स्पेशल फीचर -चिप से सिस्टम तक: भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य की ताकत बन रहा ‘संपूर्ण उद्योग’ सहयोग

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  • Sep 23, 2026
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फीचर डेस्क। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां केवल बड़े निवेश, नई फैक्ट्रियां या अत्याधुनिक तकनीक ही पर्याप्त नहीं होंगी। भारत की वास्तविक ताकत एक ऐसे व्यापक इकोसिस्टम में होगी, जिसमें सेमीकंडक्टर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, कलपुर्जों, सामग्री, डिजाइन, पैकेजिंग और अंतिम उपयोग वाले उत्पादों तक पूरी मूल्य श्रृंखला एक-दूसरे के साथ मजबूती से जुड़ी हो। उद्योग जगत अब इसी दिशा में ‘संपूर्ण उद्योग’ यानी ‘होल ऑफ इंडस्ट्री’ दृष्टिकोण को भारत की अगली विकास यात्रा की अहम जरूरत मान रहा है।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहे हैं, विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार हो रहा है और वैश्विक कंपनियां देश में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं। इसके साथ ही पूरा इकोसिस्टम तेजी से आकार ले रहा है। ऐसे में अलग-अलग उद्योग क्षेत्रों की क्षमताओं को एक साझा राष्ट्रीय क्षमता में बदलने के लिए उद्योग संघों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

अकेले किसी एक क्षेत्र से नहीं बनेगा वैश्विक इकोसिस्टम

सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास की अगली मंजिल केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, कलपुर्जे, सामग्री, डिजाइन, पैकेजिंग और अंतिम उपयोग वाले अनुप्रयोग अब एक-दूसरे पर लगातार अधिक निर्भर होते जा रहे हैं। इसलिए भारत की सफलता केवल तकनीकी क्षमताओं और बुनियादी ढांचे पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के बीच प्रभावी सहयोग भी निर्णायक होगा।

सेमीकॉन इंडिया 2026 में आयोजित ‘भारत के राष्ट्रीय एजेंडे को आगे बढ़ाने में उद्योग संघों की भूमिका’ विषयक पैनल चर्चा में इसी व्यापक सोच पर मंथन हुआ। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के सीईओ अमितेश कुमार सिन्हा ने सत्र का संचालन किया। इसमें प्रमुख उद्योग संघों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लेकर चर्चा की कि गहन और निरंतर सहयोग भारत की सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स संबंधी महत्वाकांक्षाओं को किस तरह नई गति दे सकता है।

चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि विभिन्न उद्योग संघ भले ही इकोसिस्टम के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व करते हों, लेकिन उनका साझा लक्ष्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग खड़ा करना है।

चिप की ताकत तभी, जब पूरा सिस्टम साथ हो

पैनल चर्चा में प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के बीच बढ़ते अभिसरण को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। आज किसी चिप का मूल्य केवल उसके निर्माण में नहीं, बल्कि उपकरणों, उत्पादों और पूरी प्रणाली के साथ उसके एकीकरण से पैदा होता है।

फैब्रिकेशन के लिए सहायक सामग्री और उपकरण जरूरी हैं। विनिर्माण आगे चलकर पैकेजिंग और टेस्टिंग से जुड़ता है, जबकि इन सभी के लिए व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमताओं की जरूरत होती है। इस परस्पर जुड़ी मूल्य श्रृंखला ने उद्योग के विभिन्न हिस्सों के बीच मजबूत संपर्क और अधिक सुव्यवस्थित सहयोग की आवश्यकता को और स्पष्ट किया है।

यही सोच भारत के व्यापक ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक’ दृष्टिकोण को मजबूत करती है, जिसमें डिजाइन, विनिर्माण, पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी समाधान मिलकर एक मजबूत और लचीला इकोसिस्टम तैयार करते हैं।

आयोजन से आगे स्थायी सहयोग की जरूरत

उद्योग जगत के नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि सहयोग केवल सम्मेलनों और आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए एक स्थायी सामुदायिक तंत्र विकसित करने की जरूरत है, जो लगातार संवाद बनाए रखे, विभिन्न उद्योग संघों के बीच समन्वय बढ़ाए और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सामूहिक कार्रवाई को गति दे।

प्रस्तावित व्यवस्था मौजूदा उद्योग संघों की विशिष्ट भूमिकाओं को समाप्त करने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य उनकी क्षमताओं और अनुभवों को एक साझा मंच पर लाना है, जहां अलग-अलग क्षेत्रों और मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़े साझा मुद्दों पर मिलकर काम किया जा सके।

भारत की महत्वाकांक्षा अब केवल विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने से आगे बढ़कर एक पूर्ण और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने की है। ऐसे में संस्थागत सहयोग को उद्योग की रणनीतिक जरूरत के रूप में देखा जा रहा है।

600 से अधिक प्रदर्शक, करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां

भारत में इस क्षेत्र को लेकर बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी सेमीकॉन इंडिया 2026 में भी दिखाई दी। आयोजन में 600 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया, जिनमें लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल थीं। यह भागीदारी भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाती है।

आयोजन के दौरान विनिर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), लॉजिस्टिक्स और कौशल विकास से जुड़े क्षेत्रों में 56 समझौता ज्ञापन (एमओयू), रणनीतिक पहल और उद्योग संबंधी घोषणाएं की गईं।

यह आंकड़ा बताता है कि भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र का विस्तार अब केवल एक औद्योगिक परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े अनेक क्षेत्रों में समानांतर गतिविधियां तेज हो रही हैं।

सरकारी नीतियों से मिल रही रफ्तार

इस परिवर्तन में सरकार की नीतिगत पहलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने तथा सुदृढ़ विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सरकार ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें से सितंबर 2026 तक पांच वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर इकाइयां परिचालन में आ चुकी हैं।

यह प्रगति भारत की उस रणनीति को दर्शाती है जिसमें नीति समर्थन, निवेश, विनिर्माण क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और उद्योग सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

अगली छलांग सहयोग से होगी

भारत की सेमीकंडक्टर कहानी अब केवल कारखाने लगाने की कहानी नहीं रह गई है। यह तेजी से उद्योगों, संस्थानों और प्रौद्योगिकियों को एक-दूसरे से जोड़ने की कहानी बन रही है। चिप निर्माण से लेकर पैकेजिंग, डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई और अंतिम उपयोग वाले उत्पादों तक पूरी मूल्य श्रृंखला को एक साथ मजबूत करना ही भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जा सकता है।

सेमीकॉन इंडिया 2026 की चर्चा से उभरता संदेश स्पष्ट है—भारत की अगली औद्योगिक छलांग के लिए पूंजी और बुनियादी ढांचा जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी सहयोग, समन्वय और साझा राष्ट्रीय दृष्टिकोण भी है। ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक’ की यात्रा में उद्योग संघों की सामूहिक शक्ति भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य की महत्वपूर्ण आधारशिला बन सकती है।

पैनल में ये प्रमुख उद्योग प्रतिनिधि रहे शामिल

पैनल में एसईएमआई के सीईओ एवं अध्यक्ष अजीत मनोचा, आईसीईए के अध्यक्ष पंकज महिंद्रू, ईएलसीआईएनए के महानिदेशक राजू गोयल, एमएआईटी के महानिदेशक कर्नल सुहैल जैदी और एसईएमआई इंडिया के अध्यक्ष अशोक चंडक शामिल थे। पैनल का संचालन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सीईओ अमितेश कुमार सिन्हा ने किया।

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