उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा और दृष्टिकोण का समावेश जरूरी: अतुल लिमये

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  • Oct 11, 2026
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‘नवोन्मेष-अध्ययन मंडल सदस्य संवाद’ में 500 से अधिक शिक्षाविदों की सहभागिता, पाठ्यक्रम में बदलाव और भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा पर दिया जोर

पुणे। 

भारतीय शिक्षण मंडल के पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत एवं पुणे महानगर की ओर से आयोजित ‘नवोन्मेष-अध्ययन मंडल सदस्य संवाद’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा और दृष्टिकोण को शामिल करने पर जोर दिया। एस. पी. महाविद्यालय परिसर स्थित भाऊसाहेब चितळे सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में पुणे और आसपास के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं स्वायत्त महाविद्यालयों के अध्ययन मंडलों (बोर्ड ऑफ स्टडीज) के 500 से अधिक संयोजकों और सदस्यों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं मां सरस्वती के चित्रों पर माल्यार्पण, पूजन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

शिक्षा से विकसित भारत के संकल्प को मिलेगी दिशा

अतुल लिमये ने कहा कि देश को विकसित भारत बनाने के संकल्प को साकार करने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों में देशप्रेम, चरित्र-निर्माण और संवेदनशीलता के भाव विकसित करे। इसके लिए पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय दृष्टिकोण का समावेश आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन लाने के लिए दूसरों की पहल की प्रतीक्षा करने के बजाय सभी को स्वयं आगे बढ़कर प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने शैक्षणिक परिसरों में स्वामी विवेकानंद और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे राष्ट्रनायकों एवं आदर्श व्यक्तित्वों के विचारों को पर्याप्त स्थान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने पूर्व की शैक्षणिक व्यवस्था में वामपंथी विचारधारा को अनुचित प्राथमिकता दिए जाने की बात कही।

पाठ्यक्रम में बदलाव से पहले हो आत्मनिरीक्षण

लिमये ने कहा कि शिक्षा निष्पक्ष और तटस्थ भाव से दी जानी चाहिए। पाठ्यक्रम में बदलाव करते समय पहले यह समीक्षा की जानी चाहिए कि उसमें क्या नहीं होना चाहिए और इसके बाद तय किया जाए कि किन विषयों एवं विचारों को शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण का समावेश केवल इतिहास तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पर्यावरण, विज्ञान, राजनीति विज्ञान और न्यायशास्त्र जैसे विषयों में भी भारतीय ज्ञान परंपरा को स्थान मिलना चाहिए।

शिक्षा में सुधार के लिए दिए चार सुझाव

अतुल लिमये ने उच्च शिक्षा में नवाचार और भारतीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए चार प्रमुख सुझाव दिए—

  1. विषयवार अध्ययन समूहों का गठन: प्रत्येक विषय के लिए स्वतंत्र अध्ययन समूह बनाए जाएं। इनमें अध्ययन मंडल के सदस्यों के साथ संबंधित क्षेत्र के विषय विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए।
  2. भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा: तकनीकी शिक्षा भारतीय भाषाओं के माध्यम से उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाए।
  3. समाज की समस्याओं पर आधारित प्रोजेक्ट: विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक समस्याओं से जुड़े व्यावहारिक प्रोजेक्ट दिए जाएं, ताकि उनमें सामाजिक संवेदनशीलता विकसित हो।
  4. नवाचारों का सूचना बैंक: शैक्षणिक क्षेत्र में हो रहे उत्कृष्ट प्रयोगों और नवाचारों का संकलन कर एक व्यवस्थित डेटा एवं सूचना बैंक तैयार किया जाए।

शिक्षा का उद्देश्य व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए भारतीय शिक्षण मंडल के पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत अध्यक्ष रविकुमार चिटणीस ने कहा कि पुणे प्रारंभ से ही शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। इस संवाद के माध्यम से युवाओं का सर्वांगीण मार्गदर्शन कर उन्हें समर्थ भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।

भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी. आर. शंकरानंद ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करना, उनके व्यक्तित्व को परिष्कृत करना और चरित्र का निर्माण करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय दृष्टिकोण कोई एकांगी विचार नहीं, बल्कि एक व्यापक और समग्र दृष्टि है।

कार्यक्रम में अध्ययन मंडलों के सदस्यों और शिक्षाविदों की सहभागिता के माध्यम से उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा, पाठ्यक्रम सुधार और नवाचारों को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया।

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