शारदा लिपि में कश्मीरी भाषा की पहली पत्रिका ‘शारदालोक’ का प्रकाशन

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  • Oct 14, 2026
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भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में पहल, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में हुआ लोकार्पण

धर्मशाला। 

भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सप्तसिंधु फाउंडेशन ने शारदा लिपि में कश्मीरी भाषा की पहली पत्रिका ‘शारदालोक’ का प्रकाशन किया है। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के देहरा स्थित सप्तसिंधु परिसर में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतप्रकाश बंसल, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के उपाध्यक्ष एवं सप्तसिंधु फाउंडेशन के निदेशक प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री तथा विश्वविद्यालय के डॉ. आंबेडकर अध्ययन केंद्र के सहायक आचार्य डॉ. किस्मत कुमार ने पत्रिका का लोकार्पण किया।

कश्मीरी भाषा की मूल लिपि को पुनर्जीवित करने की पहल

कश्मीरी भाषा सदियों तक शारदा लिपि में लिखी जाती रही है। समय के साथ इसका प्रयोग कम होता गया और पर्सो-अरेबिक नस्तालिक लिपि का प्रचलन बढ़ा। पत्रिका के प्रकाशन को कश्मीरी भाषा की पारंपरिक लिपि में लेखन को प्रोत्साहित करने और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

‘शारदालोक’ के माध्यम से कश्मीरी भाषा को उसकी पारंपरिक लिपि में लिखने-पढ़ने की परंपरा को मजबूती देने का प्रयास किया गया है। यह पहल शारदा लिपि के संरक्षण के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को सामने लाने का माध्यम भी बन सकती है।

भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का माध्यम बनेगी पत्रिका

पत्रिका के लोकार्पण पर प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा, “भारतीय ज्ञान-परंपरा को समृद्ध बनाने और उसे संरक्षित रखने में शारदा लिपि की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ‘शारदालोक’ भारतीय ज्ञान परंपरा के अनछुए आयामों तक पहुंचने का साधन बनेगी, ऐसी आशा है।”

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतप्रकाश बंसल ने कहा, “‘शारदालोक’ का प्रकाशन शारदा लिपि को जीवंत बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह भारतीय ज्ञान परंपरा को समग्रता से समझने की प्रक्रिया को गति देने की संभावनाएं समेटे हुए है।”

वहीं, डॉ. किस्मत कुमार ने कहा, “लिपियां भाषा और भाव दोनों को गढ़ती हैं। ‘शारदालोक’ निश्चित रूप से भारतीय भाषा और भाव को समृद्ध करने में सहायक होगी।”

संपादकीय टीम में ये नाम शामिल

‘शारदालोक’ के संपादक डॉ. जयप्रकाश सिंह, सह-संपादक संजय पंडिता और कार्यकारी संपादक आदित्य अवस्थी हैं। पत्रिका का प्रकाशन शारदा लिपि में कश्मीरी भाषा के लेखन को प्रोत्साहित करने और भारतीय सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत को संरक्षित रखने की दिशा में एक पहल है।

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