चूल्हा-चौका संभालने वाली प्रतिमा ने खोली किराना दुकान, बिहान से मिली नई आर्थिक पहचान

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  • Oct 04, 2026
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कोरिया, 04 अक्टूबर 2026।

कभी घर और खेत तक सीमित रहने वाली कोरिया जिले की प्रतिमा सूर्यवंशी आज अपने परिवार के लिए मजबूत आर्थिक सहारा बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने अपने लिए रोजगार का रास्ता बनाया और अब गांव में खुद की किराना दुकान संचालित कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। उनकी ‘लखपति दीदी’ बनने की कहानी सोनहत जनपद पंचायत के दूरस्थ गांव धनपुर की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

कुछ करने की चाह ने दिखाई नई राह

सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्रतिमा पहले खेती और घर-गृहस्थी तक ही सीमित थीं। परिवार के पास आय का कोई अन्य मजबूत साधन नहीं होने के कारण आर्थिक परेशानियां बनी रहती थीं। इसी दौरान गांव में बिहान योजना से जुड़ी महिलाओं की टीम पहुंची और ग्रामीण महिलाओं को योजना तथा उससे मिलने वाले लाभों की जानकारी दी।

बिहान योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद प्रतिमा के मन में भी अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की इच्छा जगी। उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया।

स्व-सहायता समूह से शुरू हुआ सफर

बिहान की मैदानी टीम की समझाइश के बाद गांव की महिलाओं ने मिलकर ‘चांद स्व-सहायता समूह’ का गठन किया। प्रतिमा भी समूह की सदस्य बनीं। समूह के माध्यम से महिलाओं ने सामूहिक रूप से आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह चुनी।

बिहान के माध्यम से समूह को पहले आरएफ (रिवॉल्विंग फंड) और इसके बाद सीआईएफ (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) से सहायता मिली। इसी प्रक्रिया के आगे प्रतिमा ने समूह के माध्यम से 2 लाख रुपये का बैंक ऋण प्राप्त किया और अपने लिए स्वरोजगार का रास्ता तैयार किया।

घर से शुरू किया किराना कारोबार

अपने व्यवसाय के लिए किराना दुकान को चुनने के पीछे प्रतिमा की स्थानीय जरूरतों की समझ महत्वपूर्ण रही। उन्होंने बताया कि धनपुर मुख्यालय से काफी दूर स्थित गांव है। ऐसे में ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने के लिए दूर जाना पड़ता था।

इसी जरूरत को अवसर में बदलते हुए प्रतिमा ने अपने घर से ही किराना व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने दुकान में दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराईं। ग्रामीणों को गांव में ही जरूरत का सामान मिलने लगा और देखते ही देखते उनका कारोबार स्थापित हो गया।

आज प्रतिमा इस व्यवसाय से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका सफर बताता है कि सही मार्गदर्शन, स्व-सहायता समूह और समय पर मिली आर्थिक सहायता के जरिए ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं।

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