भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह में मध्यप्रदेश ने साझा की जल प्रबंधन की रूपरेखा अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने जल सुरक्षा, ग्रीन बॉन्ड और ‘नमामि नर्मदे’ मिशन पर रखे विचार

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  • Sep 25, 2026
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भोपाल | 25 सितंबर 2026

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 9वें ‘भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह’ में मध्यप्रदेश ने संधारणीय जल प्रबंधन से जुड़ी अपनी पहल और अनुभव साझा किए। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने ‘जल को राष्ट्रीय परिसंपत्ति के रूप में पुनर्परिभाषित करना’ विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय परिचर्चा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।

संजय दुबे ने कहा कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आर्थिक संवृद्धि, पर्यावरण संरक्षण, नगरीय विकास और दीर्घकालिक योजना से जुड़ा महत्वपूर्ण संसाधन है। उन्होंने भावी जल सुरक्षा और मजबूत शहरों के लिए नए वित्तीय तंत्र, टिकाऊ अधोसंरचना और एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन को अपनाने की आवश्यकता बताई।

इंदौर के ग्रीन बॉन्ड का किया उल्लेख

परिचर्चा में मध्यप्रदेश की जल प्रबंधन नीतियों और नवाचारों की जानकारी देते हुए संजय दुबे ने इंदौर में नर्मदा नदी प्रणाली से जुड़ी जल अधोसंरचना के लिए जारी ग्रीन बॉन्ड का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए नगरीय विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में प्रयास किया गया है। प्रदेश में संधारणीय अधोसंरचना, वित्तीय प्रबंधन और जल संरक्षण को एकीकृत करने पर जोर दिया जा रहा है।

‘नमामि नर्मदे’ मिशन पर भी चर्चा

संजय दुबे ने ‘नमामि नर्मदे’ मिशन को नदियों के पुनरुद्धार, पारिस्थितिकी संरक्षण और दीर्घकालिक जल सुरक्षा से जुड़ी पहल बताया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग को भी प्राथमिकता देना जरूरी है।

उन्होंने जल सुरक्षा को भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, समावेशी विकास और मजबूत नगरीकरण से जोड़ते हुए प्रदेश की पहल की जानकारी साझा की।

‘इंडिया वाटर डाइजेस्ट’ पॉलिसी ब्रीफ का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार ‘इंडिया वाटर डाइजेस्ट: स्केलिंग इन्वेस्टमेंट फॉर ए वाटर-सिक्योर इंडिया’ पॉलिसी ब्रीफ का विमोचन किया गया।

रिपोर्ट में जल क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और देश की विकास प्रक्रिया में जल सुरक्षा को महत्वपूर्ण आर्थिक आधार के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया गया है। कार्यक्रम में देश-विदेश के नीति निर्माता, विकास संस्थाओं के प्रतिनिधि और जल क्षेत्र के विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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