सीएसआर में अब खर्च नहीं, जमीन पर दिखाना होगा विकास

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  • Oct 11, 2026
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कोयला कंपनियों के लिए नई रूपरेखा जारी, स्थानीय जरूरतों के मुताबिक परियोजनाओं पर जोर


मंत्री सतीश चंद्र दुबे बोले—समाज के जीवन में बदलाव ही आर्थिक प्रगति का असली पैमाना


नई दिल्ली ,  सीएसआर में अब रकम खर्च करने भर से काम नहीं चलेगा, विकास का असर जमीन पर दिखाना होगा। कोयला कंपनियों को स्थानीय समुदायों की जरूरतों के मुताबिक ऐसी परियोजनाएं चलानी होंगी, जिनसे लोगों की जिंदगी बदले और संसाधन-संपन्न क्षेत्रों को विकास की नई रफ्तार मिले। तीसरे राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन में राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कोयला कंपनियों के लिए नई रूपरेखा जारी करते हुए साफ किया कि आर्थिक प्रगति का असली पैमाना समाज के जीवन में आने वाला बदलाव है।
अनुपालन से आगे, परिणाम पर जोर
6 और 7 अक्टूबर को आयोजित तीसरे राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (एनसीसीएसआर-2026) का विषय था—‘विकसित भारत के लिए सीएसआर की भावना का पुनर्मूल्यांकन : अनुपालन से प्रतिबद्धता तक’। सम्मेलन में केंद्र सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने सीएसआर को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने पर विचार साझा किए।
सीएसआर फैक्टबुक जारी
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव पल्लवी जैन गोविल ने ‘इंडिया सीएसआर फैक्टबुक 2024–25’ जारी की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सीएसआर सामूहिक प्रयास का महत्वपूर्ण माध्यम है। भारत की सीएसआर व्यवस्था में वैधानिक दायित्वों के साथ निदेशक मंडल की निगरानी, सार्वजनिक प्रकटीकरण और प्रभाव आकलन की भी अहम भूमिका है।
भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि सीएसआर की सफलता स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, आजीविका कार्यक्रमों और गांवों में दिखने वाले बदलाव से आंकी जानी चाहिए। सम्मेलन और प्रदर्शनी ने प्रभावी पहलों को साझा करने तथा नई साझेदारियां विकसित करने का अवसर दिया।
स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनें योजनाएं
सम्मेलन में सोशल स्टॉक एक्सचेंज, सामाजिक क्षेत्र के वित्तपोषण, कॉर्पोरेट प्रशासन और सीएसआर परियोजनाओं की निगरानी पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने परियोजनाओं के चयन में साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण, निदेशक मंडल की सक्रिय भागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को जरूरी बताया। क्षेत्र-आधारित सीएसआर योजनाओं को स्थानीय विकास प्राथमिकताओं और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप बनाने पर भी जोर दिया गया।
खर्च से आगे बढ़े सीएसआर की भूमिका
सम्मेलन में कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया के लिए विकसित क्षेत्र-विशिष्ट सीएसआर रूपरेखाओं का उल्लेख किया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि सीएसआर को वार्षिक खर्च और औपचारिक अनुपालन तक सीमित रखने के बजाय ठोस परिणामों और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव से जोड़ना होगा। सम्मेलन का आयोजन कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के तहत आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट ने किया।

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