ट्रैवल मार्ट में सीएम मोहन ने किया सीधा संवाद; इतिहास, संस्कृति, वन्यजीवन और स्थानीय कहानियों को देश-दुनिया तक पहुंचाने पर जोर

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  • Oct 06, 2026
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मध्यप्रदेश की विरासत अब सोशल मीडिया पर गूंजेगी, 200 से ज्यादा इन्फ्लुएंसर्स ने जाना प्रदेश का अनदेखा वैभव

 

भोपाल | 6 अक्टूबर 2026
मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति, वन संपदा और पर्यटन की अनकही कहानियां अब देश-दुनिया तक डिजिटल माध्यम से पहुंचेंगी। मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (एमपीटीएम) 2026 के तहत आयोजित राष्ट्रीय स्तर की इन्फ्लुएंसर्स मीट में देशभर से पहुंचे 200 से अधिक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की विरासत अद्भुत है और इसकी कहानियों को नई पीढ़ी तथा दुनिया तक पहुंचाने में डिजिटल क्रिएटर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

रानी दुर्गावती से भगवान कृष्ण-सुदामा तक विरासत की कहानियां

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश वीरांगना रानी दुर्गावती जैसी साहसी नारियों की कर्मभूमि रहा है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए अपना जीवन बलिदान किया। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अतुलनीय मैत्री से जुड़ी परंपरा भी मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मध्यप्रदेश में विलुप्तप्राय चीतों की सफल बसाहट भी प्रदेश के वन्यजीवन और संरक्षण की उपलब्धि को दुनिया के सामने रखने का अवसर देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, वन संपदा और सांस्कृतिक विशेषताओं को बढ़ावा देने के लिए देश के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इतिहास के गौरवशाली पक्ष से परिचित कराना जरूरी है और इस काम में इन्फ्लुएंसर्स प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

उज्जैन का होटल और भोपाल के भोजताल में शिकारे बने आकर्षण

मुख्यमंत्री ने पर्यटन क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्जैन में स्कूल की पुरानी इमारत को सम्राट विक्रमादित्य होटल में बदलना पर्यटन क्षेत्र का सफल प्रयोग है। उन्होंने कहा कि होमस्टे भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। श्रीनगर की डल झील की तरह अब भोपाल के भोजताल में भी पर्यटकों को शिकारे की सैर कराई जा रही है।

मध्यप्रदेश को फिल्म निर्माण का संपूर्ण हब बनाने की तैयारी

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि मध्यप्रदेश में फिल्म निर्माण के लिए समृद्ध और अनुकूल इको-सिस्टम विकसित करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। प्रदेश को केवल फिल्म शूटिंग का केंद्र नहीं, बल्कि पोस्ट-प्रोडक्शन सहित संपूर्ण फिल्म निर्माण का हब बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की विविध लोकेशन, समृद्ध संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य इसे फिल्म निर्माताओं के लिए विशिष्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं।
प्रसिद्ध शेफ एवं टेलीविजन व्यक्तित्व रणवीर बरार, अभिनेता अमित सियाल और कंटेंट क्रिएटर मारूफ कलमन ने कहा कि मध्यप्रदेश से जुड़ी वास्तविक और खूबसूरत कहानियों को समझने के लिए यहां आना और स्थानीय लोगों से मिलकर अनुभव हासिल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी स्थान को स्थानीय नजरिए से देखने पर ही उसकी वास्तविक पहचान और अनकही कहानियां सामने आती हैं।

नौ श्रेणियों में इन्फ्लुएंसर्स सम्मानित

मुख्यमंत्री ने विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले इन्फ्लुएंसर्स को सम्मानित किया। इन्फ्लुएंसर्स मीट का उद्देश्य मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों, स्थानीय अनुभवों और प्रदेश की अनूठी कहानियों को सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है। देश और प्रदेश के इन्फ्लुएंसर्स डिजिटल मंचों के जरिए मध्यप्रदेश की विविध पर्यटन संभावनाओं को पर्यटकों तक पहुंचाएंगे।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों के लिए मनोरंजक एवं ज्ञानवर्धक फन क्विज भी आयोजित की गई। इसमें मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, पर्यटन स्थलों और खान-पान से जुड़े सवाल पूछे गए। इन्फ्लुएंसर्स ने उत्साह के साथ भाग लिया और प्रदेश की विविधताओं से जुड़ी नई जानकारियां साझा कीं।

हथकरघा और शिल्प को फैशन से जोड़ा

इन्फ्लुएंसर्स मीट में हैंडलूम और आर्ट एंड क्राफ्ट को केंद्र में रखकर विशेष फैशन शो भी आयोजित किया गया। इसमें प्राणपुर, महेश्वर, कुक्षी, धार, केरियाखेड़ी और भैरवगढ़ क्राफ्ट एवं हैंडलूम विलेज की थीम को आधुनिक फैशन के साथ प्रस्तुत किया गया।
केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की परियोजना का उद्देश्य प्रदेश के विशिष्ट स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और हथकरघा को पर्यटन से जोड़कर व्यापक बाजार तथा नए उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाना है। इन्फ्लुएंसर्स मीट के माध्यम से इन स्थानीय उत्पादों और शिल्प परंपराओं को देशभर से आए डिजिटल क्रिएटर्स के सामने प्रस्तुत किया गया, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
संवाद के दौरान मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, खान-पान, वन्यजीवन, विरासत और स्थानीय पर्यटन अनुभवों को डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

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