अब एआई से संवरेंगी पुस्तकालय सेवाएं, 16 विशेषज्ञों को मिला आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण

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  • Oct 19, 2026
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सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर का दो सप्ताह का कार्यक्रम संपन्न; पुस्तकालय स्वचालन, डिजिटल संग्रह और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोग पर दिया जोर


कोहा और डी-स्पेस सॉफ्टवेयर से लेकर मेटाडेटा निष्कर्षण तक का प्रशिक्षण; देशभर के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा


नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026। पुस्तकालयों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और डिजिटल ज्ञान प्रबंधन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (एनआईएससीपीआर) का दो सप्ताह का कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल के तीसरे चरण के अंतर्गत 5 से 16 अक्टूबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, पुस्तकालयों और अन्य संगठनों के 16 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण में पुस्तकालय स्वचालन, पुस्तकों और शोध सामग्री का डिजिटलीकरण, डिजिटल रिपॉजिटरी प्रबंधन तथा पुस्तकालय सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया।
पुस्तकालयों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर
कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रसायम ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। संस्थान के प्रशिक्षण प्रभाग के प्रमुख मुकेश ए. पुंड ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए पुस्तकालय स्वचालन, डिजिटलीकरण और नई तकनीकों को अपनाने के लिए पेशेवर कौशल विकसित करने की आवश्यकता बताई। उद्घाटन सत्र का संचालन सलीम अंसारी ने किया।
कोहा सॉफ्टवेयर से सीखा पुस्तकालय प्रबंधन
प्रशिक्षण में व्याख्यान के साथ सॉफ्टवेयर प्रदर्शन और व्यावहारिक अभ्यासों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को ओपन-सोर्स आधारित कोहा एकीकृत पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली (कोहा आईएलएमएस) के माध्यम से पुस्तकालयों के रोजमर्रा के कार्यों को डिजिटल रूप से संचालित करने का प्रशिक्षण दिया गया।
इसके तहत लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम और कोहा की स्थापना, पुस्तकों की सूची तैयार करना और कैटलॉग प्रबंधन, पाठक पंजीकरण व उपयोगकर्ता प्रबंधन, पुस्तकों के लेन-देन की प्रक्रिया, रिपोर्ट तैयार करना, सिस्टम में आवश्यक बदलाव करना तथा डेटा का बैकअप और उसे पुनः बहाल करना सिखाया गया। प्रतिभागियों ने पुस्तकालय के विभिन्न कार्यों और प्रक्रियाओं को सॉफ्टवेयर के जरिए व्यवस्थित करने का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया।
डिजिटल रिपॉजिटरी में शोध सामग्री सुरक्षित रखने की तकनीक
डी-स्पेस डिजिटल रिपॉजिटरी सॉफ्टवेयर के सत्रों में इसकी स्थापना और प्रशासन, समुदायों तथा संग्रहों का प्रबंधन, डिजिटल सामग्री जमा करना, ई-पीपल के माध्यम से उपयोगकर्ता पंजीकरण और प्राधिकरण, डबलिन कोर मेटाडेटा तथा बिटस्ट्रीम रजिस्ट्री का प्रबंधन शामिल रहा। इसके अलावा सॉफ्टवेयर में बुनियादी बदलाव करने, बैकअप लेने और डेटा बहाल करने का अभ्यास भी कराया गया। इससे प्रतिभागियों को शोध सामग्री और संस्थागत ज्ञान को डिजिटल रूप में व्यवस्थित करने, सुरक्षित रखने और प्रसारित करने की प्रक्रियाओं की जानकारी मिली।
मेटाडेटा तैयार करने में भी एआई का उपयोग
कार्यक्रम में पुस्तकालय सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर भी प्रशिक्षण दिया गया। इसमें एआई उपकरणों के इस्तेमाल और उनकी मदद से मेटाडेटा निकालने की तकनीकें शामिल थीं। 15 अक्टूबर को ‘आई-थेन्टीकेट’ पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पाठ्य समानता की जांच और जिम्मेदार शैक्षणिक एवं शोध लेखन में इसके महत्व से प्रतिभागियों को परिचित कराया गया।
राष्ट्रीय विज्ञान पुस्तकालय का भी किया दौरा
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय विज्ञान पुस्तकालय का दौरा किया और वहां उपलब्ध संसाधनों तथा सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। शैक्षणिक सत्रों का संचालन मुकेश पुंड, संजय बर्डे, डॉ. अविनाश क्षितिज, सलीम अंसारी और भरत नटराजन ने किया। व्यावहारिक अभ्यासों के जरिए प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को लागू करने का अवसर मिला।
समापन सत्र में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की गई और उन्हें अपने-अपने संस्थानों में अर्जित ज्ञान तथा कौशल का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का समन्वय प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर और नोडल प्रधान अन्वेषक मिताली भारती ने किया। सह-प्रधान अन्वेषक एवं पाठ्यक्रम सह-समन्वयक सलीम अंसारी तथा प्रशिक्षण प्रभाग के प्रमुख और पाठ्यक्रम समन्वयक मुकेश ए. पुंड ने भी इसमें भूमिका निभाई।
डिजिटल ज्ञान प्रबंधन को मिलेगी मजबूती
सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल के तीसरे चरण के माध्यम से एनआईएससीपीआर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में पेशेवर क्षमताओं को मजबूत करने के साथ ओपन-सोर्स तकनीकों और एआई के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। इस तरह के प्रशिक्षण से शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में पुस्तकालय सेवाओं के आधुनिकीकरण, डिजिटल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और ज्ञान के संरक्षण को गति मिलने की उम्मीद है।

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