चित्रकूट में अंतरराष्ट्रीय श्री रामलीला उत्सव का शुभारंभ, थाई कलाकारों ने दिखाई राम जन्म और बाल लीला

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  • Oct 14, 2026
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19 अक्टूबर तक चलेगा सात दिवसीय महोत्सव, रूस, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कलाकार भी प्रस्तुत करेंगे रामायण के प्रमुख प्रसंग

चित्रकूट। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और श्री राम वन गमन पथ न्यास की ओर से मंगलवार को राघव प्रयाग घाट पर अंतरराष्ट्रीय श्री रामलीला उत्सव का शुभारंभ किया गया। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। 19 अक्टूबर तक चलने वाले इस सात दिवसीय आयोजन में भारत सहित विभिन्न देशों की रामलीला और पारंपरिक कला शैलियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन-चरित्र, आदर्शों और रामकथा की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का मंचन किया जाएगा।

थाईलैंड के कलाकारों ने खोन नृत्य शैली में प्रस्तुत की रामकथा

उत्सव के पहले दिन थाईलैंड के ‘श्री रामाकेन दल’ ने यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल पारंपरिक खोन नृत्य शैली के माध्यम से श्रीराम जन्म और बाल लीला का मंचन किया। प्रस्तुति में श्रीराम जन्म, विश्वामित्र का आगमन, ताड़का वध और अहिल्या उद्धार जैसे प्रसंगों को दर्शाया गया।

थाईलैंड की पारंपरिक खोन नृत्य-नाटिका प्रस्तुति का प्रमुख आकर्षण रही। थाईलैंड की रामायण ‘रामाकियन’ और भारतीय रामकथा की सांस्कृतिक झलक ने दर्शकों को रामायण की विविध परंपराओं से परिचित कराया। कलाकारों ने स्वर्ण मृग प्रसंग, सीता हरण और भगवान श्रीराम-रावण युद्ध जैसे प्रसंगों का भी मंचन किया।

भगवान श्रीराम की तपोभूमि है चित्रकूट

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गणेश सिंह ने कहा कि चित्रकूट भगवान श्रीराम की तपोभूमि है। जीवन का वास्तविक दर्शन देखना हो तो भगवान श्रीराम की लीला में देखा जा सकता है।

दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि श्रीराम का जीवन आदर्श, मर्यादा और कर्तव्य का संदेश देता है। उन्होंने चित्रकूट की महत्ता बताते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के साढ़े ग्यारह वर्ष इस पुण्यभूमि में बिताए थे।

रूस, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कलाकार भी देंगे प्रस्तुतियां

उत्सव में रूस की राजधानी मॉस्को से आए ‘दिशा रामलीला’ दल के साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कलाकार भी अपनी पारंपरिक मंचन शैलियों में रामायण के प्रमुख प्रसंग प्रस्तुत करेंगे।

मॉस्को का ‘दिशा रामलीला’ दल रावण वध और श्रीरामराज्य जैसे प्रसंगों का मंचन करेगा। आंध्र प्रदेश के कलाकार यक्षगान शैली में सीता स्वयंवर और तेलंगाना के कलाकार चंडू भागवतम् शैली में सीता हरण का प्रसंग प्रस्तुत करेंगे।

विभिन्न देशों की रामकथा परंपराएं एक मंच पर

संस्कृति विभाग की इस पहल का उद्देश्य विभिन्न देशों में प्रचलित रामायण परंपराओं के माध्यम से दर्शकों को रामकथा के वैश्विक स्वरूप से परिचित कराना है। थाईलैंड की रामकथा परंपरा में भगवान श्रीराम के चरित्र की विशिष्ट सांस्कृतिक अभिव्यक्ति देखने को मिलेगी। प्रस्तुतियों के भाव और प्रसंग दर्शकों तक पहुंचाने के लिए अनुवादक की व्यवस्था भी की जाएगी।

मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, श्री राम वन गमन पथ न्यास और वीर भारत न्यास के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव की प्रस्तुतियां प्रतिदिन शाम 6:30 बजे से होंगी। आयोजन विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन की देखरेख में किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय श्री रामलीला उत्सव के माध्यम से चित्रकूट में विभिन्न देशों और भारतीय क्षेत्रों की रामकथा परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ भगवान श्रीराम के आदर्शों और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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