एआई के दौर में बदलेंगे काम के तौर-तरीके, श्रम संबंधों को संवाद और कौशल से नई दिशा देने पर जोर

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  • Sep 28, 2026
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एआई के दौर में बदलेंगे काम के तौर-तरीके, श्रम संबंधों को संवाद और कौशल से नई दिशा देने पर जोर

नई दिल्ली, 28 सितंबर। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वचालन और रोबोटिक्स के तेजी से बदलते दौर में भारत के श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा तंत्र को नई आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालने की जरूरत है। इसी दिशा में श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने उद्योग और श्रमिकों को राष्ट्र निर्माण में साझेदार बताते हुए बदलती कार्य संस्कृति, कौशल विकास और बेहतर औद्योगिक संबंधों के लिए निरंतर संवाद पर जोर दिया।

मांडविया ने नई दिल्ली में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और भारत के नियोक्ता महासंघ (EFI) की ओर से आयोजित ‘औद्योगिक संबंध और श्रम एवं पुरस्कार 2026’ राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का विषय ‘एआई के युग में औद्योगिक संबंधों और कार्यस्थल भागीदारी का पुनर्निर्माण’ था। उन्होंने कहा कि एआई भारत के लिए बड़े अवसर लेकर आया है, लेकिन इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए युवाओं को एआई, स्वचालन, रोबोटिक्स और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के अनुरूप कौशल से लैस करना होगा।

एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल देने का लक्ष्य

मांडविया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख करते हुए बताया कि अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव के साथ श्रम बाजार की आवश्यकताएं भी तेजी से बदल रही हैं, इसलिए कौशल विकास को भविष्य की रोजगार जरूरतों के अनुरूप बनाना जरूरी है।

सामाजिक सुरक्षा का दायरा 19 से बढ़कर 68 प्रतिशत हुआ

केंद्रीय मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में जहां सामाजिक सुरक्षा कवरेज आबादी के 19 प्रतिशत तक था, वहीं अब यह 101 करोड़ लोगों यानी आबादी के 68 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस विस्तार को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी मान्यता दी है।

उन्होंने उद्योग-अनुकूल नीतियों को श्रम-विरोधी और श्रमिक हितों को उद्योग-विरोधी मानने वाली पारंपरिक सोच में बदलाव की जरूरत बताई। उनका कहना था कि उद्योग और श्रमिक एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के साझेदार हैं और दोनों की प्रगति साथ-साथ होनी चाहिए।

90 दिन चलेगा ‘श्रम संवाद’ अभियान

मांडविया ने बताया कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने श्रम संहिताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘श्रम संवाद’ नाम से व्यापक अभियान शुरू किया है। अगले 90 दिनों में यह अभियान देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 316 जिलों की औद्योगिक बस्तियों तक पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने औद्योगिक संबंधों को मजबूत करने के लिए सभी हितधारकों के बीच निरंतर संवाद और परामर्श को जरूरी बताया। उन्होंने कहा, “जहां संवाद है, वहां समाधान है।” सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंधों के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और उन्हें अपनाने की जरूरत पर भी उन्होंने जोर दिया, ताकि उद्योग और श्रमिक दोनों के हित एक साथ आगे बढ़ सकें।

7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के साथ रोजगार में भी बढ़ोतरी

मांडविया ने भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापक आर्थिक नीतियों ने देश को मजबूत विकास पथ पर बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

उनके अनुसार, 2017 से 2023 के दौरान अर्थव्यवस्था में प्रत्येक 1 प्रतिशत वृद्धि के साथ रोजगार वृद्धि 1.11 प्रतिशत रही, जबकि पहले यह केवल 0.008 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि सतत आर्थिक विकास, रोजगार के विस्तार और गरिमापूर्ण कार्यबल को केंद्र में रखकर सभी हितधारकों को मिलकर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करना होगा।

निश्चित अवधि के रोजगार पर मार्गदर्शिका जारी

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान मांडविया ने ‘नए श्रम संहिता ढांचे के तहत नियोक्ता मार्गदर्शिका: भारत में निश्चित अवधि का रोजगार’ शीर्षक से एक रिपोर्ट भी जारी की।

सम्मेलन में CII उत्तरी क्षेत्र के अध्यक्ष पुनीत कौरा, CII राष्ट्रीय औद्योगिक संबंध एवं श्रम समिति के सह-अध्यक्ष हर्षवर्धन चितले, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के क्षेत्रीय साझेदारी विकास एवं संसाधन जुटाने के लिए उप निदेशक और वरिष्ठ सलाहकार ओक्टावियांटो पासारीबु, उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधिकारी उपस्थित रहे।

भविष्य के काम और औद्योगिक संबंधों पर मंथन

राष्ट्रीय सम्मेलन उद्योग और श्रम क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को भविष्य के काम और औद्योगिक संबंधों पर अपने विचार साझा करने का मंच प्रदान कर रहा है। तकनीकी बदलाव और तेजी से बदलते रोजगार पारिस्थितिकी तंत्र से पैदा होने वाले अवसरों और चुनौतियों पर यहां विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बदलती कार्य परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझना और उद्योग तथा श्रमिकों के हितों के बीच संतुलन कायम करते हुए भविष्य के लिए अधिक मजबूत और समावेशी श्रम व्यवस्था तैयार करना है।

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