जैसलमेर में सेना के आधुनिकीकरण का रोडमैप तैयार, 2029 तक 3 लाख करोड़ का रक्षा उत्पादन लक्ष्य

  • Admin
  • Nov 03, 2026
  • 5,630 views

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में भविष्य के युद्धों के लिए तकनीक-सक्षम सेना बनाने पर दिया जोर

7.85 लाख करोड़ का रक्षा बजट, पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान

जैसलमेर, 3 नवंबर 2026। बदलती युद्ध रणनीतियों, नई तकनीकों और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय रक्षा बलों को आधुनिक, आत्मनिर्भर और अधिक सक्षम बनाने की तैयारी तेज हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राजस्थान के जैसलमेर में 'भारतीय रक्षा बलों का आधुनिकीकरण' विषय पर रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम तकनीकी रूप से सशक्त सेना के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में तीनों सेनाओं की युद्ध क्षमता, संयुक्त परिचालन, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, अत्याधुनिक तकनीकों और मानव संसाधन विकास सहित आधुनिकीकरण के प्रमुख पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

2029 तक रक्षा उत्पादन 3 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह रक्षा निर्यात वर्ष 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है। सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये किया गया है। इसमें रक्षा बलों के आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह निवेश घरेलू रक्षा उद्योग और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने के साथ सेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने की सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त बजटीय संसाधनों के साथ उनका प्रभावी उपयोग और सशस्त्र बलों की महत्वपूर्ण जरूरतों को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।

भविष्य के युद्धों में एआई, ड्रोन और साइबर तकनीक की अहम भूमिका

बैठक में उभरती और विघटनकारी प्रौद्योगिकियों को रक्षा बलों के आधुनिकीकरण का महत्वपूर्ण आधार माना गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्वायत्त प्रणालियों, मानव रहित प्लेटफॉर्म, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा उन्नत संचार प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया गया। इन तकनीकों के माध्यम से भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीकी प्रगति संघर्षों के स्वरूप को तेजी से बदल रही है। डीआरडीओ उन्नत हथियारों, मिसाइलों और रक्षा प्रणालियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार निजी क्षेत्र को भी समान अवसर उपलब्ध करा रही है, ताकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से लेकर बड़े औद्योगिक समूहों तक की भागीदारी बढ़े। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योग के बढ़ते योगदान को संपूर्ण राष्ट्र की सामूहिक शक्ति का उदाहरण बताया।

तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और समन्वय बढ़ाने पर जोर

बैठक में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, संयुक्त परिचालन योजना और बहु-क्षेत्रीय अभियानों में संसाधनों तथा क्षमताओं के समन्वित उपयोग को प्राथमिकता देने पर चर्चा हुई। अगली पीढ़ी के हथियारों, प्लेटफॉर्म और तकनीकों को तेजी से अपनाकर युद्ध क्षमता तथा परिचालन तैयारियां बढ़ाने की जरूरत रेखांकित की गई।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिकीकरण केवल नए हथियारों और उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य सेना की परिचालन तैयारियों को मजबूत करना, आधुनिक तकनीकों से लैस करना और दीर्घकालिक स्वदेशी क्षमताओं का विकास करना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीकी क्षमता बेहद जरूरी है। मजबूत घरेलू रक्षा तंत्र से विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और देश अपनी सैन्य जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित कर सकेगा।

सेना की नई संरचनाएं बदलते युद्धक्षेत्र के अनुरूप

राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना की ताकत केवल हथियारों और वित्तीय संसाधनों से निर्धारित नहीं होती, बल्कि उसके जवानों की क्षमता, प्रशिक्षण और तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुरूप तीनों सेनाएं अपने संगठनात्मक ढांचे को लगातार आधुनिक बना रही हैं।
उन्होंने भारतीय सेना की असनी, भैरव और शक्तिवन प्लाटून जैसी नई संरचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये समकालीन परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने और युद्धक्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने में प्रभावी साबित हो रही हैं।

स्वदेशी अनुसंधान और रक्षा उद्योग के बीच बढ़ेगा तालमेल

बैठक में स्वदेशी अनुसंधान, डिजाइन, विकास और विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए रक्षा उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। सशस्त्र बलों, डीआरडीओ, रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई, ताकि अनुसंधान एवं नवाचार को सीधे सैन्य उपयोग की क्षमताओं में बदला जा सके।
इसके साथ ही आधुनिकीकरण की योजनाओं को समयबद्ध और परिणामोन्मुख बनाने के लिए स्पष्ट प्राथमिकताएं, प्रभावी संस्थागत व्यवस्था और लक्ष्य निर्धारित करने पर विचार किया गया। संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने तथा निवेश का प्रत्यक्ष लाभ सेना की परिचालन क्षमता में दिखाई देने पर जोर दिया गया।

सांसदों के सुझावों से तैयार होगा आधुनिकीकरण का रोडमैप

बैठक में राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों ने रक्षा बलों के आधुनिकीकरण को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उनके विचारों से रक्षा क्षेत्र से जुड़े रणनीतिक, विधायी और राष्ट्रीय महत्व के पहलुओं पर चर्चा को विस्तार मिला। विचार-विमर्श के आधार पर प्रमुख सैन्य क्षमताओं को प्राथमिकता देने, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने, रक्षा खरीद और विकास प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करने का रोडमैप तैयार किया गया।
बैठक में इस बात पर सहमति जताई गई कि आधुनिकीकरण के लिए व्यवस्थित और चरणबद्ध रणनीति जरूरी है, ताकि भारतीय सेना पारंपरिक, उप-पारंपरिक और बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी मुकाबला कर सके। रक्षा मंत्री ने अनुसंधान एवं विकास, स्वदेशी तकनीक, औद्योगिक भागीदारी और नवाचार को लगातार बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण एक सतत प्रक्रिया है और बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप सेना की तैयारियों को निरंतर बेहतर बनाना होगा। बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार, सचिव (भूतपूर्व सैनिक कल्याण) सुकृति लिखी, सचिव (रक्षा वित्त) विश्वजीत सहाय सहित रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सम्बन्धित खबरें