स्वच्छ ऊर्जा में भारत की छलांग: दशक में 15 लाख करोड़ का निवेश, दुनिया के सामने उभरी नई ताकत

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  • Nov 05, 2026
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भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो-2026 

 135 देशों के 75 हजार से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बताया आर्थिक विकास का नया आधार

 

नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026। पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा के दो मजबूत आधार हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश की पिछले एक दशक की उपलब्धियां इस बदलाव की गवाह हैं। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को नई दिल्ली में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो-2026 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा परिवारों, किसानों और समुदायों को सशक्त बनाने के साथ उद्योगों की लागत घटाने, रोजगार बढ़ाने और ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने में निर्णायक भूमिका निभा रही है।
15 लाख करोड़ से अधिक का निवेश, दो साल में आए 6 लाख करोड़
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र ने पिछले एक दशक में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। इसमें से लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का निवेश पिछले दो वर्षों में आया है। उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो-2026 देश में अब तक आयोजित सबसे बड़ा आयोजन रहा। इसमें 135 देशों के 75 हजार से अधिक आगंतुकों, 32 से अधिक देशों के मंत्रियों, आठ से अधिक भागीदार देशों और यूरोपीय संघ ने भागीदारी की।
सम्मेलन में 14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने भागीदार के रूप में हिस्सा लिया। छह मुख्यमंत्री, 10 राज्यों के ऊर्जा मंत्री, 400 से अधिक प्रदर्शक, 620 से अधिक वक्ता और 113 सत्र इस आयोजन का हिस्सा बने। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं सभा और हरित हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया गया। सम्मेलन में 800 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा 10 समझौता ज्ञापनों और रूपरेखा समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) का समझौता भी शामिल है, जिसके तहत प्रतिवर्ष तीन लाख टन हरित मेथनॉल की आपूर्ति की संभावना है।
2040 की ऊर्जा तकनीक आज की प्रयोगशालाओं में होगी तैयार
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में हुई प्रगति ने साबित किया है कि पर्यावरणीय प्रतिबद्धताएं विकास में बाधा नहीं, बल्कि उसकी प्रेरक शक्ति हैं। स्वच्छ ऊर्जा से बिजली की उपलब्धता बढ़ रही है, उद्योगों की उत्पादन लागत घट रही है, रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं और जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम हो रही है। उन्होंने उद्योग और शिक्षा जगत के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत बताते हुए कहा कि वर्ष 2040 की प्रौद्योगिकियां आज की प्रयोगशालाओं और स्टार्टअप से विकसित होंगी। इसके लिए अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देना आवश्यक है।
92 गीगावॉट घंटे ऊर्जा भंडारण के लिए 14,500 करोड़ की योजना
केंद्रीय मंत्री जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 92 गीगावॉट घंटे की ग्रिड स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजना को मंजूरी दी है। इस योजना में 30 गीगावॉट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, 60 गीगावॉट घंटे की पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं और नई प्रौद्योगिकियों के माध्यम से दो गीगावॉट घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी।उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते विस्तार के साथ मजबूत पारेषण नेटवर्क, अधिक ऊर्जा भंडारण क्षमता और स्मार्ट ग्रिड विकसित करना भी जरूरी है। बिजली की मांग और आपूर्ति का पूर्वानुमान लगाने, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव और ऊर्जा प्रबंधन में डिजिटलीकरण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।


दुनिया में सबसे सस्ती सौर बिजली, 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत
भारत ने उपयोगिता स्तर पर सौर बिजली उत्पादन की लागत 30 से 35 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट घंटा हासिल की है, जो विश्व में सबसे कम है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से देश को जीवाश्म ईंधन के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक यानी लगभग 9.46 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत ने 15 गीगावॉट क्षमता की हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की नीलामी की। इससे कुल नीलाम क्षमता 64 गीगावॉट हो गई। ये दोनों आंकड़े विश्व में सर्वाधिक हैं। वर्ष 2023 से 2025 के बीच इन परियोजनाओं का औसत टैरिफ लगभग 45 अमेरिकी डॉलर प्रति मेगावाट घंटा रहा, जो कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से मिलने वाली बिजली की औसत लागत से 20 प्रतिशत कम है।
सौर मॉड्यूल विनिर्माण में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर
भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता का उल्लेख करते हुए जोशी ने बताया कि देश की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 225 गीगावॉट से अधिक हो गई है। इसके साथ ही भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर मॉड्यूल विनिर्माता बन गया है। स्व-उपभोग के लिए विकेंद्रित सौर ऊर्जा क्षमता वर्ष 2030 तक 100 गीगावॉट से अधिक होने का अनुमान है। इन उपलब्धियों और संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट 'इंडिया आरई मार्केट रिपोर्ट-2026: एनालिसिस एंड फोरकास्ट टू 2030' में भी रेखांकित किया गया है। यह रिपोर्ट सम्मेलन के दौरान जारी की गई।
हरित ऊर्जा के साथ एआई की बढ़ती बिजली मांग पर नजर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2031-32 तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डेटा केंद्रों के कारण देश में बिजली की मांग 26.3 गीगावॉट अतिरिक्त बढ़ने की संभावना है। इस मांग को पूरा करने के लिए अभी से ऊर्जा नियोजन जरूरी है और इसमें नवीकरणीय ऊर्जा की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा, "एआई भविष्य को शक्ति प्रदान करेगा और स्वच्छ ऊर्जा एआई को शक्ति प्रदान करेगी।"
वैश्विक साझेदारी और निवेश के नए अवसर
सम्मेलन के दौरान प्रल्हाद जोशी ने फ्रांस, डेनमार्क, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड और वैश्विक दक्षिण के कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय चर्चा की। इन बैठकों में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन के 'वाट्स नेक्स्ट' मंच पर नवप्रवर्तकों ने अपने विचार साझा किए, जबकि 'नेक्स्ट टेरावाट मंत्रिस्तरीय पूर्ण सत्र' में एकीकृत ऊर्जा नियोजन, मजबूत अवसंरचना, ऊर्जा भंडारण और वित्तपोषण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
जोशी ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बीआरईएसई-2026 में निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए उद्योग जगत सक्षम है, निवेशकों में भरोसा है और अंतरराष्ट्रीय भागीदार मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं। समापन सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, निवेशक और उद्योग जगत के अग्रणी उपस्थित रहे।

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