सौर सुजला ने बदली करण साय की खेती की तस्वीर, अब साल में दो से तीन फसलें और करीब 2 लाख की आमदनी

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  • Oct 04, 2026
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कोरिया, 04 अक्टूबर 2026।

सरकारी योजनाएं जब जरूरतमंद किसानों तक पहुंचती हैं तो वे केवल सुविधा उपलब्ध नहीं करातीं, बल्कि खेती की दिशा और किसान की आर्थिक स्थिति भी बदल देती हैं। कोरिया जिले के कादमनारा के जोबापानी पारा निवासी किसान करण साय, पिता जयराम, इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं। “सेवा संकल्प अभियान” के माध्यम से शासन की योजनाओं से मिल रही सुविधाओं का असर उनके जीवन और खेती में साफ दिखाई दे रहा है।

करण साय करीब 2 एकड़ भूमि में खेती करते हैं। कुछ वर्ष पहले तक उनके पास सिंचाई का पर्याप्त साधन नहीं था। बारिश पर निर्भर खेती के कारण वे साल में केवल एक ही फसल ले पाते थे। मौसम की अनिश्चितता का सीधा असर फसल उत्पादन और आमदनी पर पड़ता था।

वर्ष 2016 में सौर सुजला योजना का लाभ मिलने के बाद उनकी खेती की तस्वीर बदल गई। योजना के तहत उनके खेत में 3 एचपी का सोलर पंप स्थापित किया गया। इससे उन्हें सिंचाई का स्थायी और सुविधाजनक साधन मिला। अब खेती के लिए केवल बारिश पर निर्भर रहने की मजबूरी नहीं रही और जरूरत के अनुसार खेत में पानी उपलब्ध होने लगा।

सिंचाई मिली तो बढ़ी फसलों की विविधता

सिंचाई सुविधा मिलने के बाद करण साय अब अपने खेत में धान, मूंग, सरसों, उड़द और गेहूं जैसी विभिन्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। पहले जहां साल में केवल एक फसल लेना संभव था, वहीं अब वे दो से तीन फसलें लेने में सक्षम हैं। इससे न केवल खेत की उत्पादकता बढ़ी, बल्कि उनकी वार्षिक आमदनी भी बढ़कर करीब 2 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

सोलर पंप ने खेती पर बढ़ाया भरोसा

करण साय बताते हैं कि सोलर पंप लगने के बाद सिंचाई को लेकर उनकी बड़ी समस्या दूर हो गई है। खेत में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने से फसल लेने का भरोसा बढ़ा है और खेती पहले की तुलना में अधिक लाभकारी हुई है। उनके लिए सौर सुजला योजना खेत में लगाए गए सोलर पंप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी आजीविका को मजबूत करने और खेती को नई दिशा देने का माध्यम बनी है।

योजना का लाभ मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए करण साय ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि किसानों तक ऐसी योजनाओं का लाभ पहुंचने से खेती को मजबूती मिलती है और किसान आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकते हैं।

करण साय की कहानी इस बात का उदाहरण है कि जब शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुंचता है, तो उसका असर केवल एक सुविधा मिलने तक सीमित नहीं रहता। सिंचाई जैसी बुनियादी जरूरत पूरी होने से खेती की उत्पादकता बढ़ती है, फसल का दायरा विस्तृत होता है और किसान की आमदनी में भी वृद्धि होती है।

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