कलाकारों को सिर्फ सम्मान नहीं, बाजार और अवसर भी मिलें: राष्ट्रपति मुर्मु

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  • Oct 22, 2026
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65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार

 युवा प्रतिभाओं को नए मंच देने, पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर

नई दिल्ली। कलाकारों की प्रतिभा को पहचान देने के साथ उनकी कलाकृतियों को बाजार तक पहुंचाना और युवा हुनर को बड़े मंच उपलब्ध कराना भी जरूरी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कला क्षेत्र की इन जरूरतों को रेखांकित करते हुए कहा कि युवा और उभरते कलाकारों को नए माध्यमों में प्रयोग करने, अपनी सृजनशीलता का विस्तार करने और प्रतिभा को निखारने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। राष्ट्रपति ने बुधवार को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के चयनित कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर तृतीय प्रिंट द्विवार्षिकी भारत-2026 के ग्रैंड प्राइज विजेताओं और सम्माननीय उल्लेख प्राप्त कलाकारों को भी सम्मानित किया गया।
कला सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, संस्कृति और समाज का आईना
राष्ट्रपति ने कहा कि कला केवल कैनवास पर उकेरी गई आकृतियों, पत्थर में तराशी गई मूर्तियों या अन्य माध्यमों से बनी कलाकृतियों तक सीमित नहीं है। इसमें देश की सांस्कृतिक विरासत, अतीत की स्मृतियां, वर्तमान के अनुभव और भविष्य की आकांक्षाएं प्रतिबिंबित होती हैं। कला समाज और अपने समय को नए नजरिए से देखने-समझने का अवसर देती है। उन्होंने पुरस्कार समारोह को भारत की कलात्मक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन सृजनशीलता का उत्सव बताया।
पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ें
मुर्मु ने दूरदराज के क्षेत्रों में पारंपरिक कला से जुड़े कलाकारों को नई तकनीकों और समकालीन कला शैलियों का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से कलाकारों को अपनी कला निखारने, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और व्यापक मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलेंगे।
कलाकृतियों को खरीदारों तक पहुंचाना भी जरूरी
राष्ट्रपति ने कहा कि कलाकारों को रचनात्मक अवसर देने के साथ आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना और उनकी कलाकृतियों के लिए व्यापक बाजार तैयार करना भी जरूरी है। इसके लिए कलाकारों को कला-संग्राहकों से जोड़ने के अवसर बढ़ाए जाने चाहिए। उन्होंने ललित कला अकादमी और संस्कृति मंत्रालय की ओर से कलाकृतियों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर प्रसन्नता जताई।
कला दीर्घाओं की सीमाओं से बाहर निकले कला
मुर्मु ने कहा कि कला का दायरा केवल कला दीर्घाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने सभी संबंधित संस्थाओं और हितधारकों से युवा और उभरते कलाकारों को प्रतिभा विकसित करने, नए माध्यम अपनाने तथा अपनी रचनात्मक क्षमता का विस्तार करने के पर्याप्त अवसर देने का आग्रह किया।

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