लखपति दीदी पहल से बदली निधि की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े कदम

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  • Sep 23, 2026
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गाय से शुरू हुआ सफर, सब्जी बाड़ी ने बढ़ाई रफ्तार; निधि की सालाना आय पहुंची ढाई लाख

रायपुर, 23 सितंबर 2026। लगन, मेहनत और सही अवसर मिले तो गांव की महिलाएं भी अपनी आर्थिक स्थिति बदलकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। पेण्ड्रा विकासखंड के ग्राम अमरपुर की निधि तिवारी ने पशुपालन और सब्जी उत्पादन को आजीविका का जरिया बनाकर यह साबित किया है। ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद मिली वित्तीय सहायता और समूह के सहयोग से उन्होंने अपनी आय के नए स्रोत विकसित किए। आज उनकी वार्षिक आय करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई है।

स्व सहायता समूह से जुड़ने के तीन महीने बाद खरीदी गाय

निधि तिवारी जून 2023 में दीप महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी थीं। वर्तमान में वे समूह की अध्यक्ष हैं। समूह से जुड़ने के महज तीन महीने बाद उन्होंने चक्रिय निधि (आरएफ) से मिली 10 हजार रुपये की सहायता से जर्सी नस्ल की गाय खरीदी। गाय से प्रतिदिन करीब 15 लीटर दूध का उत्पादन होता है। दूध की बिक्री से उन्हें नियमित आय का जरिया मिला और यहीं से उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सफर आगे बढ़ा।

60 हजार रुपये की सहायता से शुरू की सब्जी बाड़ी

पशुपालन के करीब छह महीने बाद निधि को सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये की सहायता मिली। उन्होंने इस राशि में अपनी बचत और अन्य संसाधन जोड़कर सब्जी बाड़ी शुरू की। इसके बाद उन्होंने मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों की खेती को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बना लिया।

टमाटर की खेती से हुई अच्छी आमदनी

निधि ने मार्च में अपने खेत में टमाटर की फसल लगाई। फसल तैयार होने के बाद उन्होंने टमाटर की बिक्री शुरू की। उन्हें करीब 40 रुपये प्रति किलो की दर से टमाटर बेचकर अच्छी आमदनी हो रही है। पशुपालन के साथ सब्जी उत्पादन को जोड़ने से उनकी आय के स्रोत बढ़े और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली।

निधि के मुताबिक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें अपना काम आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता, समूह का सहयोग और नई दिशा मिली। उनका कहना है कि अब वे परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ अपने सपनों को भी आगे बढ़ा पा रही हैं।

स्व सहायता समूहों से महिलाओं की आजीविका को मिल रहा आधार

निधि की सफलता उस ग्रामीण आजीविका व्यवस्था का हिस्सा है, जिसमें स्व सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को वित्तीय समावेशन, कौशल, आजीविका और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। केंद्र सरकार का दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से संगठित कर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करता है।

‘लखपति दीदी’ पहल इसी मिशन से जुड़ी पहल है, जिसमें महिलाओं की टिकाऊ वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाने पर जोर दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए स्व सहायता समूह आधारित आजीविका मॉडल, वित्तीय समावेशन और महिला उद्यमिता पर विशेष जोर दिया है।

छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ से महिलाओं को मिल रहा आजीविका का मंच

छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से जोड़कर विभिन्न आजीविका गतिविधियों के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला स्व सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता को आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर दिया है। वर्ष 2026 में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ में भी उन्होंने स्वावलंबन, उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात कही थी।

परिवार के सपनों को पूरा करने की ओर बढ़ रही निधि

निधि तिवारी का कहना है कि मेहनत के साथ सही अवसर और सहयोग मिले तो गांव में रहकर भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। स्व सहायता समूह से मिली सहायता ने उन्हें पशुपालन और सब्जी बाड़ी को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर दिया। अब दूध उत्पादन के साथ टमाटर और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती से होने वाली आय उनके परिवार के सपनों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

निधि की कहानी बताती है कि स्व सहायता समूह, वित्तीय सहायता, स्थानीय संसाधनों और मेहनत के बेहतर समन्वय से ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं। एक गाय से शुरू हुआ उनका सफर सब्जी बाड़ी तक पहुंचा और अब उनकी वार्षिक आय करीब ढाई लाख रुपये है। उनकी यह यात्रा ग्रामीण महिला उद्यमिता और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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