कुपवाड़ा के मां गोवशोरी मंदिर में 36 साल बाद गूंजे धार्मिक अनुष्ठान

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  • Oct 23, 2026
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पुनर्निर्माण के बाद विजयादशमी पर हुआ हवन और पूजा-पाठ; दशकों से प्रभावित कश्मीरी हिंदू धार्मिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कुपवाड़ा, जम्मू-कश्मीर। 

कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के गतुंगू स्थित मां गोवशोरी मंदिर में 36 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद विजयादशमी पर एक बार फिर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद यहां हवन और पूजा-अर्चना हुई। इस आयोजन ने कश्मीरी हिंदू समुदाय की उस धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की ओर ध्यान आकर्षित किया, जो घाटी में आतंकवाद के दौर में लंबे समय तक प्रभावित रही।

मां गोवशोरी मंदिर स्थानीय हिंदू समुदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। वर्ष 1990 के दशक से पहले यहां नियमित पूजा-पाठ और पर्व-त्योहारों पर धार्मिक अनुष्ठान होते थे। हालांकि, कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने के बाद परिस्थितियां बदल गईं। हिंसा और असुरक्षा के माहौल का असर कश्मीरी हिंदुओं के साथ-साथ उनके पारंपरिक धार्मिक स्थलों और सदियों पुरानी परंपराओं पर भी पड़ा।

इस दौर में गतुंगू स्थित मां गोवशोरी मंदिर को भी नुकसान पहुंचा। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मंदिर में आग लगा दी गई थी और मूर्तियां भी क्षतिग्रस्त हुई थीं। इसके बाद मंदिर लंबे समय तक वीरान पड़ा रहा और वहां धार्मिक गतिविधियां बंद हो गईं।

पुनर्निर्माण से जगी धार्मिक परंपराओं की बहाली की उम्मीद

मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए कश्मीरी हिंदू समुदाय ने पहल की और इसके लिए धन जुटाने के प्रयास किए। पुनर्निर्माण पूरा होने के बाद इस वर्ष विजयादशमी पर मंदिर में हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। लंबे अंतराल के बाद पूजा-पाठ शुरू होना समुदाय के लिए अपनी धार्मिक परंपराओं से दोबारा जुड़ने का अवसर बना।

कश्मीर में प्राचीन मंदिरों का संरक्षण और धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार विस्थापन तथा लंबे समय तक बाधित रही परंपराओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे प्रयास सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाते हैं।

कश्मीर के अन्य प्राचीन मंदिरों में भी धार्मिक गतिविधियां

कश्मीर में अन्य ऐतिहासिक मंदिरों में धार्मिक गतिविधियों की बहाली और जीर्णोद्धार के प्रयास भी सामने आए हैं। श्रीनगर के हब्बा कदल स्थित ऐतिहासिक शीतलनाथ मंदिर को भी लंबे अंतराल के बाद दोबारा खोले जाने की जानकारी सामने आई थी। इसी क्षेत्र के प्राचीन रघुनाथ मंदिर में भी वर्षों बाद रामनवमी का आयोजन हुआ।

इसके अलावा, कश्मीर के प्राचीन विचार नाग मंदिर में जीर्णोद्धार के बाद धार्मिक आयोजन किए जाने का उल्लेख है। वहीं, शंकराचार्य मंदिर के कायाकल्प के लिए केंद्र सरकार की ओर से 1.21 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है।

आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा प्रयास

मां गोवशोरी मंदिर में 36 वर्ष बाद हुई पूजा-अर्चना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को सहेजने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। लंबे समय तक वीरान रहे मंदिर में दोबारा अनुष्ठान शुरू होने से स्थानीय हिंदू समुदाय की धार्मिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है।

यह आयोजन इस बात को रेखांकित करता है कि ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण केवल भवनों को दोबारा खड़ा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे जुड़ी परंपराओं, सामुदायिक स्मृतियों और सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का प्रयास भी है।

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