भारत की पहली मैरीटाइम एनबीएफसी एसएमएफसीएल का विस्तार, 5,107 करोड़ रु वितरित; 2031 तक 60,205 करोड़ रु का लक्ष्य

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  • Oct 23, 2026
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सर्बानंद सोनोवाल ने कहा—प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के तहत भारत की समुद्री प्रगति को गति देने में एसएमएफसीएल की भूमिका अहम
मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (एमडीएफ) 5,000 करोड़ रुपये के अपने पहले क्लोज की ओर तेजी से अग्रसर
 

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। एसएमएफसीएल के नए कॉर्पोरेट कार्यालय का उद्घाटन

भारत के समुद्री क्षेत्र को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता देने वाली देश की पहली समर्पित मैरीटाइम नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसएमएफसीएल) ने विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (आईएसआईडी) में एसएमएफसीएल के कॉर्पोरेट कार्यालय का उद्घाटन किया। इसके साथ ही भारत की इस पहली समर्पित मैरीटाइम एनबीएफसी को स्थायी कार्यालय मिला।

5,107 करोड़ रुपये का वितरण, 2031 तक 60,205 करोड़ का लक्ष्य

एसएमएफसीएल का नया कार्यालय ऐसे समय में खुला है, जब कंपनी तेजी से प्रगति कर रही है। 30 सितंबर 2026 तक एसएमएफसीएल 11,563 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत कर चुका है और 5,107 करोड़ रुपये वितरित कर चुका है। स्वीकृत राशि का आधे से अधिक हिस्सा परियोजनाओं के आगे बढ़ने के साथ वितरित किया जाना अभी बाकी है।
कॉर्पोरेशन ने भविष्य की विस्तार योजना भी तैयार की है। इसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 के अंत तक कुल संचयी वितरण को 60,205 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। यह विस्तार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मानदंडों और अपने ऋण-इक्विटी अनुपात के अनुरूप इक्विटी समर्थन पर निर्भर करेगा।

समुद्री अर्थव्यवस्था के विकास में एसएमएफसीएल की अहम भूमिका

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “मैरीटाइम सेक्टर में भारत की पहली समर्पित एनबीएफसी के रूप में एसएमएफसीएल बंदरगाह आधारित विकास के लिए दीर्घकालिक वित्त जुटाने, जहाज निर्माण और तटीय संपर्क को बढ़ाने तथा हमारी समुद्री अर्थव्यवस्था के समग्र विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक दुनिया का एक अग्रणी समुद्री राष्ट्र बनने के विजन को साकार करने की दिशा में भारत की समुद्री प्रगति को गति देने में इसकी अहम भूमिका है।”

मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड के पहले क्लोज की तैयारी

मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (एमडीएफ) के दोनों घटक भी आकार ले रहे हैं। इसके मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड (एमआईएफ) घटक के लिए एसबीआई वेंचर्स लिमिटेड को आधिकारिक फंड मैनेजर नियुक्त किया गया है। नवंबर के अंत तक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास वैकल्पिक निवेश कोष के रूप में पंजीकरण पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद जनवरी 2027 तक 5,000 करोड़ रुपये के पहले क्लोज का लक्ष्य रखा गया है।

ब्याज सहायता योजना से 4,500 करोड़ रुपये के ऋणों को समर्थन

इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड (आईआईएफ) पहले से ही परिणाम दे रहा है। इसका ऑनलाइन पोर्टल www.iifmdf.in शुरू हो चुका है। अब तक 4,500 करोड़ रुपये के ऋणों को समर्थन दिया जा चुका है। उधारकर्ताओं द्वारा चुकाए गए ब्याज के एवज में लगभग 25 करोड़ रुपये की ब्याज छूट भी जारी की जा चुकी है।
सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के परिवर्तनकारी ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत भारत एक मजबूत, अधिक आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैरीटाइम सेक्टर का निर्माण कर रहा है।”

समुद्री परियोजनाओं को शुरुआती विचार से अंतिम ऋण तक वित्तीय सहयोग

एसएमएफसीएल द्वारा संचालित योजनाएं अब किसी भी समुद्री परियोजना को उसके शुरुआती विचार से लेकर अंतिम ऋण तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती हैं। मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड में भारत सरकार का योगदान एसएमएफसीएल के माध्यम से 9,800 करोड़ रुपये तक दिया जाता है, जबकि फंड मैनेजर के रूप में चयनित एसबीआई वेंचर्स इस फंड का पेशेवर प्रबंधन करता है।
इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड पात्र शिपयार्डों के लिए ऋण की लागत कम करता है। इसके तहत एसएमएफसीएल प्रोत्साहन राशि की गणना करता है, आवेदन एवं दावा पोर्टल का संचालन करता है और ब्याज सहायता जारी करता है।
शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम के तहत क्रेडिट रिस्क कवर कॉर्पस का प्रबंधन केंद्रीय स्तर पर किया जाता है। प्रीमियम और दावों की समीक्षा के माध्यम से यह व्यवस्था शिपयार्डों और ऋणदाताओं को भुगतान जोखिम के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान करती है।

बंदरगाहों से जहाज निर्माण तक परियोजनाओं की निगरानी

एसएमएफसीएल का अपना ऋण ढांचा बंदरगाहों, रेल एवं सड़क संपर्कों, अंतर्देशीय जलमार्गों, तटीय बुनियादी ढांचे, बंदरगाह-पिछड़े क्षेत्रों के लॉजिस्टिक्स, जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत से जुड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन, स्वीकृति और निगरानी करता है।
यह सागरमाला और राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) के लिए धनराशि जारी करने तथा उसके उपयोग की भी निगरानी करता है, ताकि धन सीधे परियोजनाओं तक पहुंचे और उसके खर्च होने तक उसकी निगरानी की जा सके।

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