आपदा के समय साथ आएंगी भारत-अमेरिका की सेनाएं, विशाखापत्तनम में ‘टाइगर ट्रायम्फ-2026’ शुरू

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  • Nov 03, 2026
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द्विपक्षीय त्रि-सेवा अभ्यास का पांचवां संस्करण

पहली बार एनडीआरएफ भी होगा शामिल

थलसेना, नौसेना और वायुसेना के साथ अमेरिकी मरीन कोर व अंतरिक्ष-साइबर विशेषज्ञ भी ले रहे हिस्सा

विशाखापत्तनम, 3 नवंबर। प्राकृतिक आपदाओं और बड़े मानवीय संकटों के दौरान राहत एवं बचाव अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारत और अमेरिका की सेनाओं ने संयुक्त तैयारी शुरू कर दी है। दोनों देशों के द्विपक्षीय त्रि-सेवा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) अभ्यास 'टाइगर ट्रायम्फ-2026' के पांचवें संस्करण का उद्घाटन 2 नवंबर को विशाखापत्तनम स्थित मैरीटाइम वारफेयर सेंटर में हुआ। इस अभ्यास का उद्देश्य बड़े आपदा राहत अभियानों के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, संयुक्त योजना और परिचालन समन्वय विकसित करना है।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल विशाल बिश्नोई और अमेरिकी प्रशांत बेड़े के वाइस कमांडर रियर एडमिरल जोकिन जे. मार्टिनेज डी पिनिलोस ने की।

वास्तविक आपदा परिस्थितियों से निपटने की होगी तैयारी

इस वर्ष 'टाइगर ट्रायम्फ' का आयोजन चर्चा आधारित टेबलटॉप एक्सरसाइज (टीटीएक्स) के रूप में किया जा रहा है। इसमें व्यापक स्तर पर मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों की परिस्थितियों पर विचार-विमर्श करते हुए संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी। इसका प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के सशस्त्र बलों की अंतर-संचालन क्षमता बढ़ाना और बहु-क्षेत्रीय अभियानों को प्रभावी ढंग से संचालित करने की तैयारी करना है।
अभ्यास के माध्यम से आपदा के समय राहत सामग्री पहुंचाने, बचाव अभियान चलाने और विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय स्थापित करने जैसी चुनौतियों से निपटने की साझा कार्यप्रणाली विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

पहली बार एनडीआरएफ की भागीदारी

भारतीय पक्ष की ओर से नौसेना के समुद्री अभियानों के विशेषज्ञ, थलसेना और वायुसेना की विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधि तथा तीनों सेनाओं के विशेष बलों के जवान अभ्यास में भाग ले रहे हैं। इस पांचवें संस्करण की खास बात यह है कि पहली बार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) का दल भी इसमें शामिल हुआ है। इससे सैन्य बलों और विशेष आपदा राहत एजेंसी के बीच समन्वय को मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
अमेरिकी संयुक्त बल में वहां की वायुसेना, थलसेना, मरीन कोर और नौसेना के विशेषज्ञ प्रतिनिधि शामिल हैं। इनके अलावा अंतरिक्ष, साइबर मामलों, चिकित्सा और बम निरोधक अभियानों के विशेषज्ञ भी अभ्यास का हिस्सा हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा साझेदारी को मिलेगी मजबूती

'टाइगर ट्रायम्फ-2026' भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक समुद्री सहयोग तथा मजबूत होती रक्षा साझेदारी का भी परिचायक है। दोनों देश संयुक्त बहु-क्षेत्रीय अभियानों की क्षमता बढ़ाने और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत के दौरान प्रभावी समन्वय स्थापित करने पर जोर दे रहे हैं। इस अभ्यास से दोनों सेनाओं के बीच आपसी समझ और विश्वास बढ़ने के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपदा प्रबंधन तथा क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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