यूक्रेन में स्टारलिंक की गति सीमा से सैन्य अभियानों पर असर, तकनीकी निर्भरता पर उठे सवाल

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  • Oct 27, 2026
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160 किमी प्रति घंटे से अधिक गति पर संचार बाधित होने की यूक्रेनी अधिकारियों की शिकायत; 24 अक्टूबर को 400 किमी प्रति घंटे से अधिक गति पर कनेक्टिविटी बहाल होने की जानकारी

अंतरराष्ट्रीय डेस्क। रूस-यूक्रेन युद्ध में उपग्रह संचार तकनीक की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। अक्टूबर 2026 के मध्य में यूक्रेन की सेना ने स्टारलिंक और उसकी सैन्य सेवा स्टारशील्ड के इस्तेमाल के दौरान गति संबंधी प्रतिबंधों की शिकायत की। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, कुछ संचार टर्मिनलों का संपर्क लगभग 160 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति पर बाधित हो रहा था। इससे मानवरहित विमानों से जुड़े अभियानों और अग्रिम मोर्चे पर संचार व्यवस्था प्रभावित हुई। हालांकि, 24 अक्टूबर को यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि निगरानी प्रणालियों में 400 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति पर भी स्थिर कनेक्टिविटी दर्ज की गई है। <Cite refs={["turn260961search1","turn260961search2","turn260961search0"]}/>

गति सीमा से सैन्य संचार प्रभावित

यूक्रेनी अधिकारियों ने 14 अक्टूबर को बताया था कि कुछ स्टारशील्ड टर्मिनलों का संपर्क चलते समय निर्धारित गति सीमा पार करने पर टूट रहा था। यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार सेरही बेस्करेस्तनोव के अनुसार, इस प्रतिबंध की पूर्व सूचना नहीं मिली थी और इसके कारण कुछ सैन्य अभियान बाधित हुए। यूक्रेनी रक्षा अधिकारियों ने इस मामले पर अमेरिका, स्पेसएक्स और नाटो सहयोगियों के साथ बातचीत किए जाने की जानकारी भी दी थी। <Cite refs={["turn260961search1","turn260961search5"]}/>

उपग्रह संचार नेटवर्क यूक्रेन की सैन्य संचार व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका इस्तेमाल विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच संपर्क, निगरानी, रसद और मानवरहित प्रणालियों के संचालन में किया जाता है। ऐसे में कनेक्टिविटी में आने वाली बाधा अभियानों की योजना और उनके संचालन को प्रभावित कर सकती है।

स्टारलिंक और स्टारशील्ड में अंतर

स्टारलिंक स्पेसएक्स की व्यावसायिक उपग्रह इंटरनेट सेवा है, जबकि स्टारशील्ड अमेरिकी सरकार की जरूरतों के लिए विकसित सैन्य एवं सरकारी उपयोग की प्रणाली है। दोनों के स्वामित्व, नियंत्रण और इस्तेमाल की शर्तों में अंतर है। इसी अंतर के कारण यूक्रेन में सामने आई समस्या के दौरान यह सवाल भी उठा कि सेवा पर लगे प्रतिबंधों का निर्णय किसके अधिकार क्षेत्र में था। <Cite refs={["turn260961search9","turn260961news24"]}/>

स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि स्टारशील्ड अमेरिकी सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण में है तथा उसकी गति या उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के फैसले अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और अंततः राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन के विभिन्न अधिकारियों ने प्रतिबंध लगाने की जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग बयान दिए। इसलिए प्रतिबंध किसके आदेश पर लागू हुए, इस सवाल पर सार्वजनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। <Cite refs={["turn260961search9","turn260961news24"]}/>

24 अक्टूबर को कनेक्टिविटी बहाल होने की जानकारी

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने 24 अक्टूबर को बताया कि उसकी निगरानी प्रणालियों में स्टारलिंक और स्टारशील्ड की गति संबंधी क्षमता बहाल होती दिखाई दी है। मंत्रालय के अनुसार, 400 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति पर भी कनेक्शन स्थिर दर्ज किया गया। हालांकि, उस समय यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं था कि बहाली सभी क्षेत्रों और सभी सैन्य इकाइयों में समान रूप से प्रभावी हुई थी या नहीं। <Cite refs={["turn260961search0","turn260961search2"]}/>

तकनीकी निर्भरता ने बढ़ाई रणनीतिक चिंता

इस घटनाक्रम ने आधुनिक युद्ध में निजी कंपनियों और विदेशी तकनीकी प्रणालियों पर सैन्य निर्भरता को लेकर बहस तेज कर दी है। उपग्रह संचार, डिजिटल नेटवर्क और अन्य तकनीकी सेवाएं सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण हो चुकी हैं। यदि किसी महत्वपूर्ण सेवा में अचानक प्रतिबंध या व्यवधान आता है, तो उसका असर केवल संचार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संबंधित अभियानों और रसद व्यवस्था तक पहुंच सकता है।

यूक्रेन का अनुभव दूसरे देशों के लिए भी एक अहम सबक है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी तकनीकी प्रणालियों के लिए वैकल्पिक संचार व्यवस्था और भरोसेमंद बैकअप विकसित करना आवश्यक है। साथ ही, महत्वपूर्ण तकनीकी सेवाओं के उपयोग की शर्तों, निर्णय लेने के अधिकार और आपात स्थिति में सेवा की निरंतरता को लेकर पहले से स्पष्ट समझौते होना भी जरूरी है।

रूस-यूक्रेन युद्ध का यह प्रकरण दिखाता है कि आधुनिक संघर्षों में सैन्य क्षमता के साथ-साथ तकनीकी पहुंच और संचार नेटवर्क की विश्वसनीयता भी अहम भूमिका निभाते हैं।

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