रेल सुरक्षा को मिला नया कवच: दक्षिण मध्य रेलवे में पहली बार संस्करण 4.0 लागू

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  • Sep 23, 2026
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मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड के 108 किलोमीटर से अधिक मार्ग पर अपग्रेडेशन पूरा, बेहतर लोकेशन सटीकता और सिग्नलिंग के साथ सुरक्षित ट्रेन संचालन को मिलेगी मजबूती

नई दिल्ली, 23 सितंबर। भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए दक्षिण मध्य रेलवे पर पहली बार स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ के संस्करण 4.0 का सफल संचालन शुरू किया है। हैदराबाद डिवीजन के मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड में 108 किलोमीटर से अधिक रेल मार्ग पर कवच संस्करण 3.2 को अपग्रेड कर संस्करण 4.0 किया गया है। इससे ट्रेनों की लोकेशन की सटीकता, बड़े यार्डों में सिग्नल संबंधी जानकारी और मौजूदा सिग्नलिंग प्रणाली के साथ तकनीकी एकीकरण बेहतर होगा।

दक्षिण मध्य रेलवे में 1,465 किलोमीटर रेल मार्ग पर कवच संस्करण 3.2 के सफल संचालन से मिले अनुभव के आधार पर संस्करण 4.0 में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं। नए संस्करण को बेहतर सुरक्षा, उन्नत तकनीक, अधिक विश्वसनीयता और सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिहाज से विकसित किया गया है। भारतीय रेलवे में इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना है।

बड़े यार्डों में सिग्नल की बेहतर जानकारी

कवच 4.0 में ट्रेनों की स्थिति निर्धारित करने के लिए लोकेशन सटीकता को बेहतर बनाया गया है। इससे ट्रेन की वास्तविक स्थिति का अधिक सटीक निर्धारण संभव होगा। बड़े यार्डों में सिग्नल से जुड़े पहलुओं की बेहतर जानकारी मिलने से ट्रेन संचालन के दौरान स्थितिजन्य जागरूकता मजबूत होगी।

प्रणाली में ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) के माध्यम से स्टेशन-से-स्टेशन कवच इंटरफेस की सुविधा भी जोड़ी गई है। इससे संचार और विभिन्न प्रणालियों के बीच एकीकरण बेहतर होगा। इसके अलावा वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधे इंटरफेस की व्यवस्था की गई है, जिससे मौजूदा सिग्नलिंग ढांचे के साथ कवच का बेहतर समन्वय संभव होगा।

भारतीय रेलवे की जरूरतों के अनुरूप तैयार हुआ नया संस्करण

कवच 4.0 का विकास और परीक्षण पूरा किया जा चुका है और अब इसे भारतीय रेलवे की स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। भारत के विविध रेलवे नेटवर्क की अलग-अलग परिचालन और तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसमें महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।

इन तकनीकी बदलावों के साथ कवच 4.0 स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति है। इससे भारतीय रेलवे के व्यापक नेटवर्क पर उन्नत सुरक्षा प्रणाली के विस्तार के लिए मजबूत तकनीकी आधार तैयार होगा।

खतरे की स्थिति में खुद ब्रेक लगा सकता है कवच

कवच भारत में विकसित स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसे ट्रेनों को निर्धारित गति सीमा में संचालित करने में लोको पायलट की सहायता के लिए तैयार किया गया है। यदि लोको पायलट आवश्यक कार्रवाई करने में विफल रहता है, तो जरूरत पड़ने पर यह प्रणाली स्वतः ब्रेक लगा सकती है।

कवच को खतरे की स्थिति में सिग्नल पार करने (एसपीएडी) से बचाव, गंभीर परिस्थितियों में ट्रेन की गति नियंत्रित करने और टक्कर के जोखिम को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है। खराब मौसम की परिस्थितियों में भी यह सुरक्षित ट्रेन संचालन में सहायक है।

सुरक्षा से जुड़ी इस अत्याधुनिक तकनीक के लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रमाणन सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 (एसआईएल-4) की आवश्यकता होती है।

कवच के लिए ट्रैक से इंजन तक पूरा सुरक्षा नेटवर्क

कवच को किसी रेलखंड पर लागू करने के लिए व्यापक तकनीकी और संचार अवसंरचना तैयार करनी पड़ती है। इसके तहत स्टेशनों और ब्लॉक खंडों पर स्टेशन कवच की स्थापना की जाती है। ट्रैक की पूरी लंबाई में आरएफआईडी टैग लगाए जाते हैं और पूरे रेलखंड में दूरसंचार टावर स्थापित किए जाते हैं।

इसके साथ ही रेलवे ट्रैक के किनारे ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाती है तथा भारतीय रेल के परिचालन में शामिल इंजनों में लोको कवच की व्यवस्था की जाती है।

दक्षिण मध्य रेलवे पर कवच 4.0 का सफल संचालन स्वदेशी रेल सुरक्षा तकनीक को मजबूत करने के साथ भारतीय रेलवे नेटवर्क में उन्नत स्वचालित ट्रेन सुरक्षा क्षमताओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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