वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सह-अस्तित्व का दर्शन महत्वपूर्ण: रविकुमार अय्यर

  • Admin
  • Oct 18, 2026
  • 10,887 views

पुणे में ‘हिंदू संकल्पना का वैश्विक आकलन’ विषय पर व्याख्यान; मानसिक स्वास्थ्य, परिवार व्यवस्था और कट्टरवाद की चुनौतियों पर हुई चर्चा

पुणे, 17 अक्टूबर 2026।

विचारक एवं विविध संस्कृतियों के अध्येता रविकुमार अय्यर ने कहा कि दुनिया आज मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों, परिवार व्यवस्था में आ रहे बदलावों और कट्टरवाद के कारण अनेक प्रकार के संघर्षों का सामना कर रही है। ऐसे समय में संपूर्ण सृष्टि के कल्याण और सह-अस्तित्व की दृष्टि रखने वाला हिंदू दर्शन विश्व को शांति का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

एरंडवणे स्थित सेवा भवन में आयोजित ‘हिंदू संकल्पना का वैश्विक आकलन’ विषयक व्याख्यान में मुख्य वक्ता रविकुमार अय्यर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के हालिया पश्चिमी देशों के प्रवास के दौरान वैश्विक कल्याण और सह-अस्तित्व पर व्यक्त विचारों की पृष्ठभूमि में अपनी बात रखी। कार्यक्रम में ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के अखिल भारतीय टोली सदस्य रघुनंदन, ‘विश्व संवाद केंद्र’ के अध्यक्ष अभय कुलकर्णी, ‘एकता’ पत्रिका की संपादिका रूपाली भूसाड़ी और सुनीता प्रभुणे मंच पर उपस्थित रहे।

पश्चिमी जगत में हिंदू दर्शन की बढ़ती रुचि

रविकुमार अय्यर ने कहा कि स्टीव जॉब्स से लेकर लिसा मिलर तक, पश्चिमी जगत की अनेक जानी-मानी हस्तियों को हिंदू दर्शन से प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्राप्ति के विविध मार्ग, आध्यात्मिक उन्नति और सह-अस्तित्व की अवधारणा हिंदू विचार परंपरा के महत्वपूर्ण पक्ष हैं।

उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के विस्तार से ज्ञान तक पहुंच आसान हुई है और समाज में तार्किक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिला है। उनके अनुसार, शास्त्रार्थ, तर्क और विवेक को महत्व देने वाली हिंदू दर्शन परंपरा के प्रति दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रुचि बढ़ रही है।

अय्यर ने कहा कि भारतीयों की जिम्मेदारी है कि वे विश्व के सामने सह-अस्तित्व के विचार को केवल सैद्धांतिक रूप में नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन में अपनाने योग्य दृष्टि के रूप में प्रस्तुत करें।

वैश्विक समस्याओं से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

डॉ. मोहन भागवत के अमेरिका प्रवास का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इस दौरान विभिन्न मत-पंथों के विचारकों, भारतीय मूल के नागरिकों और संघ स्वयंसेवकों के साथ संवाद हुआ। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व की मूल अवधारणाओं में सह-अस्तित्व और विश्व कल्याण का विचार प्रमुख है।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों और परिवार व्यवस्था में आ रहे बदलावों जैसी समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न पंथों और समुदायों के बीच संवाद तथा सहयोग आवश्यक है।

अय्यर ने यह भी कहा कि विदेशों में प्राकृतिक और अन्य आपदाओं के समय संघ के स्वयंसेवक सहायता के लिए आगे आते हैं। उनके अनुसार, स्वयंसेवक वहां के सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भी योगदान दे रहे हैं।

विविधता को संघर्ष नहीं, सह-अस्तित्व के नजरिये से देखने की अपील

कार्यक्रम में ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के रघुनंदन ने कहा कि स्वेच्छा से हिंदू जीवनशैली अपनाने के इच्छुक लोगों के लिए आवश्यक आचरण, वैचारिक दृष्टि और अनुकूल सामाजिक संरचना को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।

अजय महाजन ने कहा कि धर्म, संस्कृति और भाषा की विविधता को संघर्ष के बजाय सह-अस्तित्व की भावना से देखा जाना चाहिए। उन्होंने हिंदू विचार को ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की अवधारणा से जुड़ी व्यापक वैश्विक दृष्टि बताया।

कार्यक्रम का संचालन सुवर्णा धर्माधिकारी ने किया, जबकि रूपाली भूसाड़ी ने आभार व्यक्त किया।

सम्बन्धित खबरें