भारत की सभ्यतागत विरासत, लोकतांत्रिक परंपराएं और तकनीकी क्षमताएं देश की विशिष्ट शक्ति : उपराष्ट्रपति

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  • Oct 23, 2026
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राष्ट्र निर्माण में सामूहिक भागीदारी का आह्वान; कहा—भारत का लाभ, मानवता का लाभ है और विकसित भारत केवल आकांक्षा नहीं, दायित्व भी


भारत की सभ्यतागत विरासत, लोकतांत्रिक परंपराएं और तकनीकी क्षमताएं देश की विशिष्ट शक्ति : उपराष्ट्रपति


उपराष्ट्रपति भवन में अनिल के. एंटनी की पुस्तक ‘एडवांटेज इंडिया : रिशेपिंग द फ्यूचर फॉर एन इक्विटेबल वर्ल्ड’ का विमोचन
 

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026।भारत की बढ़ती शक्ति और वैश्विक भूमिका का विश्लेषण

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में अनिल के. एंटनी की पुस्तक ‘एडवांटेज इंडिया : रिशेपिंग द फ्यूचर फॉर एन इक्विटेबल वर्ल्ड’ का विमोचन किया। उन्होंने लेखक और रूपा पब्लिकेशंस को बधाई देते हुए कहा कि पुस्तक भारत के उल्लेखनीय बदलाव और तेजी से बदलती दुनिया में देश के सामने मौजूद अवसरों का विश्लेषण करती है। प्रौद्योगिकी, व्यवसाय और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में अपने अनुभवों के आधार पर एंटनी ने भारत की उभरती शक्तियों तथा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सभ्यतागत विरासत, लोकतांत्रिक परंपराएं, जनसांख्यिकीय लाभ, बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत संस्थान और विस्तारित तकनीकी क्षमताएं देश को विशिष्ट पहचान और वैश्विक बढ़त प्रदान करती हैं।

25 करोड़ से अधिक लोग अत्यधिक निर्धनता से बाहर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को अत्यधिक निर्धनता से बाहर निकाला गया है। शिक्षा, आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी पहलों ने लाखों लोगों के जीवन में गरिमा और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा दिया है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं, युवाओं, किसानों और वंचित वर्गों का सशक्तीकरण भारत की प्रगति का प्रमुख आधार है। तीन करोड़ से अधिक लखपति दीदियों का उभरना महिला-नेतृत्व वाले विकास की सफलता दर्शाता है। नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के विस्तार के साथ शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य अवसंरचना मजबूत हुई है। वंदे भारत रेलगाड़ियों, हवाई अड्डों, राजमार्गों और रेलवे स्टेशनों ने भी देश में संपर्क सुविधाओं को बेहतर बनाया है।

प्रौद्योगिकी और स्वदेशी विनिर्माण में भारत की बढ़त

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कंप्यूटर के आगमन के शुरुआती दौर में लोगों के मन में आशंकाएं थीं, लेकिन भारत बाद में वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख शक्ति बनकर उभरा। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां देश के सामने नए अवसर प्रस्तुत कर रही हैं। समाज की प्रगति के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित करने में नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका है।
आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने स्वदेशी विनिर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति की है। स्वदेश में निर्मित बहुउद्देशीय पोत आईएनएस समर्थक को हाल ही में राष्ट्र को समर्पित किया जाना घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमताओं में बढ़ोतरी का उदाहरण है।

वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव

सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारतीय कूटनीति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का जुड़ाव अधिक व्यापक हुआ है, उसका प्रभाव बढ़ा है और आत्मविश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत की भूमिका तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के दर्शन को आगे बढ़ाने में उसके योगदान का उल्लेख किया।
उपराष्ट्रपति ने जी-20 में अफ्रीकी संघ को शामिल कराने और वैश्विक दक्षिण के विकासशील देशों की आवाज के रूप में भारत के उभरने को भी महत्वपूर्ण बताया।

‘वसुधैव कुटुंबकम्’ भारत की मार्गदर्शक विचारधारा

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ केवल नारा नहीं, बल्कि भारत की मार्गदर्शक विचारधारा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने देशव्यापी टीकाकरण अभियान चलाने के साथ सौ से अधिक देशों को जीवनरक्षक टीके उपलब्ध कराए। यह वैश्विक एकजुटता और मानवता की सेवा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि सभी संप्रभु देश समान हैं और उनके साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। भारत का लाभ, मानवता का लाभ है। किसी भी नए नवाचार या तकनीकी प्रगति का लाभ पूरी मानवता को मिलना चाहिए, न कि वह किसी एक देश की विशिष्ट संपत्ति बनकर रह जाए। उपराष्ट्रपति ने प्रौद्योगिकी के विकास में अधिक न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया, ताकि उसके लाभ साझा किए जा सकें और संपूर्ण मानवता का कल्याण हो।

विकसित भारत 2047 : आकांक्षा नहीं, दायित्व

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आकांक्षा नहीं, बल्कि दायित्व भी है। इसे हासिल करने के लिए राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता आवश्यक है। राष्ट्र निर्माण केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि अनिल के. एंटनी की पुस्तक युवा भारतीयों को प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक नीति, अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राष्ट्र निर्माण को गहराई से समझने तथा इनमें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने लेखक, प्रकाशक और पुस्तक के प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं।

विमोचन समारोह में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति

पुस्तक विमोचन समारोह में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय सूद, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य एवं अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि, लेखक अनिल के. एंटनी, रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध संपादक कपिश मेहरा, राजनयिक तथा कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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