देवउठनी ग्यारस पर बाल विवाह रोकने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान, 24 घंटे निगरानी करेंगे कंट्रोल रूम 20 नवंबर को सामूहिक विवाह आयोजनों पर रहेगी विशेष नजर; गांवों और वार्डों में सूचना दल, विवाह स्थलों पर उड़न दस्तों की तैनाती

  • Admin
  • Nov 04, 2026
  • 2,325 views

भोपाल, 4 नवंबर 2026। 

देवउठनी ग्यारस पर प्रदेश में होने वाले सामूहिक विवाह आयोजनों को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाएगा। आगामी 20 नवंबर 2026 को देवउठनी ग्यारस के अवसर पर बड़ी संख्या में विवाह आयोजन होने की संभावना को देखते हुए सभी जिलों को सतर्कता बरतने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जीवी रश्मि ने बताया कि अभियान के तहत ग्राम और वार्ड स्तर पर सूचना दल गठित किए जाएंगे। वहीं, जिला और ब्लॉक स्तर पर 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। बाल विवाह की आशंका वाले आयोजनों पर नजर रखने के लिए उड़न दस्ते भी तैनात रहेंगे।

भारत सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं को शून्य करने के उद्देश्य से जनजागरूकता और निगरानी गतिविधियां तेज की जाएंगी। विशेष रूप से बाल विवाह की दृष्टि से संवेदनशील जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अभियान संचालित होगा।

पंचायतों में बाल विवाह नहीं होने देने की लेंगे शपथ

20 नवंबर को सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में पंच, सरपंच, पंचायत सचिव, अध्यक्ष और पार्षद बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ लेंगे। शपथ पत्र पंचायत और वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे।

विवाह मुहूर्त से कम से कम एक सप्ताह पहले स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी। शासकीय स्कूलों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा शिकायत के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन की जानकारी दी जाएगी। स्वसहायता समूहों की महिलाएं गांवों में सामूहिक चर्चा कर परिवारों को बाल विवाह नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगी।

संवेदनशील परिवारों की पहचान कर दी जाएगी समझाइश

बाल विवाह की आशंका वाले परिवारों की पहचान के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम कोटवारों और पंचायत सचिवों की मदद से 18 वर्ष से कम आयु की अविवाहित किशोरियों की जानकारी संकलित की जाएगी। यह जानकारी जिला पुलिस अधीक्षकों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएगी।

संबंधित परिवारों को बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों और इसके दुष्परिणामों की जानकारी देकर समझाइश दी जाएगी। संभावित बाल विवाह को रोकने के लिए ऐसे परिवारों पर विशेष निगरानी भी रखी जाएगी।

सूचना दल और उड़न दस्ते करेंगे विवाह स्थलों का निरीक्षण

प्रत्येक ग्राम और वार्ड में शिक्षकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वसहायता समूहों, शौर्य दल, पंचायत प्रतिनिधियों और सक्रिय नागरिकों को शामिल कर सूचना दल बनाए जाएंगे। ये दल विवाह आयोजनों की जानकारी रखेंगे और बाल विवाह की आशंका होने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करेंगे।

जिला और ब्लॉक स्तर पर स्थापित कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे। बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के नेतृत्व में गठित उड़न दस्ते सामूहिक विवाह स्थलों का निरीक्षण करेंगे। यदि कहीं बाल विवाह का मामला सामने आता है तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

बाल विवाह रोकने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है। विभाग ने 6 अक्टूबर 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रशिक्षित अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में उपयोग करते हुए जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

इन कार्यशालाओं में राजस्व, पुलिस, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा, ताकि बाल विवाह की सूचना मिलने पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

हेल्पलाइन 181, 1098 और 112 पर दे सकते हैं सूचना

बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप समूहों और दीवार लेखन के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। विवाह आयोजनों से जुड़े धर्मगुरुओं, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग भी लिया जाएगा।

आम नागरिक बाल विवाह की सूचना महिला हेल्पलाइन 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन सेवा 112 या स्थानीय कंट्रोल रूम में दे सकते हैं। इसके अलावा बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

विभाग ने सभी जिलों को अभियान के तहत आयोजित जनजागरूकता गतिविधियों और रोके गए बाल विवाह के मामलों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही देवउठनी ग्यारस के अवसर पर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करना होगा।

सम्बन्धित खबरें