भारत की अध्यक्षता में ‘मानवता सर्वप्रथम’ और सहयोग पर जोर

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  • Oct 27, 2026
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भारत की अध्यक्षता में ‘मानवता सर्वप्रथम’ और सहयोग पर जोर

 

हरिवंश ने 12वें BRICS संसदीय मंच में कहा—बदलती वैश्विक चुनौतियों के बीच संसदें हों सतर्क, उत्तरदायी और भविष्य के लिए तैयार

49.5% वैश्विक आबादी का प्रतिनिधित्व करता BRICS, जन-केंद्रित विकास में संसदों की भूमिका अहम

 नई दिल्ली। दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला BRICS वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर परामर्श तथा सहयोग का प्रभावी बहुपक्षीय मंच बन चुका है। आर्थिक अनिश्चितता, तकनीकी बदलाव, जलवायु संकट और सामाजिक असमानताओं जैसी चुनौतियों के बीच संसदों को अधिक उत्तरदायी, गतिशील और भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सोमवार को भारतीय संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में 12वें BRICS संसदीय मंच के उद्घाटन सत्र में यह बात कही।

‘जन-केंद्रित विकास’ समय की मांग

उद्घाटन सत्र का विषय—‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना’—समय की जरूरत और प्रासंगिकता को दर्शाता है। हरिवंश ने कहा कि दुनिया भर के नागरिक संसदों से अपेक्षा करते हैं कि वे उभरती चुनौतियों का प्रभावी समाधान तलाशें। आर्थिक अनिश्चितता, तकनीकी परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों और सामाजिक असमानताओं के दौर में संसदों तथा विधानमंडलों को सतर्क, जवाबदेह और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बने रहना होगा। मंच पर होने वाली चर्चाएं सदस्य देशों को अपने अनुभव साझा करने, एक-दूसरे से सीखने और जनजीवन में सार्थक सुधार लाने वाले संसदीय उपायों की पहचान करने का अवसर देंगी।

भारत की अध्यक्षता में ‘मानवता सर्वप्रथम’ की परिकल्पना

हरिवंश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 2026 की BRICS अध्यक्षता के दौरान ‘जन-केंद्रित’ और ‘मानवता सर्वप्रथम’ दृष्टिकोण पर आधारित परिवर्तनकारी परिकल्पना प्रस्तुत की। इसी सोच से प्रेरित होकर BRICS प्रक्रिया ने ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण’ विषय को अपनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने समूह के विस्तार की वकालत करते हुए वैश्विक दक्षिण की आवाज और विश्वास को मजबूत किया।
हरिवंश के अनुसार, भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का परिणाम नई दिल्ली घोषणा के रूप में सामने आया। इसने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधारों को आगे बढ़ाने और अधिक संतुलित, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को प्रोत्साहित करने की दिशा में योगदान दिया।

ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में प्रतिनिधियों का स्वागत

लोकसभा अध्यक्ष और 12वें BRICS संसदीय मंच के अध्यक्ष ओम बिरला, विभिन्न सदनों के पीठासीन अधिकारियों तथा BRICS सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों सहित अन्य गणमान्य प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए हरिवंश ने कहा कि भारतीय संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में सभी का उपस्थित होना सम्मान की बात है। यह कक्ष भारत के दुनिया के सबसे बड़े, जीवंत और सफल लोकतंत्रों में से एक बनने की यात्रा का साक्षी रहा है।
उन्होंने भारत को ज्ञान, बुद्धिमत्ता और सभ्यतागत विरासत का शाश्वत भंडार बताते हुए देश की संस्कृतियों, भाषाओं, भौगोलिक विविधता, रीति-रिवाजों और परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रतिनिधि भारत से गर्मजोशी भरी और स्थायी यादें लेकर लौटेंगे।
उद्घाटन संबोधन के समापन पर हरिवंश ने सभी प्रतिनिधियों को मंच की कार्यवाही के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि चर्चा सार्थक और परिणामोन्मुख होगी तथा प्रतिनिधियों का भारत प्रवास सुखद और स्मरणीय रहेगा।

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