कच्चे घर की मजबूरी से पक्के आशियाने तक पहुंचा कृष्णकुमार का परिवार

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  • Oct 08, 2026
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प्रधानमंत्री आवास ने बदली जिंदगी की तस्वीर, अब मौसम की चिंता छोड़ सुकून से गुजर रही हैं रातें

कोरिया, 8 अक्टूबर 2026।

दूसरों के खेतों में मेहनत कर आजीविका चलाने वाले श्रमिक परिवार के लिए पक्का मकान केवल छत नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत बन सकता है। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत कटगोड़ी निवासी किसान परिवार के मुखिया कृष्णकुमार और उनकी पत्नी के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत मिला पक्का घर पारिवारिक और सामाजिक बदलाव का आधार बना है। कभी कच्चे मकान में बारिश और ठंड के मौसम की परेशानियां झेलने वाला यह परिवार अब सुरक्षित आशियाने में सुकून से जीवन बिता रहा है।

दो एकड़ जमीन, बारिश आधारित खेती से सीमित आमदनी

कृष्णकुमार के पास करीब दो एकड़ कृषि भूमि है, जिस पर वे वर्षा आधारित धान की फसल लेते हैं। खेती से होने वाली सीमित आय के अलावा परिवार की आजीविका के लिए उन्हें दूसरे किसानों के खेतों में मेहनत-मजदूरी करनी पड़ती थी। इसके साथ ही अकुशल रोजगारमूलक योजनाओं के माध्यम से मिलने वाला दैनिक रोजगार भी उनकी आय का एक जरिया रहा है।

सीमित आमदनी के बीच परिवार के लिए अपने दम पर पक्का मकान बनाना बड़ी चुनौती थी। उनकी आय इतनी ही थी कि किसी तरह परिवार का जीवन-निर्वाह हो सके। ऐसे में पक्के और सुरक्षित घर का सपना लंबे समय तक मुश्किल बना रहा।

प्रधानमंत्री आवास ने दिया सुरक्षित जीवन का संबल

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत बने पक्के मकान ने कृष्णकुमार के परिवार की इस बड़ी समस्या का समाधान कर दिया। पहले कच्चे मकान में बारिश के दौरान घर की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी, वहीं ठंड के मौसम में भी परिवार को परेशानी उठानी पड़ती थी।

आवास निर्माण के बाद परिवार को मौसम की मार से राहत मिली है। अब उन्हें बारिश और ठंड के दौरान पहले जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। पक्की छत ने परिवार को सुरक्षित जीवन के साथ भविष्य के प्रति भरोसा भी दिया है।

पक्का मकान बना सामाजिक पहचान का आधार

साधारण किसान और श्रमिक परिवार से आने वाले कृष्णकुमार के लिए अपनी कमाई से पक्का मकान बनाना आसान नहीं था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले पक्के घर ने न केवल उनकी पारिवारिक समस्या का समाधान किया, बल्कि परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई पहचान भी दी है।

अब कृष्णकुमार और उनकी पत्नी बरसात की रातें चिंता में जागकर नहीं, बल्कि अपने पक्के घर में चैन की नींद सोकर गुजार रहे हैं। उनके लिए यह आवास महज एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थायित्व और बेहतर भविष्य का संबल बन गया है।

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