सेवा की कहानी : डबरी से सिंचाई को मिला सहारा, मछली पालन बना अतिरिक्त

  • Admin
  • Sep 23, 2026
  • 2,434 views

डबरी बनी खेती और मछली पालन का सहारा, उमेश प्रसाद की जमीन पर जल संरक्षण से आय के दो रास्ते खुले

रायपुर, 23 सितंबर 2026। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बकिरमा निवासी उमेश प्रसाद गुप्ता के लिए उनकी निजी भूमि पर बनी डबरी अब सिर्फ जल संरक्षण का साधन नहीं, बल्कि खेती और अतिरिक्त आजीविका का आधार बन गई है। पहले सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने से खेती प्रभावित होती थी, लेकिन ग्रामीण रोजगार योजना के तहत डबरी निर्माण के बाद खेत में पानी की उपलब्धता बढ़ी है। इसी जल संरचना में मत्स्य विभाग से मिले मत्स्य बीज डालकर उमेश ने मछली पालन भी शुरू कर दिया है। अब उन्हें मछलियों के विक्रय से अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद है।

तीन लाख रुपये की स्वीकृति से तैयार हुई डबरी

सेवा संकल्प अभियान के तहत चल रही ‘सेवा की कहानी’ में जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आजीविका में आ रहे बदलाव सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में उमेश प्रसाद गुप्ता की कहानी सामने आई है।

उमेश बताते हैं कि उनकी भूमि पर सिंचाई के लिए पर्याप्त जल स्रोत उपलब्ध नहीं था। इसके कारण खेती के काम प्रभावित होते थे और पानी की व्यवस्था करना चुनौती बनी रहती थी। ग्रामीण रोजगार योजना के तहत उनकी निजी भूमि पर डबरी निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। निर्माण पूरा होने के बाद खेत के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी और सिंचाई का एक उपयोगी साधन तैयार हो गया।

सिंचाई के साथ शुरू किया मछली पालन

डबरी का उपयोग केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं रहा। मत्स्य विभाग की ओर से उमेश को मछली पालन के लिए मत्स्य बीज उपलब्ध कराया गया। उन्होंने डबरी में मत्स्य बीज डालकर मछली पालन की शुरुआत की है।

अब मछलियों के तैयार होने के बाद उनके विक्रय से अतिरिक्त आय प्राप्त होने की उम्मीद है। इस तरह एक ही जल संरचना से उन्हें खेती के लिए सिंचाई की सुविधा के साथ मछली पालन के रूप में आय का एक अतिरिक्त माध्यम भी मिला है।

‘पहले सिंचाई का साधन नहीं था, अब आगे बढ़ने की उम्मीद’

योजना से मिले लाभ पर खुशी जाहिर करते हुए उमेश प्रसाद गुप्ता कहते हैं, “पहले मेरे पास सिंचाई का साधन नहीं था। अब डबरी बन गई है और मछली पालन के लिए मत्स्य बीज भी मिला है। मछली पालन से आने वाले समय में लाभ मिलेगा और इससे परिवार को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।”

उन्होंने योजनाओं का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

जल संरक्षण से आजीविका तक पहुंचा लाभ

डबरी जैसी जल संरचनाएं वर्षा जल के संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा बढ़ाने में उपयोगी साबित हो रही हैं। वहीं, इन्हीं जल संरचनाओं में मछली पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ने से ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

उमेश प्रसाद गुप्ता की कहानी जल संरक्षण को खेती और आजीविका से जोड़ने की पहल का उदाहरण है, जहां एक ही संसाधन का उपयोग कर सिंचाई की सुविधा और अतिरिक्त आय का अवसर तैयार हुआ है। इससे उपलब्ध जल संसाधन के बेहतर उपयोग के साथ परिवार की आजीविका को मजबूत करने की उम्मीद बढ़ी है।

सम्बन्धित खबरें