अंत्योदय की राह ही राष्ट्र निर्माण का आधार : प्रधानमंत्री मोदी

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  • Sep 25, 2026
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नई दिल्ली, 25 सितंबर। समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव ही सशक्त राष्ट्र की पहचान है। अंत्योदय की इसी विचारधारा को राष्ट्र निर्माण का आधार मानने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के विचार आज भी जनकल्याण और राष्ट्रसेवा की दिशा में समाज को निरंतर प्रेरित कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने तथा सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का संकल्प दोहराने का आह्वान किया। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय को राष्ट्रसेवा का सच्चा साधक बताते हुए कहा कि उन्होंने समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण की मूल भावना से जोड़ा।

अंत्योदय की विचारधारा में जनकल्याण की प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा संदेश में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार माना। उनकी अंत्योदय की विचारधारा आज भी जनकल्याण के लिए अद्भुत प्रेरणा देती है।

उन्होंने कहा कि जयंती के इस अवसर पर उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात करते हुए सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने का संकल्प दोहराना चाहिए।

भाग्य नहीं, प्रयास और पौरुष सफलता की कुंजी

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सफलता और नवाचार के लिए निरंतर प्रयास, दृढ़ता और समर्पित कार्रवाई के महत्व को रेखांकित करते हुए संस्कृत का सुभाषित भी साझा किया—

“यथा यथा प्रयत्नः स्याद्भवेदाशु फलं तथा।
इति पौरुषमेवास्ति दैवमस्तु तदेव च॥”

इसका भावार्थ है कि व्यक्ति का प्रयास और लगन जितनी अधिक होती है, सफलता उतनी ही शीघ्र प्राप्त होती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नवाचार भी निरंतर प्रयास पर आधारित होता है। इसलिए सफलता और नवाचार का मार्ग केवल भाग्य से नहीं, बल्कि समर्पित कार्य, साहस और नए विचारों को वास्तविकता में बदलने के दृढ़ संकल्प से प्रशस्त होता है।

दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर प्रधानमंत्री का संदेश अंत्योदय की उस मूल भावना को सामने लाता है, जिसमें विकास का केंद्र समाज का अंतिम व्यक्ति है और राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसका लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचे।

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