भोपाल में अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव: थाईलैंड की रामकथा और केरल के कुटियाट्टम ने मोहा दर्शकों का मन

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  • Oct 15, 2026
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भोपाल, 16 अक्टूबर 2026। राजधानी भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव के चौथे दिन भारत और थाईलैंड की पारंपरिक नाट्य कलाओं के माध्यम से रामकथा के विभिन्न प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया। रवींद्र भवन परिसर में आयोजित इस उत्सव में थाईलैंड की रामाकिएन परंपरा और केरल की शास्त्रीय नाट्य शैली कुटियाट्टम ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विविधता से परिचित कराया।

संस्कृति विभाग और श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास की ओर से आयोजित इस उत्सव में कलाकारों ने पारंपरिक अभिनय, मुद्राओं और संगीत के माध्यम से रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया।

थाईलैंड की रामाकिएन शैली में राम-रावण युद्ध का मंचन

कार्यक्रम में थाईलैंड के ‘श्री रामाकेन दल’ ने पारंपरिक मुखौटों और भावपूर्ण मुद्राओं के साथ रामाकिएन पर आधारित मारीच प्रसंग, सीता हरण और राम-रावण युद्ध का मंचन किया। इस प्रस्तुति के जरिए दर्शकों को थाईलैंड की पारंपरिक रामकथा और उसकी विशिष्ट नाट्य शैली देखने का अवसर मिला।

कुटियाट्टम में दिखा जटायु के बलिदान का मार्मिक प्रसंग

केरल की प्राचीन शास्त्रीय नाट्य परंपरा कुटियाट्टम शैली में शक्तिभद्र रचित संस्कृत नाटक ‘आश्चर्यचूड़ामणि’ के चौथे अंक ‘जटायुवधम्’ की प्रस्तुति दी गई।

कुटियाट्टम केंद्र, केरल और ‘नेपथ्य’ संस्था के कलाकारों ने रावण-जटायु संवाद, युद्ध और जटायु के बलिदान के दृश्यों को पारंपरिक मुद्राओं और प्रभावशाली अभिनय के जरिए साकार किया।

प्रस्तुति में मार्गी मधु चाक्यार ने रावण, नेपथ्य राहुल चाक्यार ने जटायु और नेपथ्य आरती ने सीता की भूमिका निभाई। मिझावु और इडक्का वाद्यों की संगत ने मंचन को और प्रभावशाली बनाया।

संचालक (संस्कृति) एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी एन.पी. नामदेव ने बताया कि उत्सव का उद्देश्य विभिन्न कला विधाओं के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को आमजन, खासकर युवाओं तक पहुंचाना है।

रामायण के मूल्यों से युवाओं को जोड़ने की पहल

उत्सव के तहत तीन दिवसीय ‘कौशलेय की वन-गमन गाथा’ कथा-वाचन सत्र की भी शुरुआत हुई। पहले सत्र में अलवर के अंकित अवस्थी ने ‘श्रीरामचंद्र वन-गमन पथ’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने युवा पीढ़ी को रामायणकालीन संस्कृति से जोड़ने के साथ चित्रकूट से जुड़े त्याग, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डाला।

इसके बाद मुंबई की अमि गणात्रा ने ‘वाल्मीकि के हनुमान – बुद्धिमताम् वरिष्ठम्’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने वाल्मीकि रामायण में हनुमान के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित करते हुए उनकी बुद्धिमत्ता, संवाद-कौशल और वेद-व्याकरण के ज्ञान पर चर्चा की।

16 अक्टूबर को ‘काव्य-मानस’ में आमजन भी कर सकेंगे सहभागिता

श्रीरामलीला उत्सव के पांचवें दिन शुक्रवार, 16 अक्टूबर को रवींद्र भवन के अंजनी सभागार में दोपहर 2 बजे से ‘काव्य-मानस’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें आमजन श्रीराम पर केंद्रित भजन, कविता, गान और दोहे प्रस्तुत कर सकते हैं। कार्यक्रम में सहभागिता निःशुल्क रहेगी।

दिन के अन्य कार्यक्रमों में प्रातः 11 बजे ‘राम-लेखन कला’ यानी टाइपोग्राफी कार्यशाला आयोजित होगी। शाम 5 बजे कथा-वाचन सत्र में संदीप द्विवेदी और आचार्य देवव्रत यथिनाथ जी महाराज व्याख्यान देंगे।

इसके बाद शाम 7 बजे से कर्नाटक की यक्षगान और ओडिशा की ओडिसी नृत्य शैली के माध्यम से रामकथा का मंचन किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव के माध्यम से दर्शकों को देश-विदेश की रामकथा परंपराओं, शास्त्रीय कलाओं और सांस्कृतिक मूल्यों से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है।

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