सेवा का लक्ष्य जरूरतमंदों में स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता जगाना: दत्तात्रेय होसबाले

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  • Oct 27, 2026
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जयपुर की 257 सेवा बस्तियों में संचालित हैं 379 सेवा कार्य, सेवा भारती के वार्षिकोत्सव में सामाजिक सहभागिता पर दिया जोर

जयपुर, 26 अक्टूबर 2026। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि सेवा का उद्देश्य केवल जरूरतमंदों को सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनमें स्वाभिमान, आत्म-सामर्थ्य और पुरुषार्थ की भावना जगाना भी है। सेवा ऐसी होनी चाहिए कि आज सेवा प्राप्त करने वाले लोग भविष्य में दूसरों की सेवा करने में सक्षम बनें। उन्होंने समाज के समर्थ लोगों से सेवा बस्तियों में जाकर वहां के लोगों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करने का आह्वान किया।

होसबाले सोमवार को सेवा भारती जयपुर इकाई के वार्षिकोत्सव में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जयपुर में 257 सेवा बस्तियां चिह्नित हैं, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सुरक्षा और स्वाभिमान के क्षेत्र में कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि संघ के स्वयंसेवकों ने ‘मलिन बस्ती’ के स्थान पर ‘सेवा बस्ती’ शब्द का प्रयोग इस सोच के साथ शुरू किया कि इन क्षेत्रों को अभावों के नजरिये से देखने के बजाय सेवा और सामाजिक दायित्व के केंद्र के रूप में देखा जाए।

उन्होंने कहा कि सेवा भारती से जुड़ी संस्थाएं देशभर में करीब डेढ़ लाख छोटे-बड़े सेवा कार्य संचालित कर रही हैं। इन कार्यों में स्वयंसेवकों के साथ समाज के अनेक लोग भी योगदान दे रहे हैं। सेवा के लिए आर्थिक सहयोग देने और प्रत्यक्ष भागीदारी करने वालों की कमी नहीं है। आवश्यकता समाज में मौजूद सामर्थ्य और सेवा भाव को जागृत करने की है।

सेवा के साथ स्वाभिमान और आत्मविश्वास भी जरूरी

दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना सेवा का एक पक्ष है, जबकि दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष जरूरतमंदों को यह विश्वास दिलाना है कि वे भी समाज के लिए योगदान कर सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का वास है, इसलिए सभी को सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए।

महर्षि वाल्मीकि जयंती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम ने केवट, शबरी और गिलहरी के प्रति स्नेह प्रकट कर समाज के प्रत्येक व्यक्ति के महत्व को स्थापित किया। सेवा के कार्यों में भी इसी भावना के साथ सभी को सम्मान और सहभागिता का अवसर दिया जाना चाहिए।

प्रत्यक्ष सहभागिता से मजबूत होंगे आत्मीय संबंध

होसबाले ने सेवा सदन में कार्यरत सेवानिवृत्त चिकित्सकों और अन्य कार्यकर्ताओं के सेवाभाव का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि एक सेवानिवृत्त चिकित्सक प्रतिदिन चार-पांच किलोमीटर की दूरी तय कर सेवा कार्य के लिए आते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सेवा के लिए दूरी नहीं, बल्कि भावना महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने लोगों से सेवा बस्तियों के संस्कार केंद्रों में जाने, बच्चों के साथ समय बिताने तथा जन्मदिन और दीपावली जैसे अवसर उनके बीच मनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परिवारों को भी ऐसे कार्यों से जोड़ने की जरूरत है। आर्थिक सहयोग के साथ प्रत्यक्ष सहभागिता बढ़ने से यह भावना मजबूत होगी कि सभी एक ही समाज और भारत माता की संतान हैं। सेवा के माध्यम से सामाजिक एकात्मता को मजबूत करना राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य है।

वेबसाइट, एप और पुस्तक का विमोचन

कार्यक्रम में नवल पीठाधीश्वर संत मुन्ना दास खोडा का सान्निध्य रहा। मंगलम् ग्रुप के निदेशक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि निखिल जैन और विजेंद्र सिंह तंवर विशिष्ट अतिथि थे।

इस अवसर पर सेवा भारती की वेबसाइट और एप का शुभारंभ किया गया तथा ‘भारतीय संस्कृति में सेवा परंपरा’ पुस्तक के विशेषांक का विमोचन हुआ। विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र स्थित यशोदा बाल सेवा केंद्र के नवनिर्मित भवन का डिजिटल उद्घाटन भी किया गया। विभिन्न सेवा बस्तियों के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर आधारित नाटक के माध्यम से भी संदेश दिया।

जयपुर की 257 बस्तियों में 379 सेवा प्रकल्प

सेवा भारती समिति के अनुसार, जयपुर महानगर की 257 सेवा बस्तियों में कुल 379 सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं। इन प्रकल्पों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े कार्य शामिल हैं।

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