विविधता में एकता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति : राज्यपाल पटेल

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  • Nov 03, 2026
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लोकभवन में पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ सहित आठ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का संयुक्त स्थापना दिवस समारोह

 

 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की झलक

भोपाल, 3 नवंबर। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्थापना दिवस का आयोजन भारत की विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ संकल्पना के तहत शुरू की गई यह पहल देश की अलग-अलग संस्कृतियों को जानने, समझने और उन पर गर्व करने का अवसर देती है। यह आयोजन भारतीय संघीय व्यवस्था, सांस्कृतिक वैभव और राष्ट्रीय अखंडता के गौरव को भी साकार करता है। राज्यपाल मंगलवार को लोकभवन में मध्यप्रदेश सहित पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संयुक्त स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का साझा उत्सव

राज्यपाल ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नागरिकों को स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से संबंधित राज्यों की लोककला और संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलता है। इन प्रस्तुतियों में समृद्ध भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई देती है। उन्होंने कलाकारों और प्रतिभागियों की सराहना करते हुए उन्हें ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। समारोह लोकभवन के सांदीपनि सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे।

मध्यप्रदेश सत्कार, सद्भाव और अपनेपन की भूमि

राज्यपाल ने कहा कि भारत विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है, जहां अनेक भाषाओं, वेशभूषाओं, परंपराओं, लोककलाओं और जीवन मूल्यों का संगम देखने को मिलता है। मध्यप्रदेश की धरती ने हमेशा अतिथि सत्कार, सद्भाव और अपनत्व की परंपरा निभाई है। यहां रहने वाले दूसरे प्रदेशों के नागरिक भी हमारे परिवार का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब की उपजाऊ भूमि, कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा, उद्यमशीलता और समृद्ध मानव संसाधन देश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार हैं। हरियाणा के परिश्रमी, अनुशासित और प्रतिभाशाली नागरिक खाद्य सुरक्षा, खेल उत्कृष्टता, विनिर्माण और सैन्य योगदान से देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत, ऊर्जा क्षमता, खनिज, वन और जल संपदा आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वहीं, चंडीगढ़ की आधुनिक नगर योजना, स्वच्छता, हरित क्षेत्र और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संस्थान सुशासन की संस्कृति को नई दिशा दे रहे हैं।

हर प्रदेश की विशेषता से आगे बढ़ रहा भारत

राज्यपाल ने कहा कि भारत का विकास विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं और क्षमताओं के समन्वय से आगे बढ़ रहा है। दिल्ली देश की राजधानी के रूप में नीतिगत दिशा और आर्थिक गतिविधियों के साथ राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है। जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक संपदा, कृषि, बागवानी, पर्यटन और हस्तशिल्प देश की अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक-सांस्कृतिक समरसता को समृद्ध बनाते हैं। लद्दाख की सामरिक भौगोलिक स्थिति, सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं, प्राकृतिक संसाधन और विशिष्ट जैव विविधता सतत एवं समावेशी विकास का संदेश देती हैं।

युवा दूसरे प्रदेशों की कला और इतिहास को जानें

राज्यपाल ने युवाओं से आपसी संवाद बढ़ाने और विभिन्न प्रदेशों की कला, संस्कृति, भाषा तथा इतिहास को जानने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी नागरिक भारत को विकसित और विश्वगुरु बनाने में योगदान दें तथा एक-दूसरे की सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करें। भावी पीढ़ी को देश की विविधता की शक्ति से परिचित कराना जरूरी है। युवा मिलकर नवाचार और सेवा के कार्य करें।
उन्होंने उपस्थितजनों को संकल्प दिलाया कि देश के उपलब्ध संसाधनों, प्रतिभाओं और क्षमताओं का समुचित उपयोग कर विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। सभी प्रदेश मिलकर देश के सांस्कृतिक, प्राकृतिक, पारंपरिक और आधुनिक विकास में सक्रिय योगदान देंगे तथा आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित भारत का सपना साकार करेंगे।

गुरुवाणी, गिद्धा और छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत ने बांधा समां

समारोह के प्रारंभ में भोपाल पंजाबी समाज के प्रतिनिधि जे.पी.एस. अरोणा, हरियाणवी समाज के प्रतिनिधि ओमप्रकाश खुराना तथा छत्तीसगढ़ राज्य सांस्कृतिक परिषद के प्रतिनिधि राजेश कुमार कर्ष और सदस्यों ने राज्यपाल का पुष्पगुच्छ, शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के परिचय पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में पंजाब की ओर से गुरुवाणी, बन्ना-बन्नी लोकगीत और गिद्धा नृत्य प्रस्तुत किए गए। हरियाणा की लोकसंस्कृति पर आधारित नृत्य ने दर्शकों का मन मोहा, जबकि छत्तीसगढ़ की ओर से छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत और शक्ति उपासना पर केंद्रित प्रस्तुति दी गई। अंत में मध्यप्रदेश के विकास और वैभव पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई।
कार्यक्रम का आभार भोपाल पंजाबी समाज के प्रतिनिधि जे.पी.एस. अरोणा ने व्यक्त किया। संचालन लोकभवन नियंत्रक हाउसहोल्ड शिल्पी दिवाकर ने किया। इस अवसर पर राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मध्यप्रदेश में निवासरत नागरिक तथा लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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