विजयादशमी पर पीएम मोदी का संदेश:राम के आदर्शों से राष्ट्र निर्माण, गरीबों की सेवा सर्वोपरि

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  • Oct 21, 2026
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रामराज्य में सत्ता जनकल्याण का माध्यम, भेदभाव के बिना सबको न्याय और अवसर मिलें; ‘राम से राष्ट्र’ और ‘देव से देश’ का संकल्प पूरा करने का आह्वान


नई दिल्ली। विजयादशमी केवल रावण पर राम की जीत का पर्व नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और मानवता की शक्ति में अटूट विश्वास का प्रतीक है। भगवान राम के आदर्शों को जीवन और शासन में उतारकर ही राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना साकार की जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के लिए यह केवल त्योहार नहीं, बल्कि देश की जीवन-ऊर्जा है। उन्होंने गरीबों और वंचितों की सेवा को सर्वोपरि रखने, राष्ट्रहित में एकजुट होने और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
राम के आदर्शों में निहित है भारत की सांस्कृतिक शक्ति
मोदी ने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत के गांव-गांव और शहर-शहर में रामलीलाओं के मंचन की परंपरा भगवान राम के आदर्शों को जीवित रखती है। यह अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने मानव इतिहास में अद्वितीय आदर्श स्थापित किए। भारत की सदियों पुरानी आस्था केवल रावण पर उनकी विजय तक सीमित नहीं है, बल्कि उन शाश्वत मूल्यों से जुड़ी है, जिन्हें राम ने अपने आचरण से दुनिया के सामने रखा।
सत्ता नहीं, जनसेवा हो शासन का आधार
प्रधानमंत्री ने भगवान राम के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्याभिषेक की स्थिति हो या वनवास का कठिन समय, उनका स्वभाव और धर्म के प्रति निष्ठा समान रही। वनवास के दौरान निषादराज को गले लगाना और माता शबरी का सम्मान करना उनके करुणा, प्रेम, दया और सद्भाव के आदर्शों को दर्शाता है। अयोध्या लौटकर राम ने जिस रामराज्य की स्थापना की, वह भेदभाव रहित शासन का आदर्श है, जहां सभी को न्याय और समान अवसर मिलते हैं तथा सत्ता का उपयोग जनकल्याण के लिए होता है, प्रभुत्व दिखाने के लिए नहीं। तुलसीदास की चौपाई ‘दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज नहिं काहुहि व्यापा’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रशासन से ‘नागरिक देवो भव’ की भावना अपनाने और गरीबों-वंचितों की सेवा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
राम से सीखें आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की ताकत
मोदी ने कहा कि भगवान राम ने लंका तक की यात्रा में संकटों के सामने हार मानने के बजाय जनभागीदारी और उपलब्ध संसाधनों की शक्ति से असंभव को संभव कर दिखाया। उनका जीवन सिखाता है कि कठिनाइयां लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता नहीं रोक सकतीं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से परिश्रम, सूझबूझ और सामूहिक प्रयास के जरिए विकसित भारत तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को पूरा करने का आह्वान किया।
12 साल में 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत लौटीं
प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को राष्ट्रीय आत्मसम्मान से जोड़ते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत वापस लाई गई हैं। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों को वैश्विक स्तर पर मिल रही पहचान का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, भारत के कई स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला है। पिछले वर्ष करोड़ों भारतीयों के सामूहिक संकल्प से दीपावली को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में भी जगह मिली। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए इसी समर्पण से काम करते रहना होगा।
‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प से एकजुट होने की अपील
मोदी ने कहा कि जब देश सत्य और मानवता के साथ खड़ा होता है, तो अंततः जीत उसी की होती है। उन्होंने वैदिक मंत्र ‘समानो मंत्रः समितिः समानी’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय संस्थाओं और राजनीतिक दलों से राष्ट्रहित में एकजुट होने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ का संकल्प लेने और राष्ट्रीय सम्मान को नुकसान पहुंचाने, समाज में विभाजन बढ़ाने तथा भारतीय संस्कृति के प्रति नफरत फैलाने वाली ताकतों का मिलकर मुकाबला करने का आह्वान किया।
‘राम से राष्ट्र’ और ‘देव से देश’ का संकल्प
प्रधानमंत्री ने अयोध्या के राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान लिए गए संकल्पों को याद करते हुए विश्वास जताया कि देश अपनी आध्यात्मिक और विकास संबंधी परिकल्पना को साकार करेगा। ‘जय सिया राम’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ उन्होंने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। मोदी ने कहा कि ‘राम से राष्ट्र’ और ‘देव से देश’ की परिकल्पना को निश्चित रूप से पूरा किया जाएगा।

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