हिंदी के विस्तार और प्रभावी जनसंवाद पर मंथन, राष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन में साहित्य से मीडिया तक संवाद

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  • Sep 25, 2026
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नई दिल्ली। हिंदी को शासकीय कार्यों, साहित्य, मीडिया और जनसंवाद की अधिक प्रभावी भाषा बनाने के उद्देश्य से खान मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन 2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन में हिंदी की समृद्ध साहित्यिक विरासत, बदलते मीडिया परिदृश्य और कार्यालयी कार्यों में सरल एवं सहज हिंदी के प्रयोग पर व्यापक विमर्श हुआ। आयोजन की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद अतिथियों और प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान का गायन किया।

कार्यक्रम में खान मंत्रालय की निदेशक गीतिका शर्मा ने सचिव खान मंत्रालय केशव चंद्र का शॉल एवं पौधा भेंट कर स्वागत किया। अपर सचिव वीना कुमारी डी. और संयुक्त सचिव फरीदा एम. नाइक का भी शॉल एवं पौधा भेंट कर अभिनंदन किया गया।

सम्मेलन की रूपरेखा और विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए संयुक्त सचिव फरीदा एम. नाइक ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी के अधिकाधिक, सहज एवं प्रभावी प्रयोग के लिए प्रेरित करना है। अपर सचिव वीना कुमारी डी. ने हिंदी को दैनिक शासकीय कार्यों का सहज और स्वाभाविक हिस्सा बनाने पर जोर देते हुए सरल और स्पष्ट हिंदी के निरंतर प्रयोग को महत्वपूर्ण बताया।

खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और उसके रचनाकारों के योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि साहित्य भाषा को समृद्ध बनाने के साथ समाज में विचार, संवेदना और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करता है। उन्होंने सम्मेलन को हिंदी की समृद्ध विरासत को वर्तमान कार्य-संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

साहित्य और मीडिया में हिंदी की बदलती भूमिका पर चर्चा

सम्मेलन में ‘हिंदी साहित्य को सुदृढ़ करता लेखन’ विषय पर पैनल चर्चा हुई। इसमें प्रो. सुधीश पचौरी, डॉ. ममता कालिया और प्रो. जितेंद्र श्रीवास्तव ने लेखन की सामाजिक प्रासंगिकता तथा बदलते समय में हिंदी साहित्य की संभावनाओं पर विचार रखे। डॉ. अंजुम शर्मा ने वार्ताकार के रूप में सत्र का संचालन किया।

‘हिंदी भाषा और मीडिया’ विषयक सत्र में रंजना सिंह राठौड़, विनीत कुमार और अशोक श्रीवास्तव ने मीडिया के बदलते स्वरूप, डिजिटल माध्यमों में हिंदी की बढ़ती पहुंच और प्रभावी जनसंवाद में हिंदी की भूमिका पर विचार साझा किए। राहुल डबास ने वार्ताकार के रूप में चर्चा को आगे बढ़ाया।

हिंदी पखवाड़े की प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित

हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता अधिकारियों और कर्मचारियों को केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे तथा संयुक्त सचिव फरीदा एम. नाइक ने प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। प्रतियोगिताओं में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर हिंदी के प्रति अपनी रुचि, रचनात्मकता और सहभागिता का परिचय दिया।

अपने संबोधन में सतीश चंद्र दुबे ने हिंदी को देश के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने वाली सशक्त संवाद-भाषा बताया। उन्होंने हिंदी की सरलता, सहजता और समावेशी स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी के साथ देश की क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों के सम्मान एवं संवर्धन को भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने हिंदी को कार्यालयी कार्यों के साथ-साथ प्रभावी जनसंवाद की सहज भाषा बनाने पर जोर दिया।

काव्य संध्या में साहित्यिक रंग

सम्मेलन का समापन काव्य संध्या के साथ हुआ। इसमें प्रख्यात कवि डॉ. विष्णु सक्सेना, कवयित्री बलजीत कौर और कवि कर्नल गौतम राजऋषि ने काव्य-पाठ किया। प्रेम, संवेदना, जीवन, राष्ट्र और मानवीय भावनाओं से जुड़ी कविताओं ने सभागार को साहित्यिक भावनाओं से सराबोर कर दिया।

राष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन 2026 ने हिंदी को महज शासकीय भाषा तक सीमित रखने के बजाय संवाद, साहित्य, संस्कृति और जनभागीदारी को जोड़ने वाली जीवंत कड़ी के रूप में सामने रखा। सम्मेलन में हिंदी के सहज, सरल और प्रभावी प्रयोग के साथ भारतीय भाषाई विविधता के सम्मान का संदेश भी स्पष्ट रूप से उभरा।

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