बांधवगढ़ के जंगलों में लौट रही वन्यजीवों की रौनक, हाथी-गौर से लेकर गिद्ध और बारहसिंगा तक बढ़ा कुनबा संरक्षण और पुनर्स्थापन के प्रयासों से समृद्ध हो रही जैव विविधता, वन्यजीवों को मिल रहे अनुकूल प्राकृतिक आवास

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  • Nov 04, 2026
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भोपाल, 4 नवंबर 2026।

 शरद ऋतु के आगमन और दीपावली के त्योहार के बीच बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों में भी वन्यजीवों की चहल-पहल बढ़ रही है। हाथी, गौर, गिद्ध और बारहसिंगा के संरक्षण, पुनर्स्थापन तथा नए प्राकृतिक आवासों में उनके अनुकूलन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी से बांधवगढ़ की जैव विविधता समृद्ध होने के साथ ही पारिस्थितिक संतुलन को भी मजबूती मिल रही है।

कभी इस क्षेत्र से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुके वन्यजीवों का दोबारा प्राकृतिक वातावरण में फलना-फूलना वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस दीपावली बांधवगढ़ के जंगलों से प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी मिल रहा है कि वन्यजीवों को सुरक्षित आश्रय और अनुकूल वातावरण मिलने पर जंगलों में जीवन लौटता है, नई पीढ़ियां पनपती हैं और प्रकृति फिर से खुशहाल होती है।

गौर की मौजूदगी से समृद्ध हो रही वन पारिस्थितिकी

बांधवगढ़ के जंगलों में विलुप्तप्राय गौर को वन्यजीव संरक्षण और पुनर्स्थापन के लगातार प्रयासों से फिर से बसाया गया है। इनकी बढ़ती मौजूदगी वन पारिस्थितिकी और जैव विविधता को समृद्ध कर रही है।

वर्ष 2018 में आए हाथियों ने बनाया स्थायी आवास

वर्ष 2018 में बांधवगढ़ पहुंचे हाथियों ने धीरे-धीरे यहां के जंगलों को अपना नया आवास बना लिया। समय के साथ स्थानीय वातावरण के अनुकूल ढलते हुए हाथी आज बांधवगढ़ के वन्यजीव संसार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।

सुरक्षित चट्टानों और जंगलों में गिद्धों को मिला आश्रय

प्रकृति के सफाईकर्मी कहे जाने वाले गिद्धों को बांधवगढ़ की सुरक्षित चट्टानों और जंगलों में अनुकूल आश्रय मिला है। पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ और संतुलित बनाए रखने में गिद्धों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सुरक्षित आवास और संरक्षण के प्रयास इनके अस्तित्व को बनाए रखने में सहायक साबित हो रहे हैं।

कान्हा से लाकर बारहसिंगा के पुनर्स्थापन की पहल

बांधवगढ़ में बारहसिंगा के पुनर्स्थापन के लिए भी महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत कान्हा टाइगर रिजर्व से बारहसिंगा लाकर सुरक्षित बाड़े में रखा गया है। यहां उन्हें नए वातावरण के अनुकूल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल भविष्य में बारहसिंगा के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

संरक्षण से बढ़ रहीं प्रकृति पर्यटन की संभावनाएं

हाथी, गौर, गिद्ध और बारहसिंगा से जुड़ी ये पहल बताती हैं कि निरंतर संरक्षण प्रयासों और सुरक्षित आवासों के माध्यम से वन्यजीवों को नया जीवन और नई संभावनाएं मिल सकती हैं। इनकी बढ़ती मौजूदगी से बांधवगढ़ की प्राकृतिक समृद्धि में इजाफा हो रहा है। साथ ही क्षेत्र में प्रकृति पर्यटन की संभावनाओं को भी नई दिशा मिल रही है।

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