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स्वबोध : आत्मजागरण से राष्ट्रजागरण  राष्ट्र की बात

स्वबोध : आत्मजागरण से राष्ट्रजागरण 

स्वबोध ही राष्ट्रबोध है—स्व की पहचान ही शक्ति है, यही सनातन समाज की आत्मा है और यही भारत के पुनरुत्थान का म...

हिंदू दिग्विजय दिवस : जब शिकागो के मंच से विश्व ने सुना भारत का शाश्वत दर्शन राष्ट्र की बात

हिंदू दिग्विजय दिवस : जब शिकागो के मंच से विश्व ने सुना भारत का शाश्वत दर्शन

  कभी-कभी इतिहास में कोई एक क्षण सदियों की मौन साधना को स्वर दे देता है। 11 सितंबर 1893 का दिन ऐसा ही एक...

स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण की स्मृति : हिन्दुत्व के दर्शन से परिचित होने का दिन राष्ट्र की बात

स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण की स्मृति : हिन्दुत्व के दर्शन से परिचित होने का दिन

जब अफगानिस्तान में कट्टर इस्लामिक उभार के कारण मानवता त्राहि-त्राहि कर रही है, तब कम्युनिस्ट जमात ‘हिंदुत्व...

छत्तीसगढ़ के लोकजीवन का जीवंत उत्सव पोला तिहार राष्ट्र की बात

छत्तीसगढ़ के लोकजीवन का जीवंत उत्सव पोला तिहार

हमारी लोक संस्कृति के तीज-त्यौहारों में मनुष्य और प्रकृति के बीच बने हुए आत्मीय संबंधों की बेल भी गुंथी हुई...

मजहब के नाम पर जाति से इनकार, आरक्षण में अधिकार क्यों? राष्ट्र की बात

मजहब के नाम पर जाति से इनकार, आरक्षण में अधिकार क्यों?

जब राष्ट्र अपने प्राणों से जुड़े प्रश्नों पर मौन हो जाता है, तो इतिहास अपनी देह पर लगे गहरे घावों को समेटे ...

‘एक जीवन-एक ध्येय’ के प्रणेता :‘एकनाथजी’ संघ-साहित्य

‘एक जीवन-एक ध्येय’ के प्रणेता :‘एकनाथजी’

माननीय श्री एकनाथ रानडे जी का नाम लेते ही स्वामी विवेकानन्दजी सहज याद आते हैं, और जब स्वामी विवेकानन्द की ब...

उत्तर प्रदेश में हिन्दुत्व और विकास की गूंज राष्ट्र की बात

उत्तर प्रदेश में हिन्दुत्व और विकास की गूंज

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सभी राजनैतिक दलों ने अपना गुणा-भाग करके उसके  आधार पर पि...

 ‘भारत गरीब नहीं था, उसे गरीब बनाया गया’: जेमा फेरर की दृष्टि से फिर आया सच सामने  राष्ट्र की बात

‘भारत गरीब नहीं था, उसे गरीब बनाया गया’: जेमा फेरर की दृष्टि से फिर आया सच सामने

एक वैश्विक कलाकार का अनुभव और ऐतिहासिक यथार्थ हाल ही में न्यूयॉर्क की प्रसिद्ध टैटू आर्टिस्ट ‘जेमा फेरर’...

भारतेंदु हरिश्चंद्र के साहित्य में राष्ट्रबोध की चेतना राष्ट्र की बात

भारतेंदु हरिश्चंद्र के साहित्य में राष्ट्रबोध की चेतना

उन्नीसवीं शताब्दी का भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा था, जहां पुरानी दुनिया धीरे धीरे पीछे छूट रही थी और आधुनिकता ...

हिंदू समाज को कौन बाँट रहा है? जातीय राजनीति, आरक्षण और बदलते सत्ता-समीकरण राष्ट्र की बात

हिंदू समाज को कौन बाँट रहा है? जातीय राजनीति, आरक्षण और बदलते सत्ता-समीकरण

आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में आज हमारा समाज एक ऐसे वैचारिक चौराहे पर खड़ा है जहाँ विकास की भौतिक परिभाषा ने हम...

सनातन द्रोह की विकृत राजनीति राष्ट्र की बात

सनातन द्रोह की विकृत राजनीति

सभी राजनैतिक दलों ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तीव्र कर दी हैं और जनता के मध्य अ...

डॉ मोहन भागवत का  वैश्विक प्रवास : संस्कृति से विश्व संवाद  संघ-साहित्य

डॉ मोहन भागवत का वैश्विक प्रवास : संस्कृति से विश्व संवाद 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का हालिया अमेरिका, कनाडा एवं ब्रिटेन प्रवास केवल एक संग...