अंबाला में अमर हुआ 1857 के क्रांतिकारियों का शौर्य, भव्य शहीद स्मारक का अमित शाह ने किया उद्घाटन

  • Admin
  • Nov 05, 2026
  • 19,816 views

 

22 एकड़ में 22 दीर्घाओं के साथ साकार हुआ आजादी की पहली लड़ाई का इतिहास 10 मई 1857 को इसी धरती से उठी थी सशस्त्र क्रांति की चिंगारी

2,500 दर्शकों की क्षमता वाला खुला रंगमंच और आधुनिक तकनीक बने स्मारक का आकर्षण

अंबाला, 5 नवंबर 2026। अंबाला की जिस धरती से 10 मई 1857 को अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति का बिगुल बजा था, उसी ऐतिहासिक भूमि पर अब देश की पहली आजादी की लड़ाई के शहीदों का शौर्य, संघर्ष और बलिदान जीवंत रूप में दिखाई देगा। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को अंबाला में 1857 की क्रांति के शहीद स्मारक का उद्घाटन किया। 22 एकड़ में 594 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस भव्य स्मारक में 22 दीर्घाएं बनाई गई हैं। इस अवसर पर शाह ने कहा कि अंबाला से उठी क्रांति की चिंगारी आग बनकर पूरे देश में फैल गई थी। दुनिया आश्चर्यचकित थी कि जिस अंग्रेजी शासन का सूर्य कभी अस्त नहीं होता था, उसकी नींव हिलाने वाला संग्राम भारत की धरती पर लड़ा जा रहा था।


अंग्रेजों के लिए विद्रोह, भारत के लिए स्वतंत्रता संग्राम
अमित शाह ने 1857 की क्रांति के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अंग्रेजों से प्रेरित वामपंथी विचारधारा के इतिहासकारों ने इसे विद्रोह का नाम दिया, लेकिन वीर सावरकर ने सही कहा था कि अंग्रेजों के लिए यह विद्रोह हो सकता है, मगर भारत माता की प्रत्येक संतान के लिए यह स्वतंत्रता संग्राम था। इसी क्रांति ने हिमालय से कन्याकुमारी और गंगासागर से सोमनाथ तक फैले विशाल भारत के प्रत्येक नागरिक के मन में आजादी की लौ प्रज्वलित की थी।
उन्होंने कहा कि 1857 में अंबाला की धरती से शुरू हुई सशस्त्र क्रांति ने पूरे देश को स्वतंत्रता के संघर्ष से जोड़ दिया। इस महान संग्राम में नाना साहेब पेशवा, महारानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और बेगम हजरत महल सहित अनेक क्रांतिकारियों ने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय दिया तथा सर्वोच्च बलिदान दिया।


90 वर्षों के बलिदान की नींव पर खड़ा है आज का भारत
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 1857 से 1947 तक स्वतंत्रता के लिए चले 90 वर्षों के महान संघर्ष में असंख्य शहीदों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उन्हीं के बलिदान के कारण आज हमें स्वतंत्र भारत में जीने का अवसर मिला है। शहीदों के त्याग और संघर्ष की नींव पर ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का सपना साकार करने की कल्पना की जा रही है। उन्हीं बलिदानों के आधार पर पिछले करीब 80 वर्षों में देश ने अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया है और आज पूरी दुनिया के सामने सम्मान के साथ खड़ा है।उन्होंने कहा कि कोई भी देश तब तक अपनी स्वतंत्रता का वास्तविक मूल्य नहीं समझ सकता, जब तक वह उसके लिए रक्त बहाने वाले शहीदों का सम्मान और उनके योगदान का महिमामंडन नहीं करता। जो राष्ट्र अपने इतिहास में शहीदों के रक्त से लिखी गाथाओं को स्वर्णाक्षरों में अंकित नहीं करता, वह प्रगति नहीं कर सकता। अंबाला का यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों, युवाओं और किशोरों में देशभक्ति, राष्ट्रगौरव और कर्तव्यबोध की भावना जगाने वाला प्रेरणास्थल बनेगा। उन्होंने देशभर के युवाओं से आग्रह किया कि वे अंबाला आएं, इस स्मारक को देखें, समझें कि आज जिस स्वतंत्र भारत में हम रह रहे हैं, उसके निर्माण में किन वीरों का योगदान रहा है और उन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करें।


आधुनिक तकनीक से 1857 की क्रांति का सजीव अनुभव
शाह ने कहा कि 22 एकड़ में 594 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस स्मारक में 1857 की क्रांति के इतिहास को आधुनिक तकनीक और कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से सहेजने का अनूठा प्रयास किया गया है। इसकी 22 दीर्घाओं में ऐतिहासिक दस्तावेजों के साथ वर्चुअल रियलिटी, होलोग्राफी और इंटरएक्टिव प्रोजेक्शन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। हरियाणा की पारंपरिक कलाओं को भी स्मारक की संरचना और प्रस्तुतियों में स्थान दिया गया है। फुलकारी और सरकंडा शिल्पकला के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध लोककला को प्रदर्शित किया गया है।
यहां 2,500 दर्शकों की क्षमता वाला खुला रंगमंच बनाया गया है। प्रकाश एवं ध्वनि कार्यक्रम के माध्यम से दर्शकों को 1857 की क्रांति के ऐतिहासिक घटनाक्रम से रूबरू कराने की व्यवस्था की गई है। शाह ने कहा कि यह स्मारक केवल इतिहास को प्रदर्शित करने वाला परिसर नहीं, बल्कि 1857 के शौर्य, गौरव, बलिदान, सम्मान और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को जागृत करने वाला ऊर्जावान केंद्र बनेगा।


वेदों-उपनिषदों से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक हरियाणा की गौरवशाली विरासत
अमित शाह ने हरियाणा की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही पवित्र भूमि है, जहां कभी सरस्वती नदी प्रवाहित होती थी। इसी क्षेत्र में वेदों और उपनिषदों की रचना हुई और इसी भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया। महाराजा अग्रसेन ने इसी धरती पर प्रशासन का भारतीय मॉडल प्रस्तुत किया। राजा नाहर सिंह और राव तुलाराम ने भी आजादी की लड़ाई में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की वीरता और राष्ट्रसेवा की परंपरा आज भी कायम है। देश की सेना में हरियाणा जैसे छोटे प्रदेश से सबसे अधिक जवान जाते हैं। खेलों की पदक तालिकाओं में भारत की उपलब्धियों में हरियाणा का योगदान सबसे आगे रहता है। जब देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता थी, तब हरियाणा के किसानों ने देश के अनाज भंडार भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्वेत क्रांति में भी प्रदेश का योगदान उल्लेखनीय रहा है।


1260 करोड़ की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का लोकार्पण
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और हरियाणा सरकार ने प्रदेश में आमूलचूल परिवर्तन करने का काम किया है। इसी कड़ी में 1,260 करोड़ रुपये की लागत से तैयार राष्ट्रीय राजमार्ग का भी लोकार्पण किया गया है। इस राजमार्ग से हरियाणा में आवागमन की सुविधाएं बेहतर होंगी और प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।


धुआंमुक्त प्रदेश से 24 फसलों की एमएसपी खरीद तक हरियाणा की उपलब्धियां
शाह ने कहा कि हर घर तक गैस सिलेंडर पहुंचाने के अभियान के साथ हरियाणा देश का पहला धुआंमुक्त प्रदेश बना। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 24 फसलों की खरीद करने वाला भी हरियाणा देश का पहला राज्य है। नवीन न्याय संहिताओं को लागू करने के बाद सजा दिलाने की दर में 40 प्रतिशत वृद्धि हासिल करने वाला प्रदेश देश का पहला राज्य बना है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने और पहली एलिवेटेड रेलवे ट्रैक परियोजना शुरू करने का गौरव भी हरियाणा को मिला है।उन्होंने हरियाणा अंत्योदय परिवार परिवहन योजना (हैप्पी) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत गरीब परिवारों को एक हजार किलोमीटर तक मुफ्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हरियाणा में देश का सबसे बड़ा ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड बनाया गया है। पढ़ी-लिखी पंचायतों की व्यवस्था लागू करने में भी प्रदेश ने पहल की। ऑनलाइन तबादला नीति बनाकर सरकार ने वर्षों से चल रहे तबादला उद्योग को जड़ से समाप्त करने का काम किया है। देश में हरियाणा एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां गांवों में लाल डोरा व्यवस्था समाप्त की जा चुकी है।


किसान, गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण में भी अग्रणी
अमित शाह ने कहा कि हरियाणा एनीमिया मुक्त राज्य बना है। देश का पहला आयुष विद्यालय स्थापित करने और परिवार पहचान पत्र की व्यवस्था लागू करने वाला राज्य भी हरियाणा है। बागवानी फसलों के किसानों को भावांतर योजना के माध्यम से संरक्षण देने में प्रदेश ने पहल की है। मनरेगा के तहत देश में सबसे अधिक मजदूरी देने वाला राज्य भी हरियाणा है। उन्होंने कहा कि पिछले 60 वर्षों में हरियाणा ने विकास के अनेक आयाम स्थापित किए हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।


नशामुक्त हरियाणा के लिए सरकार ने कसी कमर
शाह ने कहा कि हरियाणा ने नशामुक्त प्रदेश बनाने के लिए भी कमर कस ली है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अभियान में हरियाणा को प्राथमिकता दी है। सरकार नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध है।


पंजाब में एमएसपी की मांग और हरियाणा के किसानों के लिए सरकार का दावा
किसानों के मुद्दे पर अमित शाह ने पंजाब का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां किसान आज भी एमएसपी की गारंटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी दल के नेता पर किसानों से झूठा वादा करने का आरोप लगाया और कहा कि हमारी सरकार जो कहती है, वह करके दिखाती है। उन्होंने हरियाणा में 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद को राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

सम्बन्धित खबरें

कोई सम्बन्धित खबर नहीं मिली।