अपराध होने से पहले सतर्कता पर जोर, छत्तीसगढ़ में साइबर सुरक्षा का संदेश गांवों से शहरों तक

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  • Oct 18, 2026
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सात सप्ताह के साइबर जागृति अभियान में 1.70 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंची पुलिस, 5 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

रायपुर, 18 अक्टूबर 2026। 

डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित सेवाओं ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, लेकिन फर्जी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। ऐसे में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ नागरिकों को समय रहते जागरूक करना साइबर अपराधों की रोकथाम का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। छत्तीसगढ़ पुलिस इसी उद्देश्य से गांवों से शहरों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य नागरिकों को साइबर ठगी के नए तरीकों की जानकारी देना, संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सतर्क करना और डिजिटल सेवाओं का सुरक्षित उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है।

सात सप्ताह में 5 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम

छत्तीसगढ़ पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक सात सप्ताह का विशेष साइबर जागृति अभियान संचालित किया। प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों के माध्यम से चलाए गए इस अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनके जरिए 1 करोड़ 70 लाख से अधिक नागरिकों तक सीधे साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। अभियान में 5.5 लाख से अधिक जागरूकता सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी भी दर्ज की गई।

अभियान के तहत पुलिस ने जागरूकता गतिविधियों को केवल शहरों और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित नहीं रखा। ग्राम पंचायतों, ग्राम सभाओं, हाट-बाजारों, धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचकर लोगों से सीधा संवाद किया गया। विद्यार्थियों, महिलाओं, युवाओं, ग्रामीणों और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर अपराधों के बदलते तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।

ऑनलाइन ठगी से बचाव के लिए दी गई जरूरी जानकारी

साइबर जागृति अभियान को सात विषय आधारित सप्ताहों में संचालित किया गया। इनमें डिजिटल सुरक्षा, यूपीआई और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक साइबर सुरक्षा संकल्प जैसे विषय शामिल रहे।

नागरिकों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, फर्जी कॉल पर भरोसा करने और नकली निवेश योजनाओं के झांसे में आने से बचने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही ओटीपी, पासवर्ड और यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धमकाकर पैसे मांगने वाले लोगों से सावधान रहने पर भी विशेष जोर दिया गया। पुलिस ने लोगों को समझाया कि साइबर अपराधी अक्सर तकनीकी जानकारी की कमी, भय और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। ऐसे में किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर बिना जांच-पड़ताल के प्रतिक्रिया देने के बजाय सतर्कता बरतना जरूरी है।

जिलों के नवाचारों से समुदायों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

साइबर जागृति अभियान के दौरान विभिन्न जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जागरूकता की नई पहल की गई। मुंगेली जिले में ग्राम पंचायतों और विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई।

गरियाबंद में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को जागरूक किया गया, ताकि वे अपने परिवारों और आसपास के लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा सकें।

दुर्ग जिले में ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया। जांजगीर-चांपा में ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के माध्यम से लगभग 1 लाख 61 हजार लोगों तक संदेश पहुंचाया गया।

बिलासपुर में आकाशवाणी के लाइव फोन-इन कार्यक्रम के माध्यम से लगभग आठ लाख श्रोताओं को साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई। कोंडागांव में साइबर चेतना रथ के जरिए लोगों को जागरूक किया गया, जबकि रायपुर में बिजली बिलों के माध्यम से साइबर ठगी से संबंधित चेतावनी संदेश पहुंचाए गए। रायगढ़ में लघु फिल्म प्रतियोगिता के जरिए साइबर अपराधों और उनसे बचाव के उपायों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया।

इन पहलों में महिलाओं, विद्यार्थियों और ग्रामीण समुदायों की भागीदारी ने जागरूकता संदेश को परिवारों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज

अभियान के दौरान डिजिटल माध्यमों का भी व्यापक उपयोग किया गया। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज मिले।

रायपुर में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों के माध्यम से साइबर अपराधों के तौर-तरीकों और उनसे बचने के उपायों को सरल एवं प्रभावी ढंग से सामने लाया गया। युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ के रूप में जोड़ने की पहल भी अभियान का हिस्सा रही, ताकि वे स्वयं जागरूक बनने के साथ अपने परिवार और समाज में भी सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा कर सकें।

साइबर ठगी के नेटवर्क पर भी कार्रवाई

जनजागरूकता के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस साइबर अपराधियों के नेटवर्क के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है। साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों, ऐसे खाते खुलवाने में संलिप्त बैंककर्मियों और फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने 9 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित साइबर जागृति अभियान के अभिनंदन समारोह में बताया कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क के खिलाफ की गई कार्रवाई से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी दर में वृद्धि हुई है।

पुलिस नागरिकों को साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए भी जागरूक कर रही है। समय पर शिकायत मिलने से धोखाधड़ी में इस्तेमाल की गई राशि को रोकने या वापस प्राप्त करने की संभावना बढ़ सकती है।

आठ जिलों को किया गया सम्मानित

साइबर जागृति अभियान की उपलब्धियों और जिलों के नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए 9 अक्टूबर 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राज्यस्तरीय अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा शामिल हुए।

साइबर जागरूकता के क्षेत्र में अभिनव पहल करने वाले कोंडागांव, रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, दुर्ग, गरियाबंद और मुंगेली जिलों को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक हो गई है। साइबर अपराधों से बचाव केवल पुलिस और शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने साइबर जागृति अभियान को लगातार जारी रखने और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सात सप्ताह के विशेष अभियान का समापन साइबर जागरूकता के प्रयासों का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को देखते हुए नागरिकों को निरंतर जागरूक करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पुलिस धार्मिक आयोजनों, ग्राम सभाओं, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर लोगों को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दे रही है। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ जनजागरूकता बढ़ाना साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी है।

सतर्कता और जागरूकता से मजबूत होगी साइबर सुरक्षा

साइबर अपराधों की प्रकृति लगातार बदल रही है। अपराधी नई तकनीकों और तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाने का प्रयास करते हैं। ऐसे में अपराध होने के बाद जांच और कार्रवाई के साथ नागरिकों को पहले से सतर्क बनाना भी आवश्यक है।

छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर जागृति अभियान इसी दिशा में व्यापक प्रयास है। गांवों तक पहुंच, स्थानीय नवाचारों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी तथा डिजिटल माध्यमों के उपयोग से साइबर सुरक्षा की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई गई है।

नागरिकों के लिए जरूरी है कि वे डिजिटल लेनदेन के दौरान सतर्क रहें, ओटीपी, पासवर्ड और यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करें, संदिग्ध लिंक से बचें और किसी भी तरह की साइबर ठगी होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। जागरूकता के इन प्रयासों को निरंतर जारी रखने से साइबर अपराधों की रोकथाम को मजबूती मिल सकती है। डिजिटल युग में सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए पुलिस की कार्रवाई के साथ जागरूक और सतर्क नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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