डायल-112 से क्राइम सीन और वैज्ञानिक साक्ष्य तक—न्याय की पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन

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  • Oct 06, 2026
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भेल दशहरा मैदान में 14 विशेष जोन में डायल-112 से क्राइम सीन, वैज्ञानिक साक्ष्य और न्यायालय तक की पूरी प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन; रोज चार बार नाट्य मंचन से आमजन को समझाई जा रही आधुनिक पुलिसिंग

भोपाल, 6 अक्टूबर 2026। अपराध की सूचना मिलते ही पुलिस कैसे सक्रिय होती है, घटनास्थल को कैसे सुरक्षित किया जाता है, वैज्ञानिक साक्ष्य किस तरह जुटाए जाते हैं और फॉरेंसिक जांच से होते हुए मामला अभियोजन और न्यायालय तक कैसे पहुंचता है—नए न्याय तंत्र की यह पूरी प्रक्रिया इन दिनों भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आमजन के सामने सजीव रूप में दिखाई जा रही है। 3 अक्टूबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा शुरू की गई नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश पुलिस आधुनिक पुलिसिंग और न्याय व्यवस्था को सरल और सहज तरीके से समझा रही है।

प्रदर्शनी में अपराध की सूचना मिलने से लेकर पुलिस रिस्पॉन्स, घटनास्थल की जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, फॉरेंसिक जांच, अभियोजन और न्यायालयीन प्रक्रिया तक की पूरी यात्रा को 14 विशेष जोन में मॉडल, डिजिटल तकनीक, वीडियो और सजीव नाट्य मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है। पुलिस अधिकारी और कर्मचारी नागरिकों, विद्यार्थियों तथा अन्य आगंतुकों को इस पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली की जानकारी दे रहे हैं।

चार बार रोज सजीव मंचन, 7 अक्टूबर तक प्रदर्शनी

पांच दिवसीय यह प्रदर्शनी 7 अक्टूबर तक चलेगी। प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे, दोपहर 1 बजे, 3:30 बजे और शाम 5 बजे स्थानीय रंगकर्मियों, पुलिस अधिकारियों, चिकित्सकों और अभियोजन अधिकारियों द्वारा सजीव नाट्य मंचन किया जा रहा है।

मंचन के माध्यम से बताया जा रहा है कि किसी घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस किस तरह कार्रवाई शुरू करती है और जांच के विभिन्न चरणों से गुजरते हुए मामला न्यायालय तक कैसे पहुंचता है।

डायल-112: एक कॉल से घटनास्थल तक पुलिस की पूरी कवायद

प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 व्यवस्था प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। आपातकालीन कॉल प्राप्त होने से लेकर पुलिस टीम के घटनास्थल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को लाइव डेमो के जरिए प्रदर्शित किया जा रहा है।

कंपनी प्रतिनिधि कॉल टेकर की भूमिका निभाकर आपातकालीन कॉल प्राप्त करने, कॉलर से आवश्यक जानकारी लेने और घटना का विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया दिखा रहे हैं। इसके बाद पुलिस कर्मचारी डिस्पैचर की भूमिका में सूचना का विश्लेषण कर संबंधित पुलिस टीम को घटनास्थल के लिए रवाना करने की प्रक्रिया समझा रहे हैं।

डायल-112 पर सूचना की रिसीविंग, सूचना संकलन, डिस्पैच, पुलिस रिस्पॉन्स और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी किस तरह एक समन्वित व्यवस्था के तहत होती है, यह भी प्रदर्शित किया जा रहा है। प्रदेश से लेकर संभागीय और जिला स्तर तक 1,200 एफआरवी वाहनों की गतिविधियों की निगरानी और समीक्षा की व्यवस्था को भी प्रदर्शनी में दिखाया गया है।

आधुनिक संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स तथा विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय को भी सरल भाषा में समझाया जा रहा है।

3डी क्राइम सीन से खुलेगा वैज्ञानिक जांच का पूरा तरीका

प्रदर्शनी के एक महत्वपूर्ण हिस्से में 3डी क्राइम सीन मॉडल के माध्यम से गंभीर अपराध के घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच को सजीव रूप में दिखाया जा रहा है।

नाट्य मंचन में ग्रामीण परिवेश में एक झोपड़ी के सामने का घटनास्थल दिखाया गया है, जहां गोली चलने और चाकू से हमला किए जाने की सूचना मिलती है। घटनास्थल पर चाकू, बोतल, बटन, कारतूस का खोखा और रक्त के संभावित निशान जैसे साक्ष्य प्रदर्शित किए गए हैं।

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस सबसे पहले घटनास्थल को सुरक्षित करती है और साक्ष्यों के संरक्षण पर ध्यान देती है। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार एफएसएल टीम, फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ और डॉग स्क्वाड की सहायता लेकर वैज्ञानिक जांच आगे बढ़ाने की प्रक्रिया रोल-प्ले के माध्यम से समझाई जा रही है।

घटनास्थल की स्केल फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी, संभावित फिंगरप्रिंट और जैविक साक्ष्यों की जांच, कारतूस के खोखे के आधार पर आसपास के क्षेत्र की व्यवस्थित तलाशी तथा अन्य भौतिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन की प्रक्रिया भी सरल भाषा में बताई जा रही है।

जीएसआर परीक्षण से प्रयोगशाला तक पहुंचेगा साक्ष्य

घटना की परिस्थितियों के अनुसार यदि किसी संदिग्ध की पहचान होती है, तो मोबाइल फॉरेंसिक वैन में उपलब्ध जीएसआर परीक्षण किट से प्राथमिक परीक्षण की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की जा रही है।

प्राथमिक परीक्षण का परिणाम मिलने के बाद अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष के लिए आवश्यक नमूनों को कन्फर्मेटरी परीक्षण के लिए राज्य न्यायालय विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।

इसी तरह फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ संभावित फिंगरप्रिंट विकसित करने, उन्हें लिफ्ट करने और नियमानुसार सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित कर रहे हैं।

साइबर ठगी में ‘गोल्डन ऑवर’ सबसे अहम

प्रदर्शनी में साइबर अपराधों से बचाव और ठगी होने की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी भी दी जा रही है। नागरिकों को बताया जा रहा है कि साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

साइबर ठगी के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ का विशेष महत्व बताया जा रहा है। घटना की सूचना जितनी जल्दी मिलेगी, ठगी की रकम को ट्रैक करने और उपलब्ध प्रक्रिया के माध्यम से उसे फ्रीज कराने के प्रयास उतने ही प्रभावी हो सकते हैं।

प्रदर्शनी में ₹25,000 से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में ई-जीरो एफआईआर, ऑनलाइन जॉब स्कैम, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे मामलों से सावधान रहने की जानकारी दी जा रही है।

म्यूल अकाउंट से डिजिटल अरेस्ट तक, हर ठगी पर चेतावनी

नागरिकों को म्यूल अकाउंट के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देना अथवा अनजान लोगों से खाते में राशि लेकर उसे नकद देना साइबर अपराध में संलिप्तता का कारण बन सकता है।

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली ठगी के प्रति भी लोगों को सचेत किया जा रहा है। प्रदर्शनी में स्पष्ट किया जा रहा है कि पुलिस में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। किसी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या धनराशि की मांग पर घबराने के बजाय तत्काल संबंधित माध्यम से शिकायत करने की सलाह दी जा रही है।

आज वैज्ञानिक अनुसंधान का सजीव प्रदर्शन

6 अक्टूबर को प्रदर्शनी में वैज्ञानिक अनुसंधान चरण का विशेष नाट्य मंचन किया जाएगा। इसमें घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों को वैज्ञानिक जांच के लिए आगे बढ़ाने की प्रक्रिया दिखाई जाएगी।

इस दौरान एफएसएल विशेषज्ञ, फॉरेंसिक विशेषज्ञ तथा डॉक्टर और मेडिकल टीम की भूमिका के माध्यम से जांच के इस महत्वपूर्ण चरण को समझाया जाएगा।

‘ऑपरेशन मुस्कान’ में गुम बच्चों की तलाश से घर वापसी तक

प्रदर्शनी में ‘ऑपरेशन मुस्कान’ को विशेष फीचर के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके माध्यम से गुम हुए बालक-बालिकाओं की तलाश, विभिन्न स्थानों पर पुलिस टीमों की कार्रवाई, पहचान एवं सत्यापन तथा उन्हें सुरक्षित रूप से परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को संवेदनशील तरीके से प्रदर्शित किया जा रहा है।

हेल्प डेस्क पर हर सवाल का जवाब

आगंतुकों की सुविधा के लिए प्रदर्शनी में हेल्प डेस्क भी स्थापित किया गया है। यहां नागरिकों और विद्यार्थियों को प्रदर्शनी के विभिन्न जोन, पुलिस की आधुनिक व्यवस्थाओं तथा प्रदर्शित प्रक्रियाओं के संबंध में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

हेल्प डेस्क के माध्यम से आगंतुक अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पा रहे हैं और प्रदर्शनी के अलग-अलग हिस्सों को समझने में सहायता प्राप्त कर रहे हैं।

इस तरह भेल दशहरा मैदान की यह प्रदर्शनी नए न्याय तंत्र को केवल देखने का अवसर नहीं दे रही, बल्कि अपराध की पहली सूचना से लेकर घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच, साक्ष्य परीक्षण, अभियोजन और न्यायालय तक पहुंचने वाली पूरी प्रक्रिया को आमजन की भाषा में सामने ला रही है।

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