुछ विशेषताएं

बंगाल के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा दुर्गा उत्सव जबलपुर का है। अकेले जबलपुर शहर में 800 से ऊपर दुर्गा प्रति...

स्वबोध और सनातन एकता का व्यावहारिक अर्थ समझाता डॉ. मोहन भागवत उद्बोधन  संघ-साहित्य

स्वबोध और सनातन एकता का व्यावहारिक अर्थ समझाता डॉ. मोहन भागवत उद्बोधन 

भारत की सभ्यतागत पहचान का मूल प्रश्न यह है कि विविधताओं से भरा समाज अपनी एकता को किस आधार पर समझता है और उस...

विजयादशमी : संघ शताब्दी वर्ष, उपक्रम और चुनौती संघ-साहित्य

विजयादशमी : संघ शताब्दी वर्ष, उपक्रम और चुनौती

विजयादशमी केवल विजय का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन, संकल्प और नवप्रयास का पर्व है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के...

विजयादशमी पर्व : राष्ट्रीय जीवन में श्रीराम के आदर्शों की प्रासंगिकता राष्ट्र की बात

विजयादशमी पर्व : राष्ट्रीय जीवन में श्रीराम के आदर्शों की प्रासंगिकता

विजयादशमी के अवसर पर जब हमारी दृष्टि युद्धभूमि में आमने-सामने खड़े श्रीराम और रावण के चरित्र पर ठहरती है, त...

राष्ट्र सेवा के संकल्प के साथ संघ की शताब्दी यात्रा संघ-साहित्य

राष्ट्र सेवा के संकल्प के साथ संघ की शताब्दी यात्रा

किसी भी राष्ट्र के जीवन में एक सदी का कालखंड केवल समय का एक पड़ाव नहीं होता, बल्कि वह उस समाज के सामूहिक सं...

‘विजयादशमी’ और ‘दशहरा’ का वास्तविक अर्थ'  राष्ट्र की बात

‘विजयादशमी’ और ‘दशहरा’ का वास्तविक अर्थ' 

राम, रावण, धूम-राक्षस, रक्त-बीज, कील, कवच, अर्गला, आचमन आदि शब्दों के अर्थ   दुर्गोत्सव से जुड़ी तमाम उ...

RSS में विजयादशमी पर्व : शक्ति, संस्कार और संगठन का महापर्व संघ-साहित्य

RSS में विजयादशमी पर्व : शक्ति, संस्कार और संगठन का महापर्व

"श्रद्धा, आशा और उत्साह से भरा संगठित बल यदि देश में निर्माण कर सकें, तो सारे संकटों को हँसते-खेलते ठुकरा...