खेती-किसानी में एआई की वैश्विक क्रांति की तैयारी, नई दिल्ली में जुटे 95 विशेषज्ञ

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  • Oct 10, 2026
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आईएमसी-2026 में संयुक्त राष्ट्र की पहल की दूसरी बैठक में कृषि-खाद्य प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर मंथन;

सेंसर, ड्रोन और उपग्रह से लेकर स्मार्ट विश्लेषण तक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

 

अंतरराष्ट्रीय हैकाथॉन में उभरे कृषि समस्याओं के तकनीकी समाधान, वैश्विक स्तर पर किसान-केंद्रित एआई और साझा मानकों को बढ़ावा देने की पहल

नई दिल्ली : 10 अक्टूबर 2026। खेती-किसानी को आधुनिक, अधिक सक्षम और संसाधनों के लिहाज से किफायती बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के जिम्मेदार इस्तेमाल पर वैश्विक स्तर पर मंथन तेज हो गया है। भारत मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी)-2026 के दौरान कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए एआई पर संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक पहल (जीआई-एआई4एफएस) की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसमें करीब 70 प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष और 25 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन भाग लेकर कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नवाचारों को जमीन पर उतारने के उपायों पर चर्चा की।
दूरसंचार और कृषि संस्थानों की संयुक्त पहल
बैठक की मेजबानी भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (टीईसी) ने की। इसका संयुक्त आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के साथ किया गया। जीआई-एआई4एफएस संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक पहल है, जिसका समन्वय अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू), खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के निकट सहयोग से करता है।
वैश्विक विशेषज्ञों ने रखे विचार
उद्घाटन सत्र में जीआई-एआई4एफएस के अध्यक्ष डॉ. सेबेस्टियन बॉसे ने प्रारंभिक संबोधन दिया। इसके बाद एफएओ में रणनीति, नवाचार और भागीदारी के वरिष्ठ विशेषज्ञ कृष्णन पल्लास्सना, आईटीयू के दूरसंचार मानकीकरण ब्यूरो के उप निदेशक डॉ. बिलेल जमौसी, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के अंतर्गत आईसीएआर में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के उप महानिदेशक डॉ. ए.के. नायक और दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र के वरिष्ठ उप महानिदेशक एवं प्रमुख सैयद तौसीफ अब्बास ने विचार रखे। बैठक में अंतरराष्ट्रीय संगठनों, सरकारी विभागों, कृषि अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और मानक विकास संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
ड्रोन, सेंसर और उपग्रह से बदलेगी खेती की तस्वीर
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिजिटल कनेक्टिविटी का समन्वित उपयोग कृषि पद्धतियों में व्यापक बदलाव ला सकता है। कनेक्टेड सेंसर, मौसम केंद्र, ड्रोन, उपग्रह आधारित प्रणालियां और एआई-सक्षम विश्लेषण सटीक खेती को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। इन तकनीकों से पानी और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग, फसल रोगों की समय रहते पहचान और किसानों को अधिक सटीक निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है। डिजिटल तकनीक कृषि उत्पादों के स्रोत का पता लगाने की क्षमता यानी ट्रैसेबिलिटी बेहतर करने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को घटाने और कृषि आपूर्ति शृंखला की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी उपयोगी हो सकती है।
हैकाथॉन में खोजे गए खेती की समस्याओं के समाधान
बैठक से पहले 8 और 9 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित आईसीएआर परिसर में कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए एआई पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हैकाथॉन आयोजित किया गया। इसका संयुक्त आयोजन टीईसी और आईसीएआर ने किया। इसमें छात्रों, शोधकर्ताओं, डेवलपर्स और नवप्रवर्तकों को कृषि एवं खाद्य क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक तकनीकी उपाय विकसित करने का सहयोगी मंच मिला।
जीआई-एआई4एफएस की बैठक में हैकाथॉन के परिणाम भी प्रस्तुत किए गए। चयनित टीमों ने अपने समाधान और विकसित किए गए नवीन एआई अनुप्रयोगों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विजेता समाधानों की प्रस्तुति, उत्कृष्ट नवाचारों को मान्यता और पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। इसमें भाग लेने वाली टीमों, सहयोगी संस्थानों, मार्गदर्शकों और अन्य योगदानकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की गई।
शासन व्यवस्था और कार्य समूहों पर भी चर्चा
बैठक में जीआई-एआई4एफएस के शासन ढांचे और संगठनात्मक विकास से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसमें प्रस्तावित शासन एवं समन्वय संरचना, कार्य समूहों के अध्यक्षों, सह-अध्यक्षों और सदस्यों के नामांकन व पुष्टि, कार्य समूहों के कार्यक्षेत्र तथा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और शुरुआती कार्यों की पहचान शामिल रही।
किसान-केंद्रित और भरोसेमंद एआई पर जोर
जीआई-एआई4एफएस की दूसरी बैठक ने कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में एआई के जिम्मेदार उपयोग को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संवाद का मंच उपलब्ध कराया। इसका प्रमुख उद्देश्य भरोसेमंद, परस्पर-संचालनीय और किसान-केंद्रित एआई समाधानों को प्रोत्साहित करना, शासन व्यवस्था और तकनीकी मानकों पर वैश्विक सहयोग मजबूत करना तथा नवाचारों को व्यावहारिक उपयोग में बदलने के अवसर तलाशना रहा। बैठक में हुई चर्चा से कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के व्यापक और प्रभावी इस्तेमाल की दिशा में साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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