बिहान से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 59,524 महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं

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  • Oct 14, 2026
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जिले में 5,576 स्व-सहायता समूह गठित, चालू वित्तीय वर्ष में 676 नए समूहों का गठन कर 12,029 महिलाओं को जोड़ा गया

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 14 अक्टूबर 2026। 

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित बिहान योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं बचत, वित्तीय प्रबंधन, स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसरों की ओर कदम बढ़ा रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में अब तक 59,524 महिलाएं 5,576 स्व-सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं। महिलाओं का यह व्यापक संगठन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है।

जिले में 5,576 समूहों से जुड़ीं 59,524 महिलाएं

13 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, जिले में बिहान मिशन के अंतर्गत कुल 5,576 स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया है। विकासखंडवार स्थिति के अनुसार गौरेला में 1,828 समूहों से 19,654 महिलाएं, पेंड्रा में 1,603 समूहों से 17,612 महिलाएं और मरवाही में 2,145 समूहों से 22,258 महिलाएं जुड़ी हैं।

समूहों की संख्या और महिला भागीदारी के मामले में मरवाही विकासखंड जिले में अग्रणी है। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को सामूहिक मंच मिल रहा है, जहां वे बचत, वित्तीय जरूरतों, आजीविका और सामूहिक विकास से जुड़े विषयों पर भागीदारी कर रही हैं।

चालू वित्तीय वर्ष में 676 नए समूह गठित

महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 676 नए स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया है। इन समूहों से 12,029 महिलाएं जुड़ी हैं।

इस अवधि में गौरेला विकासखंड में 211 नए समूह गठित कर 4,189 महिलाओं को जोड़ा गया। पेंड्रा में 130 नए समूहों के माध्यम से 3,302 महिलाएं और मरवाही में 335 समूहों के जरिए 4,538 महिलाएं जुड़ी हैं।

तीनों विकासखंडों में नए समूहों का गठन ग्रामीण महिलाओं की सामूहिक संगठन और आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

बचत और बैंकिंग से आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

बिहान योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित करने के साथ उन्हें वित्तीय प्रबंधन के प्रति जागरूक बनाना है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं नियमित बचत, सामूहिक वित्तीय निर्णय और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ने के अवसर प्राप्त करती हैं।

वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग सेवाओं और ऋण सुविधाओं तक पहुंच से महिलाएं अपनी आर्थिक जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकती हैं। इससे स्वरोजगार के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने और परिवार की आय में योगदान देने की संभावनाएं बढ़ती हैं। आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी से महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास को भी मजबूती मिलती है।

खेती, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों से स्वरोजगार के अवसर

बिहान मिशन के माध्यम से महिलाओं को स्थायी आजीविका और आय बढ़ाने वाली गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित गतिविधियों, सब्जी उत्पादन, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादों के निर्माण एवं विपणन जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाएं हैं।

महिलाओं को उनके कौशल, स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध अवसरों के अनुरूप आजीविका गतिविधियों से जोड़ने से आर्थिक अवसरों का विस्तार हो सकता है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से उत्पादन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और उत्पादों के विपणन में भी मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का रास्ता तैयार होता है।

आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक बदलाव

स्व-सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक जीवन में भी सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करते हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं अपनी बात रखने, सामूहिक निर्णय लेने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने में सक्षम होती हैं।

आपसी सहयोग और सामूहिक प्रयासों से उनमें नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करने के अवसर बढ़ते हैं। इससे परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका को नई पहचान मिलने के साथ सामाजिक विकास में उनकी भागीदारी भी मजबूत हो सकती है।

महिला भागीदारी से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से परिवार की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में 59,524 महिलाओं का स्व-सहायता समूहों से जुड़ना महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह नेटवर्क आजीविका संवर्धन, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आधार तैयार कर सकता है। महिलाओं को आवश्यक प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधनों और बाजार से जोड़कर उनकी आर्थिक संभावनाओं को और बढ़ाया जा सकता है।

आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में बढ़ते कदम

बिहान मिशन ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्व-सहायता समूहों का लगातार विस्तार इस बात का संकेत है कि महिलाएं सामूहिक शक्ति के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं।

बचत से आर्थिक अनुशासन, संगठन से आत्मविश्वास और आजीविका के अवसरों से स्वावलंबन की राह तैयार हो रही है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी केवल उनकी व्यक्तिगत आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और गांवों के समग्र विकास की संभावनाओं को भी मजबूत कर रही है।

जिले की 59,524 महिलाओं का यह संगठन सशक्त महिला, समृद्ध परिवार और आत्मनिर्भर गांव की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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