अरावली में आयुर्वेद की जड़ें, पर्यावरण के पुनर्जीवन का संकल्प; भाटी माइंस में लगेंगे 10 हजार अश्वगंधा पौधे

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  • Sep 26, 2026
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नई दिल्ली। अरावली के क्षरित भू-दृश्य को हरित बनाने की पहल अब आयुर्वेद और वैज्ञानिक अनुसंधान से भी जुड़ रही है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली और 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत ने दक्षिण दिल्ली के भाटी माइंस स्थित टेरियर्स हर्बल गार्डन में 10 हजार अश्वगंधा पौधों के रोपण और वैज्ञानिक निगरानी की संयुक्त पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य औषधीय पौधों के संवर्धन को जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण सुधार और वैज्ञानिक अध्ययन से जोड़ना है।

24 सितंबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति और 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल मोहन सिंह ने पहल का नेतृत्व किया। संयुक्त कार्यक्रम में आयुर्वेद, औषधीय पादप और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में AIIA के अनुभव को सेना की पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और जैव विविधता संरक्षण की जमीनी विशेषज्ञता से जोड़ा गया है।

पौधों की वृद्धि और अनुकूलन का होगा वैज्ञानिक अध्ययन

अश्वगंधा के रोपण के साथ इसकी नियमित वैज्ञानिक निगरानी, अवलोकन और दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। इससे अरावली क्षेत्र की स्थानीय जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों में अश्वगंधा की वृद्धि तथा उसके अनुकूलन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा सकेगी। यह पहल आयुर्वेद में उपलब्ध पारंपरिक औषधीय ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच समन्वय का अवसर भी प्रदान करेगी।

AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि यह पहल औषधीय पौधों से जुड़े समृद्ध आयुर्वेदिक ज्ञान को वैज्ञानिक अनुसंधान और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन से जोड़ती है। अश्वगंधा आयुर्वेद का महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है और इसके व्यवस्थित संवर्धन, संरक्षण तथा वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण से ज्ञान सृजन के साथ जैव विविधता संरक्षण में भी योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोग आयुर्वेद, प्रकृति और सतत विकास के बीच संबंध को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

200 औषधीय प्रजातियों का पहले से संरक्षण

भाटी माइंस में इस पहल का पर्यावरणीय महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि यह क्षेत्र दिल्ली के दक्षिणी रिज और अरावली परिदृश्य का हिस्सा है। 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत द्वारा खनन से प्रभावित और क्षरित क्षेत्रों में पौधारोपण तथा हरित पुनर्स्थापन का कार्य किया जा रहा है।

टेरियर्स हर्बल गार्डन में पहले से ही औषधीय और आयुर्वेदिक महत्व वाली लगभग 200 प्रजातियों का रोपण एवं संरक्षण किया गया है। इनमें हरसिंगार, आंवला और घृतकुमारी (एलोवेरा) जैसे प्रमुख औषधीय पौधे शामिल हैं। हर्बल गार्डन के समुचित रखरखाव, वैज्ञानिक प्रबंधन और मार्गदर्शन के लिए AIIA को तकनीकी सहयोग की जिम्मेदारी दी गई है।

अश्वगंधा के औषधीय महत्व पर भी जोर

अश्वगंधा यानी Withania somnifera (L.) Dunal को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है। इसके स्वास्थ्य संबंधी महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) की ओर से “अश्वगंधा—एक स्वास्थ्य संवर्धक” अभियान भी चलाया गया है।

इस संयुक्त पहल के माध्यम से औषधीय पौधों से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान को भाटी माइंस के पर्यावरण सुधार से जोड़ा जाएगा। इससे जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।

शोधकर्ताओं और सैन्यकर्मियों ने लिया भाग

कार्यक्रम में AIIA के द्रव्यगुण विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मीना देवगड़े, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिवानी घिल्डियाल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विधान महाजन तथा विभाग के पीएचडी शोधार्थी शामिल हुए। 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत के अधिकारी और सैन्यकर्मी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

पौधारोपण पहल की योजना और क्रियान्वयन के समन्वय में 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत के मेजर जय सिंह शेखावत और AIIA के मेजर (डॉ.) आशीष कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

“आयुर्वेद की जड़ें—जैव विविधता का संरक्षण—पर्यावरण का पुनर्जीवन” के संदेश के साथ शुरू हुई यह पहल भारत के पारंपरिक औषधीय ज्ञान को वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और अरावली के हरित पुनर्स्थापन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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