व्यापार में मनमानी नहीं, साक्ष्य और WTO नियम जरूरी: G20 में भारत का दोटूक संदेश

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  • Oct 02, 2026
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मिलवॉकी, 2 अक्टूबर 2026। वैश्विक व्यापार में संरक्षणवाद और मनमाने उपायों के बढ़ते जोखिम के बीच भारत ने जी20 में अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि व्यापार संबंधी किसी भी कार्रवाई का आधार अनुमान नहीं, बल्कि ठोस, विशिष्ट और सत्यापन योग्य साक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप उपायों, निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था और विकासशील देशों की नीतिगत स्वतंत्रता को बनाए रखने पर जोर दिया।

अमेरिका के विस्कॉन्सिन स्थित मिलवॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के समापन दिवस पर गोयल ने संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता और उत्पादन, सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र (MFN) सिद्धांत, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम के उन्मूलन और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।

1.4 अरब की जरूरतों वाली अर्थव्यवस्था, इसलिए भारत की उत्पादन क्षमता अलग

संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता और उत्पादन के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाली भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू मांग पर आधारित है। भारत डिजाइन से लेकर तैयार माल तक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाएं विकसित कर रहा है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विनिर्माण क्षमता घरेलू और वैश्विक दोनों जरूरतों को पूरा करती है तथा जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत के पास संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता नहीं है।

गोयल ने यह भी माना कि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार को विकृत करने वाला सरकारी समर्थन डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण को जन्म दे सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने WTO के अनुरूप साक्ष्य-आधारित और न्यायिक समीक्षा के अधीन एंटी-डंपिंग तथा काउंटरवेलिंग ड्यूटी जैसे उपायों को उचित रास्ता बताया।

उनका कहना था कि औद्योगिक क्षमता अपने आप में समस्या नहीं है। समस्या तब पैदा होती है जब उत्पादन का भौगोलिक संकेंद्रण छिपी हुई सब्सिडी और समर्थन से प्रेरित हो। उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण वैध लक्ष्य है, लेकिन इसे WTO नियमों से बाहर जाने का बहाना नहीं बनाया जा सकता। न ही समायोजन का बोझ विकासशील देशों पर डाला जाना चाहिए, जिन्हें औद्योगीकरण के लिए अपनी नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने सांख्यिकी और डेटा के आदान-प्रदान को मौजूदा तंत्रों के भीतर रखने पर भी जोर दिया।

MFN व्यवस्था से छेड़छाड़ नहीं, WTO में आम सहमति जरूरी

सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र (MFN) सिद्धांत को अद्यतन करने के मुद्दे पर भारत ने इसे नियम-आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था की महत्वपूर्ण गारंटी बताया। गोयल ने कहा कि जी20 सदस्यों के साथ भारत का व्यापार पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित व्यवस्था पर निर्भर करता है। MFN यह सुनिश्चित करता है कि छोटे व्यापारी से लेकर बड़े व्यापारिक समूह तक सभी के लिए समान शर्तें लागू हों।

उन्होंने WTO में आम सहमति को सर्वोच्च महत्व देने की बात कही। साथ ही विकासशील देशों को विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बराबर आने का अवसर देने के लिए विशेष और भिन्न व्यवहार बनाए रखने की जरूरत बताई। गोयल ने WTO की दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली बहाल करने का भी आह्वान किया।

जबरन श्रम पर भारत की प्रतिबद्धता ‘पूर्ण और बिना शर्त’

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम के मुद्दे पर गोयल ने भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जबरन श्रम के उन्मूलन के प्रति देश की प्रतिबद्धता पूर्ण और बिना शर्त है।

उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 23 जबरन श्रम पर रोक लगाता है और इस प्रावधान को सर्वोच्च न्यायालय लागू कर सकता है। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के कन्वेंशन 29 और 105 की पुष्टि की है। इसके अलावा जुलाई 2026 में भारत ने जबरन श्रम का इस्तेमाल कर उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया।

देशों और क्षेत्रों को सामूहिक रूप से दोषी ठहराने के खिलाफ चेतावनी

गोयल ने कहा कि सीमा पर उठाए जाने वाले व्यापारिक कदम पूरे देशों, क्षेत्रों या वर्गों के बारे में सामान्य अनुमानों पर आधारित नहीं होने चाहिए। ऐसे कदमों के पीछे विशिष्ट और सत्यापन योग्य साक्ष्य होने चाहिए तथा उचित प्रक्रिया और WTO नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रम मानकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन सक्षम, सार्वभौमिक और त्रिपक्षीय निकाय है। भारत जी20 सदस्यों के बीच जबरन श्रम के उन्मूलन और अच्छी प्रथाओं के स्वैच्छिक आदान-प्रदान का समर्थन करता है। हालांकि, ऐसे सहयोग में सदस्य देशों की निगरानी नहीं होनी चाहिए, नए दायित्व नहीं बनने चाहिए और साझा की गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल एकतरफा व्यापार कार्रवाई के आधार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

‘जो मिलकर सुलझ सकता है, उसे बाधित न करें’

गोयल ने मिलवॉकी में आयोजित कार्यक्रमों और आतिथ्य के लिए राजदूत ग्रीर तथा अमेरिकी जी20 अध्यक्षता को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कथन का उल्लेख करते हुए कि जिन मुद्दों का समाधान मिलकर नहीं हो सकता, उन्हें उन मुद्दों के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए जिनका समाधान मिलकर किया जा सकता है, उन्होंने कहा कि भारत ने इसी भावना के साथ बैठक में भाग लिया।

उन्होंने कहा कि भारत ने चारों विषयों पर अपनी चिंताओं को मजबूती से रखा और साथ ही रचनात्मक सुझाव भी दिए।

WTO केंद्र में, विकासशील देशों की नीतिगत स्वतंत्रता पर जोर

गोयल ने WTO को केंद्र में रखते हुए नियम-आधारित, निष्पक्ष, समान, गैर-भेदभावपूर्ण, पारदर्शी, खुली, समावेशी और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को अपने लोगों के विकास और पोषण के लिए आवश्यक नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सर्वसम्मति से निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी महत्व दिया।

भारत ने 2027 में जी20 की अध्यक्षता संभालने जा रहे यूनाइटेड किंगडम को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा भी की।

पांच देशों के मंत्रियों से द्विपक्षीय वार्ता

जी20 बैठक के दौरान गोयल ने ऑस्ट्रेलिया के व्यापार एवं पर्यटन मंत्री, सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्री, फ्रांस के विदेश व्यापार एवं आर्थिक आकर्षण के लिए प्रतिनिधि मंत्री, कोरिया गणराज्य के व्यापार मंत्री और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं।

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