हिंद-प्रशांत में समुद्री ताकत का साझा प्रदर्शन, भारत-कोरिया नौसेनाओं ने किया संयुक्त युद्धाभ्यास

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  • Nov 03, 2026
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बुसान में आईएनएस सह्याद्रि और कोरियाई युद्धपोत मुनमु द ग्रेट ने समुद्री संचालन

हेलीकॉप्टर गतिविधियों और बुसान (दक्षिण कोरिया), 3 नवंबर 2026। युद्धाभ्यास में दिखाया तालमेल

समुद्री सुरक्षा और आपसी सैन्य सहयोग को मिली मजबूती

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सामरिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारतीय नौसेना और कोरिया गणराज्य की नौसेना ने द्विपक्षीय अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न किया। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि ने 29 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित भारत-कोरिया गणराज्य नौसेना द्विपक्षीय अभ्यास (आईएन-आरओकेएन) में हिस्सा लिया। इस अभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं ने संयुक्त समुद्री गतिविधियों के जरिए परिचालन समन्वय, अंतर-संचालन क्षमता और आपसी समझ को मजबूत किया।

पेशेवर संवाद से साझा परिचालन रणनीति तक

अभ्यास के बंदरगाह चरण में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर चर्चाएं हुईं। इसके तहत एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा, परिचालन संबंधी जानकारियों का आदान-प्रदान और विषय विशेषज्ञों के बीच संवाद आयोजित किया गया। इन गतिविधियों से दोनों नौसेनाओं को अपनी परिचालन प्रक्रियाओं, अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर मिला।
सैन्य गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेल आयोजनों ने भी दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच सौहार्द और पारस्परिक संबंधों को मजबूत किया।

समुद्र में आईएनएस सह्याद्रि और मुनमु द ग्रेट का संयुक्त युद्धाभ्यास

बंदरगाह पर हुए पेशेवर संवाद के बाद समुद्री चरण में दोनों नौसेनाओं ने संयुक्त परिचालन गतिविधियों के जरिए अपने तालमेल का प्रदर्शन किया। भारतीय युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि और कोरिया गणराज्य की नौसेना के युद्धपोत आरओकेएस मुनमु द ग्रेट ने समन्वित नौवहन, हेलीकॉप्टर संचालन और संयुक्त समुद्री युद्धाभ्यास में भाग लिया।
इन गतिविधियों से समुद्र में दोनों युद्धपोतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं को समझने और संयुक्त कार्रवाई की क्षमता बढ़ाने में मदद मिली।

हिंद-प्रशांत की शांति और स्थिरता के लिए साझा प्रतिबद्धता

भारत-कोरिया नौसेना अभ्यास का सफल समापन दोनों देशों के बीच निरंतर सैन्य सहभागिता और समुद्री सहयोग को गहरा करने के साझा संकल्प का प्रतीक है। इससे दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी विश्वास मजबूत हुआ है। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए दोनों देशों के संयुक्त प्रयासों को नई मजबूती मिली है।

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