कुरेसर घाट पर तीन लोगों को बचाने के प्रयास में स्वयंसेवक सुरेश केशरवानी की मौत, दो की बचाई जान

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  • Oct 21, 2026
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स्नान के दौरान तीन लोगों को डूबता देख तेज धारा में लगा दी छलांग; मंगलवार दोपहर मिला शव, परिजनों ने समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण को किया याद

प्रयागराज। 

गंगापार क्षेत्र के कौड़िहार स्थित कुरेसर घाट पर एक व्यक्ति ने दूसरों की जान बचाने के प्रयास में अपनी जान गंवा दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक एवं खंड शारीरिक शिक्षण प्रमुख सुरेश केशरवानी ने गंगा में डूब रहे तीन लोगों को बचाने के लिए तेज धारा में छलांग लगा दी। उन्होंने दो लोगों को सुरक्षित बचा लिया, लेकिन तीसरे व्यक्ति को बचाने के प्रयास में उनकी जान चली गई। उनका यह साहसिक प्रयास मानवता और परोपकार की भावना का उदाहरण बन गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सोमवार सुबह कुरेसर घाट पर एक परिवार स्नान कर रहा था। इसी दौरान परिवार के राम सिंह यादव डूबने लगे। उन्हें बचाने के लिए उनके छोटे भाई नितेश और पत्नी अनीता भी पानी में उतर गए। देखते ही देखते तीनों डूबने लगे और घाट पर चीख-पुकार मच गई। इसी बीच वहां मौजूद सुरेश केशरवानी ने बिना देर किए तेज धारा में छलांग लगा दी।

सुरेश ने प्रयास कर दो लोगों को बचा लिया, लेकिन महिला को बचाने के दौरान वह स्वयं पानी में लापता हो गए। सूचना मिलने पर प्रशासन और जल पुलिस की टीम ने तलाश अभियान शुरू किया। सोमवार देर रात तक महिला और सुरेश केशरवानी की तलाश जारी रही। मंगलवार दोपहर संघ स्वयंसेवक सुरेश का शव बरामद हुआ।

बताया गया कि सुरेश केशरवानी प्रतिदिन की तरह शाखा में शामिल होने के बाद स्नान के लिए कुरेसर घाट पहुंचे थे। जिन लोगों को बचाने के लिए उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाली, उनसे उनका कोई परिचय या पारिवारिक संबंध नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने संकट में फंसे लोगों की मदद करने में संकोच नहीं किया।

‘न कोई पहचान, न कोई रिश्ता, अजनबियों के लिए बने फरिश्ता’

सुरेश के इस प्रयास ने घाट पर मौजूद लोगों और स्थानीय समुदाय को भावुक कर दिया। दो लोगों की जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी सुरक्षा की परवाह नहीं की। गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई’ की भावना उनके इस कार्य में दिखाई देती है।

परिजनों के अनुसार, सुरेश के जीवन में संघ कार्य और समाजसेवा को विशेष स्थान प्राप्त था। वह अक्सर कहते थे कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता हैं और उनका जीवन समाज के लिए समर्पित है। उनका मानना था कि देश और समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है, इसलिए हमें भी समाज को कुछ लौटाना सीखना चाहिए।

परिजनों ने भावुक होकर कहा कि किसी को अंदाजा नहीं था कि समाज के लिए कुछ करने की बात कहने वाले सुरेश इतनी जल्दी अपना सर्वस्व अर्पित कर देंगे। दूसरों की जान बचाने के उनके प्रयास ने उनके विचारों को कर्म में बदल दिया और उन्हें मानवता के प्रति समर्पण की मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।

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