लोकतंत्र में सवाल जरूरी, मगर मकसद विकास होना चाहिए : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

  • Admin
  • Sep 25, 2026
  • 9,882 views

अरुण जेटली मेमोरियल डिबेट के विजेताओं को दिए पुरस्कार, बोले—असहमति तर्क, प्रमाण और संवाद के जरिए लोकतंत्र को बनाती है मजबूत

एआई की चुनौतियों को अवसर में बदलने का आह्वान; राज्यसभा आठवीं अनुसूची की सभी भाषाओं में एआई आधारित अनुवाद सुविधा की दिशा में कर रही काम

नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026। लोकतंत्र की मजबूती के लिए सवाल करना जरूरी है, लेकिन सवालों का उद्देश्य विकास की राह तलाशना होना चाहिए, बाधा खड़ी करना नहीं। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने युवाओं से स्वतंत्र सोच, गहन चिंतन और देश-समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए यह बात कही। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में तीसरे अरुण जेटली मेमोरियल डिबेट के पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सवाल पूछे बिना लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता, लेकिन सवाल वहीं उठाए जाने चाहिए जहां उनकी जरूरत हो। सवालों का उद्देश्य बाधा डालना नहीं, बल्कि विकास का रास्ता तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी का समर्थन करने से पहले यह विचार करना चाहिए कि उससे समाज और देश का भला होगा या नहीं। ऐसी सोच के साथ आगे बढ़ने पर भारत 2047 से पहले ही विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।

असहमति लोकतंत्र की ताकत

उपराष्ट्रपति ने कहा कि असहमति से बचकर लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता। लोकतंत्र तब मजबूत होता है, जब अलग-अलग विचारों पर तर्क, प्रमाण और संवाद के आधार पर चर्चा होती है। इसके लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोधी विचारों के सम्मान, प्रमाण आधारित तर्क और संसदीय व्यवहार की आवश्यकता है।

उन्होंने सोशल मीडिया, एल्गोरिदम, त्वरित प्रतिक्रियाओं और छोटे कंटेंट के बढ़ते प्रभाव वाले दौर में सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ सार्वजनिक संवाद करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने तीसरे अरुण जेटली मेमोरियल डिबेट में समकालीन विषयों के चयन की भी सराहना की। बहस में ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’, यूनिवर्सल बेसिक इनकम, कॉरपोरेट गवर्नेंस में कर्मचारियों की भागीदारी और ‘विकसित भारत @2047’ के लिए मानव पूंजी जैसे विषय शामिल रहे।

अरुण जेटली की विरासत को बहस के मंच से श्रद्धांजलि

अरुण जेटली को एसआरसीसी का विशिष्ट पूर्व छात्र, राजनीतिक नेता, कुशल आयोजक और प्रभावशाली वक्ता बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में कानूनी समझ, राजनीतिक दृष्टि, आर्थिक सोच और संवाद की असाधारण क्षमता का दुर्लभ संगम था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान अरुण जेटली के साथ अपने संवाद को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने देश निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिकाओं का उल्लेख किया। उन्होंने केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री के रूप में जेटली के योगदान के साथ जीएसटी, दिवाला और दिवालियापन संहिता, कर एवं वित्तीय सुधारों तथा भारत के वित्तीय और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने वाले कदमों में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। वित्तीय समावेशन में उनके योगदान का भी उल्लेख किया गया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्व को याद करने के लिए डिबेट से बेहतर श्रद्धांजलि क्या हो सकती है। उन्होंने बौद्धिक मंच के माध्यम से अपने विशिष्ट पूर्व छात्र की विरासत को याद करने के लिए एसआरसीसी की सराहना की।

शताब्दी पर एसआरसीसी को बधाई

एसआरसीसी के 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं, ने कहा कि एक सदी केवल समय का पैमाना नहीं, बल्कि चरित्र का पैमाना है। संस्थान तभी मजबूती से टिके रहते हैं, जब वे अपने मूल्यों से जुड़े रहते हुए बदलते समय के अनुरूप खुद को ढालते हैं और भविष्य के लिए तैयार करते हैं।

उन्होंने कहा कि एसआरसीसी की शताब्दी यह याद दिलाती है कि संस्थान तब महान बनते हैं, जब हर पीढ़ी उन्हें उस स्थिति से बेहतर बनाती है, जिसमें उसने उन्हें विरासत में पाया था।

एआई चुनौती भी, अवसर भी

उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से लगातार सीखते और बदलते रहने का आग्रह करते हुए कंप्यूटर के शुरुआती दौर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कभी कंप्यूटर को रोजगार के लिए खतरा माना जाता था, लेकिन बाद में यही तकनीक भारत के आईटी क्षेत्र की प्रगति का बड़ा माध्यम बनी।

उन्होंने कहा कि एआई भी चुनौतियां पेश कर रहा है, लेकिन इन चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है। भारत जैसे भाषाई और सांस्कृतिक विविधता वाले देश में एआई की क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने रियल-टाइम भाषा अनुवाद को महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में एआई आधारित अनुवाद की सुविधा शुरू करने की दिशा में काम कर रही है।

साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि एल्गोरिदम को कभी अपनी बुद्धिमत्ता का विकल्प न बनने दें। इंसानी रचनात्मकता का स्थान एआई कभी नहीं ले सकता।

विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई

उपराष्ट्रपति ने तीसरे अरुण जेटली मेमोरियल डिबेट के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए और सभी प्रतिभागियों की सोच-समझकर प्रस्तुत की गई दलीलों तथा समकालीन मुद्दों पर उनकी उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों ने बौद्धिक जुड़ाव के महत्व और शब्दों की ताकत को साबित किया है।

इस अवसर पर एसआरसीसी के जाने-माने पूर्व छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों और योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनकी उपलब्धियां संस्थान की उत्कृष्ट विरासत और नेतृत्व की परंपरा को दर्शाती हैं।

कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, एसआरसीसी की गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन अजय एस. श्रीराम, एसआरसीसी की प्रिंसिपल प्रो. सिमरित कौर, स्वर्गीय अरुण जेटली की पत्नी संगीता जेटली के साथ जाने-माने संकाय सदस्य, पूर्व छात्र और विद्यार्थी मौजूद रहे।

सम्बन्धित खबरें