भारत की प्रतिष्ठा व सुरक्षा में ही हमारी प्रतिष्ठा, सुरक्षा है – डॉ. मोहन भागवत जी

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  • Sep 16, 2026
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नई दिल्ली, 16 सितंबर। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आई.आई.एल.एम. विश्वविद्यालय एवं बेनयान ट्री विद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कक्षा 10 से स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) तक के छात्रों से संवाद कर उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।

शिक्षकों व छात्रों को संबोधित करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि विचार एक एनर्जी है, उस एनर्जी को डायरेक्शन मिली तो उसका उपयोग अपने लिए भी होगा, विश्व के लिए भी होगा। हम विश्व के अंग हैं। इसलिए, लिव एंड लेट लिव, इसमें एक और जोड़ता हूं लिव एंड मेक अदर्स टू लिव। इसके लिए शिक्षा (एजुकेशन) है। स्कूल-कॉलेज में ज्ञान मिलता है, लेकिन ज्ञान को भी डायरेक्शन चाहिए। अपने यहां कहते हैं शील, यानी कैरेक्टर। और जिसके पास कैरेक्टर है, उसके हाथ में ज्ञान है तो वह अन्य लोगों को भी ज्ञानवान बनाता है, पैसा आया तो लोगों के उपकार के लिए दान करता है, सबकी भलाई के लिए काम करता है। हाथ में शक्ति आई तो दुर्बलों को प्रश्रय देने के लिए उसका उपयोग करता है। और जिसके पास शील नहीं है, वह क्या करता है? ज्ञान आ गया उसके पास तो विवाद फैलाता है, छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़े पैदा करता है। दुनिया में डायवर्सिटी है। जिसके पास शील है, उसको ज्ञान मिला तो वह आपस की छोटी-छोटी बातों पर लेकर झगड़ा करने वाले लोगों को जोड़ता है। और जिसके पास शील नहीं है, वह छोटी-छोटी बातें ढूंढता है और उसके आधार पर झगड़े फैलाता है।

शिक्षा चरित्र निर्माण के लिए होती है। क्योंकि पशुओं का चरित्र अलग रहता है। खाना-पीना, अपनी संख्या बढ़ाना, एक दिन मर जाना। उनके लिए दूसरा कुछ ऑप्शन नहीं है। लेकिन मनुष्य के लिए ऑप्शन है। आप अच्छे बनो या खराब बनो। यह आपके हाथ में है। शिक्षा यह चूज़ करना सिखाती है। मेरा तो अच्छा होगा ही, और कितने लोगों का अच्छा होगा, वह मैं करुंगा। जिससे लोगों को बुरा होगा, वह मैं नहीं करुंगा। अपने जीवन को Successful बनाना है तो भी और Meaningful बनाना है तो भी यही करना पड़ता है। आप किसी भी Successful आदमी का चरित्र देख लीजिए, वह Meaningful बना इसलिए Successful रहा। और Successful तब बना जब उसके Successful बनने से सबका भला हुआ।

हम जो सीख रहे हैं, उसके तीन भाग हैं। एक है इन्फर्मेशन जो हमें मिलती है। दूसरा है नॉलेज, इस इन्फर्मेशन का उपयोग क्या है, कैसे करना, यह पता चलता है। तीसरी बात है विज़डम, विज़डम के बिना ज्ञान अपूर्ण है।

हम कहते हैं अपना राष्ट्र बड़ा हो। अपने राष्ट्र को पर्पज़ ही यही मिला है कि अपने चरित्र से सारी दुनिया को जीवन कैसे जीना है, इसकी सीख देनी है। इसके लिए भारत है, भारतीय लोग हैं। हम अमेरिका जैसा महाशक्ति नहीं बनेंगे। हम आर्थिक स्थिति में नंबर एक बनेंगे, सामरिक शक्ति में नंबर एक बनेंगे। लेकिन हमारे लिए वह एक पड़ाव होगा। वह हमारा लक्ष्य नहीं है, हमारा उद्देश्य है सम्पूर्ण दुनिया को अच्छा बनाना।

अपने देश को अच्छा बनाए रखना सबका कर्तव्य होता है। जिसका देश ठीक नहीं है, उसके ज्ञान की कोई प्रतिष्ठा नहीं होती। उसकी अपनी कोई सुरक्षा नहीं होती। भारत की प्रतिष्ठा, सुरक्षा में हमारी प्रतिष्ठा, सुरक्षा है। भारत की प्रतिष्ठा इसमें है कि वह महाशक्ति बन सकता है, लेकिन महाशक्ति नहीं बनेगा। वह सबको अच्छी शक्ति देगा ताकि दुनिया के जीवन में सब लोग कंट्रीब्यूट कर सकें। ऐसा भारत बनाने का काम आपके कंधे पर आने वाला है, इसको ध्यान में रखकर सब सीखना आवश्यक है।

सरसंघचालक जी ने कहा कि नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी से अधिक ईमानदार है, उनमें प्राकृतिक रूप से अधिक साहस है। एक ठीक दिशा पकड़ कर अपना विकास करना चाहिए और ध्यान यह रखना चाहिए कि हमारा जीवन केवल हमारे लिए नहीं है।

कार्यक्रम की प्रस्तावना आई.आई.एल.एम के चेयरमैन अनिल राय जी ने रखी।

 

 

 


 

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