जम्मू कश्मीर – देश विरोधी कंटेंट वाली 4,249 किताबें हटाईं गईं, 21.81 लाख किताबों की जांच जारी

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  • Sep 25, 2026
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जम्मू। 

जम्मू-कश्मीर में कॉलेजों और पुस्तकालयों में उपलब्ध देश विरोधी कंटेंट वाली 4,249 किताबें हटा दी गई हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा में यह जानकारी प्रदान की। सरकार ने आंकड़े देते हुए बताया कि अब तक 21.81 लाख से ज्यादा किताबों और अन्य प्रकाशनों की जांच की जा चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 3,996 किताबें कश्मीर संभाग से और 253 किताबें जम्मू संभाग से हटाई गई हैं।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, कश्मीर संभाग में 12.48 लाख से ज्यादा और जम्मू संभाग में 9.32 लाख से ज्यादा किताबों और प्रकाशनों की जांच हुई है।

इसके अलावा पहले से प्रतिबंधित शीर्षकों की 518 प्रतियां भी हटाई गई हैं। वहीं 1,752 किताबों को विशेषज्ञ जांच के लिए डायरेक्टर कॉलेज के पास भेजा गया है। सरकार ने कहा कि बाकी सामग्री की जांच अभी जारी है। जांच में भी सामने आया है कि, किताबों में भारत विरोधी कंटेंट को शामिल किया गया था।

जुलाई में उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में मौजूद किताबों और प्रकाशनों के अकादमिक और कंटेंट ऑडिट के लिए व्यवस्था बनाई। इसके तहत कॉलेज स्तर, निदेशालय स्तर और प्रशासनिक विभाग स्तर पर तीन स्तरीय जांच की जा रही है।

जिस विवाद की शुरुआत कुछ किताबों में अलगाववादी और देश विरोधी सामग्री मिलने से हुई थी, उसने अब जम्मू-कश्मीर के पूरे शैक्षणिक पुस्तकालय तंत्र की व्यापक जांच का रूप ले लिया है। और सरकार के मुताबिक यह प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है।

यह मामला इसी वर्ष जून माह में सामने आया जब, समग्र शिक्षा योजना के तहत स्कूल लाइब्रेरियों के लिए खरीदी गई दो किताबों की सामग्री पर सवाल उठे।

‘Personalities and Legends of J&K’ और ‘Great Personalities of Jammu and Kashmir’। इन किताबों में अलगाववादियों और आतंकियों का महिमंडन किया गया था। एक किताब में तो आतंकी मकबूल भट को शहीद तक बताया गया था और जम्मू-कश्मीर के लिए “Indian Held Kashmir” तथा “Indian Occupied Kashmir” जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया था।

विवाद बढ़ने के बाद जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्शन लिया और प्रशासन को जांच के आदेश दिए। प्रशासन ने जाँच के बाद दोनों विवादित किताबों को स्कूल की लाइब्रेरियों से हटाया और अन्य किताबों के भी जाँच के आदेश दिए।

इसके बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में पब्लिकेशन हाउस पर छापेमारी का दौर शुरू हुआ, यहाँ तक कि जांच की आंच नई दिल्ली तक पहुंची। दो प्रकाशक गिरफ्तार हुए थे, जिसके बाद केंद्र शासित प्रदेश में सभी किताबों के जांच के आदेश दिए गए थे।

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